बीमा कंपनी ने रिजेक्ट कर दिया हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम? जानें कहां करें शिकायत और कैसे मिलेगा पैसा
हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने या पूरी रकम नहीं मिलने पर परेशान होने की जरूरत नहीं है। बीमा कंपनी के फैसले को चुनौती देने के लिए कई ऑप्शन मौजूद हैं। एक्सपर्ट से जानिए शिकायत कहां और कैसे दर्ज कराएं और समाधान नहीं मिलने पर आगे क्या कदम उठाएं।

In Short
- हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने पर भी कर सकते हैं अपने हक की मांग।
- बीमा कंपनी से समाधान न मिलने पर IRDAI के Bima Bharosa पोर्टल पर करें शिकायत।
- 1. बीमा लोकपाल से भी नहीं मिली राहत तो कंज्यूमर कोर्ट जाने का है ऑप्शन।
हेल्थ इंश्योरेंस लेने के बाद अगर जरूरत पड़ने पर आपका क्लेम रिजेक्ट हो जाए या बीमा कंपनी पूरी रकम देने के बजाय कम पैसे दे, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. कई बार पॉलिसीधारक बीमा कंपनी के फैसले को अंतिम मानकर आगे कोई कदम नहीं उठाते हैं. लेकिन क्लेम रिजेक्ट होने का मतलब यह नहीं है कि आपके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है. आप बीमा कंपनी के फैसले को चुनौती दे सकते हैं और अपनी शिकायत आगे तक पहुंचा सकते हैं.
बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Insurance Samadhan के को-फाउंडर और सीईओ दीपक भुवनेश्वरी उनियाल ने बताया कि हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने या कम रकम मिलने पर ग्राहकों के पास शिकायत करने के कई विकल्प मौजूद हैं. बीमा नियामक ने इसके लिए एक प्रक्रिया तय की है, जिसके जरिए पॉलिसीधारक अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं और जरूरत पड़ने पर उसे आगे बढ़ा सकते हैं.
सबसे पहले बीमा कंपनी से पूछें वजह
अगर आपका हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट हो गया है या कंपनी ने पूरी रकम नहीं दी है, तो सबसे पहले बीमा कंपनी को लिखित शिकायत भेजें. कंपनी से पूछें कि क्लेम क्यों रिजेक्ट किया गया या भुगतान में कटौती क्यों हुई.
कई बार क्लेम से जुड़ा विवाद पॉलिसी की शर्तों, रूम रेंट लिमिट, को-पेमेंट या जरूरी दस्तावेजों की कमी के कारण होता है. ऐसे में कंपनी से लिखित जवाब मिलने पर असली वजह समझने में मदद मिल सकती है.
जवाब से संतुष्ट नहीं हैं तो यहां करें शिकायत
अगर बीमा कंपनी का जवाब सही नहीं लगता है, तो आप कंपनी के Grievance Redressal Officer (GRO) के पास शिकायत कर सकते हैं. यहां आप कंपनी के फैसले को चुनौती दे सकते हैं और मामले की दोबारा जांच करने की मांग कर सकते हैं.
अगर इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं होता है, तो पॉलिसीधारक बीमा नियामक IRDAI के Bima Bharosa प्लेटफॉर्म पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक, इस प्रक्रिया में कंपनी से 14 दिनों के भीतर जवाब मिलने की व्यवस्था है.
इंश्योरेंस ओम्बड्समैन के पास भी जा सकते हैं
अगर शिकायत दर्ज कराने के बाद भी राहत नहीं मिलती है, तो अगला विकल्प Insurance Ombudsman यानी बीमा लोकपाल है. देश के अलग-अलग हिस्सों में बीमा लोकपाल मौजूद हैं, जहां ग्राहक अपने बीमा से जुड़े विवाद लेकर जा सकते हैं.
इसके बाद भी मामला नहीं सुलझता है, तो ग्राहक कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं. हालांकि, इस प्रक्रिया में ज्यादा समय लग सकता है.
पॉलिसीधारकों के लिए क्यों जरूरी है जानकारी?
मेडिकल खर्च लगातार बढ़ने के कारण हेल्थ इंश्योरेंस की अहमियत भी बढ़ रही है. ऐसे में सिर्फ प्रीमियम, अस्पतालों के नेटवर्क और वेटिंग पीरियड को देखना ही काफी नहीं है. क्लेम के दौरान बीमा कंपनी का रवैया भी महत्वपूर्ण होता है. इसलिए क्लेम रिजेक्ट होने पर बिना वजह जाने हार मानने के बजाय उपलब्ध शिकायत प्रक्रिया का इस्तेमाल करना जरूरी है.