सोना-चांदी या शेयर बाजार में कहां लगाएं पैसा? एक्सपर्ट ने बताया निवेश का सही फॉर्मूला
सोना-चांदी की कीमतों में तेजी और शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है कि पैसा कहां लगाएं। क्या शेयर बेचकर सोना खरीदना समझदारी है या लंबी अवधि के लिए इक्विटी बेहतर विकल्प है? फाइनेंशियल एक्सपर्ट पूजा विंडे ने निवेशकों को पोर्टफोलियो संतुलित रखने की सलाह दी है।

In Short
- सोना-चांदी की तेजी देखकर निवेश बढ़ाने से पोर्टफोलियो का संतुलन बिगड़ सकता है।
- लंबी अवधि के निवेश में इक्विटी की हिस्सेदारी 50 से 60 फीसदी रखने की सलाह।
- अगले 2 से 3 साल में पैसों की जरूरत है तो सोना और शेयर बाजार से दूरी बनाने की सलाह।
सोना-चांदी की कीमतों में तेजी और शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है कि आखिर पैसा कहां लगाया जाए? कई निवेशक बाजार की तेजी देखकर सोने और चांदी में पैसा लगा रहे हैं, तो कुछ शेयर बाजार के प्रदर्शन को लेकर परेशान हैं। बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए पीबी इन्वेस्टमेंट्स की सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर पूजा भिंडे ने कहा कि निवेश का फैसला बाजार की चाल देखकर नहीं, बल्कि अपने वित्तीय लक्ष्य और निवेश की अवधि के हिसाब से करना चाहिए।
सोना-चांदी में कितना पैसा लगाना सही?
पूजा विंडे के मुताबिक, हाल में सोने और चांदी की कीमतों में आई तेजी के बाद कई निवेशकों ने इनकी खरीदारी बढ़ा दी। कुछ लोगों ने तो शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने और चांदी में निवेश करना शुरू कर दिया।
लेकिन एक्सपर्ट के मुताबिक, ऐसा करना पोर्टफोलियो का संतुलन बिगाड़ सकता है। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी निवेशक के पोर्टफोलियो में सोने और चांदी की हिस्सेदारी 10 से 15 फीसदी के बीच होनी चाहिए।
उनका कहना है कि केवल कीमतों में तेजी देखकर निवेश बढ़ाना सही रणनीति नहीं है। निवेशकों को पहले से तय एसेट एलोकेशन के हिसाब से ही पैसा लगाना चाहिए।
शेयर बाजार में 50 से 60 फीसदी निवेश की सलाह
पूजा विंडे का मानना है कि लंबी अवधि में पैसा बनाने के लिए इक्विटी यानी शेयर बाजार की भूमिका सबसे अहम रहती है।
उन्होंने कहा कि अगर आपका निवेश लंबी अवधि के लक्ष्य के लिए है, तो पोर्टफोलियो का कम से कम 50 से 60 फीसदी हिस्सा इक्विटी में होना चाहिए। वहीं, डेट यानी फिक्स्ड इनकम वाले निवेश में 20 से 25 फीसदी पैसा रखा जा सकता है।
एक्सपर्ट्स की चर्चा में यह बात भी सामने आई कि शेयर बाजार के हालिया कमजोर प्रदर्शन को देखकर इक्विटी से दूरी बनाना सही नहीं होगा। कंपनियों की कमाई में मजबूती और मध्यम अवधि में बेहतर संभावनाएं भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हो सकती हैं।
FD और डेट में निवेश कितना जरूरी?
पूजा विंडे ने बताया कि फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD और दूसरे डेट निवेश पोर्टफोलियो को स्थिरता देने में मदद करते हैं।
हालांकि, इनमें कमाई की एक सीमा होती है। टैक्स काटने के बाद मिलने वाला वास्तविक रिटर्न भी उम्मीद से कम हो सकता है।
इसलिए डेट निवेश छोटी अवधि के लक्ष्यों और स्थिरता के लिए उपयोगी है, लेकिन इसे लंबी अवधि में संपत्ति बनाने का मुख्य जरिया नहीं समझना चाहिए।
अगले 2-3 साल में चाहिए पैसा तो क्या करें?
पूजा विंडे के मुताबिक, अगर आपको अगले दो से तीन साल में बच्चों की पढ़ाई, कार खरीदने या किसी दूसरे जरूरी काम के लिए पैसे चाहिए, तो इक्विटी और सोना सही विकल्प नहीं हैं।
उनकी सबसे अहम सलाह है कि निवेश का बंटवारा बाजार के उतार-चढ़ाव के बजाय पैसे की जरूरत कब पड़ेगी, इस आधार पर होना चाहिए।
यानी निवेशक पहले अपना लक्ष्य और समय तय करें, फिर उसी हिसाब से इक्विटी, सोना-चांदी और डेट में पैसा बांटें।