Health Insurance: प्रीमियम बढ़ गया तो क्या बदल दें बीमा कंपनी? पोर्ट कराने से पहले जान लें ये 3 जरूरी बातें
हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम लगातार बढ़ रहा है और आप सस्ती पॉलिसी के लिए कंपनी बदलने की सोच रहे हैं? जल्दबाजी में लिया गया फैसला आपकी बीमा सुरक्षा पर असर डाल सकता है। एक्सपर्ट ने बताया है कि हेल्थ इंश्योरेंस पोर्ट कराने से पहले किन 3 बातों की जांच जरूरी है और कब दूसरी कंपनी में जाना फायदेमंद हो सकता है।

In Short
- एक्सपर्ट के मुताबिक, सिर्फ सस्ता प्रीमियम मिलने के आधार पर हेल्थ इंश्योरेंस पोर्ट कराना सही फैसला नहीं है।
- शादी, बच्चों और इलाज की बढ़ती लागत के हिसाब से जांचें कि मौजूदा पॉलिसी का कवर पर्याप्त है या नहीं।
- कंपनी बदलने से पहले क्लेम का अनुभव, एजेंट की सेवाएं और नई पॉलिसी में मिलने वाले फायदे जरूर जांचें।
हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम बढ़ने पर कई लोग दूसरी बीमा कंपनी की पॉलिसी लेने के बारे में सोचने लगते हैं। लेकिन क्या सिर्फ कम प्रीमियम मिलना पॉलिसी बदलने की पर्याप्त वजह है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हेल्थ इंश्योरेंस पोर्ट कराने का फैसला लेने से पहले मौजूदा कवरेज, परिवार की बदलती जरूरतों और बीमा कंपनी की सेवाओं का आकलन करना जरूरी है। कई बार पुरानी पॉलिसी में मिलने वाली सुविधाएं नई पॉलिसी से ज्यादा उपयोगी हो सकती हैं।
बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा और नीतू चंद्रा के सवालों का जवाब देते हुए डिजिट इंश्योरेंस (Digit Insurance) के अपॉइंटेड एक्चुअरी आदर्श अग्रवाल ने कहा कि हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी या बीमा कंपनी बदलने के लिए प्रीमियम ही एकमात्र आधार नहीं होना चाहिए। पॉलिसीधारकों को कई पहलुओं पर विचार करना चाहिए, ताकि नई पॉलिसी उनकी मौजूदा और भविष्य की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सके।
1. परिवार की जरूरतें बदल गई हैं तो जांचें कवरेज
आदर्श अग्रवाल ने बताया कि ज्यादातर लोग पहली हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी उस समय खरीदते हैं, जब वे अविवाहित होते हैं या करियर की शुरुआत कर रहे होते हैं। उस समय उनकी वित्तीय जिम्मेदारियां और बीमा की जरूरतें सीमित हो सकती हैं।
लेकिन शादी होने, बच्चे होने और परिवार बढ़ने के साथ हेल्थ इंश्योरेंस की जरूरतें भी बदल जाती हैं। ऐसे में यह जांचना जरूरी है कि मौजूदा पॉलिसी परिवार के सभी सदस्यों की जरूरतों के मुताबिक पर्याप्त सुरक्षा दे रही है या नहीं।
2. बढ़ती महंगाई के हिसाब से पर्याप्त है बीमा कवर?
एक्सपर्ट के मुताबिक, महंगाई बढ़ने के साथ इलाज का खर्च और पर्याप्त सम इंश्योर्ड यानी बीमा राशि की जरूरत भी बदल सकती है। कई साल पहले लिया गया हेल्थ इंश्योरेंस कवर आज के मेडिकल खर्चों के हिसाब से कम पड़ सकता है।
उन्होंने सलाह दी कि पॉलिसीधारकों को मौजूदा पॉलिसी के फायदे और शर्तों की समीक्षा करनी चाहिए। अगर उसमें ऐसी सुविधाएं नहीं हैं, जो परिवार की वर्तमान जरूरतों के लिए जरूरी हैं, तो बेहतर कवरेज वाली पॉलिसी तलाशने पर विचार किया जा सकता है।
3. क्लेम के समय कंपनी की सर्विस कैसी रही?
आदर्श अग्रवाल ने कहा कि हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी की सर्विस का असली आकलन अक्सर उस समय होता है, जब ग्राहक क्लेम करता है। इसलिए पॉलिसी बदलने का फैसला लेते समय यह देखना जरूरी है कि मौजूदा बीमा कंपनी क्लेम और दूसरी सेवाओं के मामले में कितना अच्छा अनुभव दे रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल बीमा कंपनी ही नहीं, बल्कि जिस एजेंट या ब्रोकर के जरिए पॉलिसी खरीदी गई है, उसकी सेवाएं भी महत्वपूर्ण हैं। अगर पॉलिसीधारक मौजूदा कंपनी या एजेंट की सेवाओं से संतुष्ट नहीं है, तो यह दूसरी कंपनी में जाने पर विचार करने की एक अहम वजह हो सकती है।
Health Insurance पोर्ट कराने से पहले क्या करें?
एक्सपर्ट के मुताबिक, पॉलिसी बदलने से पहले तीन बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पहली, मौजूदा प्रीमियम आपकी आर्थिक क्षमता के मुताबिक है या नहीं। दूसरी, वर्तमान कवरेज और परिवार की जरूरतों के बीच कोई अंतर तो नहीं है। तीसरी, बीमा कंपनी और एजेंट की सेवाओं से आप कितने संतुष्ट हैं।
आदर्श अग्रवाल की सलाह है कि कम प्रीमियम के आकर्षण में जल्दबाजी करने के बजाय अपनी जरूरतों और मौजूदा पॉलिसी के फायदों की तुलना करें। अगर कवरेज में कमी है या सेवाएं संतोषजनक नहीं हैं, तभी बेहतर विकल्प तलाशने पर विचार करें। पॉलिसी पोर्ट कराने से पहले नई पॉलिसी की शर्तें और लागू पोर्टेबिलिटी नियम भी अच्छी तरह समझ लें।