Gold Price: सोने में आने वाली है बड़ी तेजी? सरकारी बॉन्ड छोड़ गोल्ड की ओर क्यों भाग रहे निवेशक
दुनियाभर में बढ़ते सरकारी कर्ज और आर्थिक अनिश्चितता के बीच निवेशकों का भरोसा सोने पर बढ़ रहा है। सरकारी बॉन्ड के बजाय गोल्ड में निवेश क्यों बढ़ रहा है? क्या आने वाले दो साल में सोने की कीमतों में और तेजी आएगी? जानिए एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं।

In Short
- बढ़ते सरकारी कर्ज के बीच सोने की ओर बढ़ा निवेशकों का रुझान।
- केंद्रीय बैंकों ने सितंबर में खरीदा करीब 63 टन सोना।
- एक्सपर्ट्स को अगले दो साल में सोने की कीमतों में तेजी की उम्मीद।
दुनियाभर में बढ़ते सरकारी कर्ज और आर्थिक अनिश्चितता के बीच निवेशकों का रुझान सोने की तरफ बढ़ रहा है। अब कई निवेशक सरकारी बॉन्ड के बजाय गोल्ड में पैसा लगाने पर विचार कर रहे हैं। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारों की बिगड़ती आर्थिक स्थिति, करेंसी की घटती कीमत और वैश्विक तनाव के कारण सोना निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बन रहा है।
सरकारी बॉन्ड से क्यों दूर हो रहे निवेशक?
आमतौर पर सरकारी बॉन्ड को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन बढ़ता सरकारी कर्ज निवेशकों की चिंता बढ़ा रहा है। जब सरकारें ज्यादा उधार लेती हैं, तो उन्हें ब्याज चुकाने पर भी ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है। इससे सरकारी वित्तीय स्थिति को लेकर सवाल उठने लगते हैं।
ट्रॉय एसेट मैनेजमेंट की फंड मैनेजर शार्लोट योंग के मुताबिक, अमेरिका का बढ़ता सरकारी कर्ज और आर्थिक मंदी के दौरान केंद्रीय बैंकों की ओर से ज्यादा पैसा जारी किए जाने की संभावना सोने को आकर्षक बना रही है।
वहीं, एलाइड गोल्ड के चेयरमैन और सीईओ पीटर मैरोन का कहना है कि निवेशकों को संभावित वित्तीय संकट को ध्यान में रखते हुए अपने निवेश का आकलन करना चाहिए।
सोने में निवेश क्यों बढ़ रहा है?
सोने की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी कीमत किसी सरकार के कर्ज चुकाने की क्षमता पर निर्भर नहीं करती। यही वजह है कि करेंसी की कीमत गिरने और आर्थिक संकट की आशंका के बीच निवेशक इसे विकल्प के तौर पर देख रहे हैं।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ फंड मैनेजर्स को उम्मीद है कि अगले दो वर्षों में सोने की कीमतों को समर्थन मिल सकता है।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय बैंकों ने सितंबर में करीब 63 टन सोना खरीदा। यह नवंबर 2024 के बाद सबसे ज्यादा मासिक खरीद थी।
एंडेवर माइनिंग के सीईओ इयान कॉकरिल ने भी करेंसी की कमजोरी और रिजर्व की वैल्यू बनाए रखने की जरूरत को अहम बताया है।
क्या सोना सरकारी बॉन्ड से ज्यादा सुरक्षित है?
सोना आकर्षक निवेश जरूर है, लेकिन यह पूरी तरह जोखिम से मुक्त नहीं है। सोने पर कोई नियमित ब्याज नहीं मिलता और डॉलर, बॉन्ड यील्ड और बाजार के माहौल के हिसाब से इसकी कीमत तेजी से बदल सकती है।
दूसरी तरफ, सरकारी बॉन्ड से नियमित ब्याज मिल सकता है, लेकिन इनमें भी ब्याज दर, महंगाई और कर्ज चुकाने से जुड़े जोखिम होते हैं।
ऐसे में निवेशकों के लिए सिर्फ सोना या बॉन्ड चुनना जरूरी नहीं है। दोनों के साथ दूसरे निवेश विकल्पों में पैसा लगाकर जोखिम को संतुलित किया जा सकता है। निवेश का फैसला वित्तीय लक्ष्य, समय और जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करता है।