Gold vs Silver: क्या मौजूदा कीमत में निवेश करना सही? एक्सपर्ट ने बताया लॉन्ग टर्म के लिए पैसा लगाएं या नहीं
सोना और चांदी में तेजी के बाद भी लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौका बना हुआ है। SMC Global Securities की वन्दना भारती के मुताबिक चांदी की बढ़ती औद्योगिक मांग और सप्लाई की कमी इसे मजबूत बना रही है। छोटे निवेशकों के लिए ETF के जरिए निवेश एक ऑप्शन हो सकता है।

In Short
- पिछले 10 साल में सोने का CAGR करीब 14% और चांदी का 17% से 18% रहा है।
- चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ने और अगले तीन साल में सप्लाई की कमी की उम्मीद है।
- छोटे निवेशकों के लिए एक्सपर्ट ने Gold BeES और Silver BeES के जरिए निवेश का ऑप्शन बताया है।
सोना और चांदी की कीमतों में तेज बढ़त के बावजूद मौजूदा स्तर पर लंबी अवधि के निवेशकों के लिए इनमें निवेश का मौका बना हुआ है। बिजनेस टुडे के एक शो में SMC Global Securities की वन्दना भारती ने कहा कि निवेशक लंबी अवधि के लिए सोना और चांदी में धीरे-धीरे निवेश बढ़ा सकते हैं। खासकर फिजिकल सोना-चांदी खरीदने के बजाय एक्सचेंज ट्रेडेड प्रोडक्ट्स के जरिए निवेश एक विकल्प हो सकता है।
10 साल में कैसा रहा रिटर्न?
वन्दना भारती के मुताबिक पिछले 10 साल के आंकड़ों को देखें तो सोने का CAGR करीब 14% रहा है। वहीं चांदी में यह करीब 17% से 18% रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले चार साल में चांदी का रिटर्न इससे भी ज्यादा मजबूत रहा है।
हालांकि ग्लोबल स्तर पर ऊंची ब्याज दरों के कारण निवेशकों के बीच यह सवाल है कि क्या सोना-चांदी में आगे की तेजी सीमित हो सकती है। भारती के मुताबिक फेस्टिव डिमांड, सेंट्रल बैंकों की खरीदारी और करेंसी में कमजोरी जैसे फैक्टर दोनों की कीमतों को सपोर्ट दे रहे हैं।
चांदी की मांग बढ़ने की उम्मीद
भारती का ज्यादा भरोसा चांदी पर नजर आता है। उनके मुताबिक कई नए सेक्टर में चांदी की जगह किसी दूसरी चीज का इस्तेमाल करना मुश्किल है। फोटोवोल्टिक एप्लिकेशन और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में चांदी की जरूरत बढ़ रही है। इसे क्रिटिकल मिनरल्स की लिस्ट में भी शामिल किया गया है।
चांदी को एक तरफ अनिश्चितता के समय निवेश का फायदा मिलता है तो दूसरी तरफ टेक्नोलॉजी और एनर्जी से जुड़े सेक्टर से भी इसकी मांग बढ़ रही है।
अगले तीन साल में सप्लाई की कमी
भारती ने अगले तीन वर्षों में चांदी के उत्पादन में कमी की संभावना का भी जिक्र किया। इससे बाजार में चांदी की उपलब्धता सीमित रह सकती है और तेजी का दौर 2027 और 2028 तक आगे बढ़ सकता है।
सोने के मामले में भी सप्लाई तेजी से नहीं बढ़ रही है। भारती के मुताबिक सोने के सालाना उत्पादन में बढ़ोतरी केवल करीब 1.5% है। उनका अनुमान है कि समय के साथ दोनों की कीमतों में सालाना करीब 14% से 17% की बढ़ोतरी हो सकती है।
छोटे निवेशकों के लिए ETF का ऑप्शन
छोटे निवेशकों के लिए भारती ने Gold BeES और Silver BeES जैसे एक्सचेंज ट्रेडेड प्रोडक्ट्स को बेहतर विकल्प बताया। इनमें कम रकम से निवेश शुरू किया जा सकता है, जबकि फिजिकल सोने का एक ग्राम खरीदने के लिए भी ज्यादा रकम की जरूरत होती है।
उन्होंने टैक्स को भी अहम बताया। उनके मुताबिक लंबी अवधि तक निवेश रखने पर टैक्स का असर कम हो सकता है, जबकि छोटी अवधि के ट्रेड पर स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स लगता है। ऐसे में निवेशक सोना और चांदी में एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय लंबे समय के लिए धीरे-धीरे निवेश कर सकते हैं।