सोने की कीमतों पर क्यों बना रह सकता है दबाव? ब्याज दर, डॉलर और महंगाई समेत 5 बड़े फैक्टर समझिए
फिच सॉल्यूशंस की BMI ने अपनी नई रिपोर्ट में 2026 के लिए औसत गोल्ड प्राइस का अनुमान 4,600 डॉलर प्रति औंस से घटाकर 4,400 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। जानिए सोने की चमक फीकी पड़ने की 5 बड़ी वजहें

In Short
- BMI ने 2026 के लिए सोने की औसत कीमत का अनुमान 4,600 डॉलर से घटाकर 4,400 डॉलर प्रति औंस कर दिया है।
- मजबूत अमेरिकी डॉलर, ऊंची ब्याज दरें और घटते भू-राजनीतिक तनाव से सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
- महंगाई में नरमी और सुरक्षित निवेश की मांग घटने से रिकॉर्ड हाई पर जल्द लौटने की संभावना फिलहाल कम दिख रही है।
सोने की कीमतें हालिया गिरावट से उबर चुकी हैं, लेकिन जनवरी 2026 में बने रिकॉर्ड स्तर पर जल्द लौटने की संभावना कम दिख रही है। फिच सॉल्यूशंस की BMI ने अपनी नई रिपोर्ट में 2026 के लिए औसत गोल्ड प्राइस का अनुमान 4,600 डॉलर प्रति औंस से घटाकर 4,400 डॉलर प्रति औंस कर दिया है।
जानिए सोने की चमक फीकी पड़ने की 5 बड़ी वजहें
1) ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर
BMI का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व 2026 के बाकी समय में ब्याज दरों को 3.75% पर स्थिर रख सकता है। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो सोने में निवेश का आकर्षण थोड़ा कम हो जाता है क्योंकि इस पर कोई ब्याज नहीं मिलता। ऐसे में कई निवेशक बेहतर रिटर्न के लिए दूसरी जगह पैसा लगाना पसंद करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर आगे चलकर ब्याज दरों में उम्मीद से ज्यादा बढ़ोतरी होती है, तो सोने की कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है।
2) मजबूत डॉलर रोक सकता है तेजी
रिपोर्ट के अनुसार, डॉलर इंडेक्स (DXY) फिलहाल 98 से 102 के दायरे में रह सकता है, लेकिन इसके 105-110 तक पहुंचने की 30-40% संभावना भी है। मजबूत डॉलर से दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे वैश्विक मांग प्रभावित हो सकती है।
3) सुरक्षित निवेश की मांग घट सकती है
BMI का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं कम हुई हैं। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और पूंजी सुरक्षित निवेश जैसे सोने से निकलकर शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले एसेट्स की ओर जा सकती है। रिपोर्ट में 2026 के लिए वैश्विक वास्तविक GDP ग्रोथ 2.4% रहने का अनुमान जताया गया है।
4) भू-राजनीतिक तनाव में नरमी
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-ईरान तनाव कम होने से सोने में शामिल भू-राजनीतिक प्रीमियम भी घटा है। साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सामान्य शिपिंग बहाल होने की उम्मीद ने भी संकट के समय सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग को कमजोर किया है।
5) महंगाई घटने से भी असर
BMI का कहना है कि ऊर्जा कीमतों में नरमी से महंगाई की उम्मीदें भी कम हुई हैं। चूंकि सोने को महंगाई से बचाव के साधन के तौर पर देखा जाता है, इसलिए यदि मुद्रास्फीति कंट्रोल रहती है और मौद्रिक नीति में बड़ा बदलाव नहीं होता, तो सोने को मिलने वाला एक और बड़ा सहारा कमजोर पड़ सकता है।