सोना या चांदी? फेस्टिव सीजन से पहले निवेश के लिए कौन सा ऑप्शन बेहतर - जानिए एक्सपर्ट की राय

फेस्टिव सीजन से पहले सोना-चांदी में निवेश को लेकर एक्सपर्ट ने बड़ी सलाह दी है। घरेलू बाजार में मिल रहे मौजूदा मौके के बीच जानिए क्यों निवेश का तरीका बदलना जरूरी है और किस विकल्प में फायदा मिल सकता है। पूरी जानकारी के लिए पढ़ें यह खास रिपोर्ट।

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In Short

  • फेस्टिव सीजन से पहले सोना-चांदी खरीदने का मौका, घरेलू बाजार में मिल रहा डिस्काउंट
  • निवेश के लिए ETF, बार और कॉइन बेहतर विकल्प, ज्वेलरी पर मेकिंग चार्ज से घट सकता है रिटर्न
  • एक्सपर्ट की सलाह- पहनने के लिए खरीदें ज्वेलरी, निवेश के लिए कम लागत वाले विकल्प चुनें

By Gungun Mishra:

फेस्टिव सीजन से पहले सोने और चांदी में निवेश करने वाले लोगों के लिए मौजूदा समय एक अच्छा मौका हो सकता है। बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के हेड ऑफ कमोडिटी रिसर्च नवनीत दमानी के मुताबिक,घरेलू बाजार में सोना और चांदी अभी अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मुकाबले डिस्काउंट पर मिल रहे हैं। उनका मानना है कि यह डिस्काउंट ज्यादा समय तक नहीं रह सकता और त्योहारी मांग बढ़ने के साथ इसमें कमी आ सकती है।

फेस्टिव सीजन से पहले खरीदारी की सलाह

नवनीत दमानी ने कहा कि घरेलू बाजार में सोना करीब 50-60 डॉलर और चांदी करीब 10-20 सेंट या उससे ज्यादा के डिस्काउंट पर उपलब्ध है। ऐसे में निवेशकों के लिए मौजूदा स्तर पर खरीदारी का मौका बन सकता है।

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे फेस्टिव सीजन नजदीक आएगा, इस डिस्काउंट के खत्म होने की संभावना है। ऐसे में जो निवेशक सोना और चांदी में एक्सपोजर बढ़ाना चाहते हैं, वे इस मौके का इस्तेमाल कर सकते हैं।

निवेश के लिए ETF, बार और कॉइन बेहतर विकल्प

दमानी ने निवेशकों को सोना और चांदी खरीदने के तरीके पर भी सलाह दी। उनके मुताबिक, निवेश के लिए ETF या फिर फिजिकल रूप में बार और कॉइन खरीदना बेहतर विकल्प हो सकता है।

उन्होंने कहा कि इन माध्यमों से निवेशकों को कीमतों का सीधा फायदा मिलता है और इसमें ऐसे अतिरिक्त खर्च नहीं होते, जो ज्वेलरी खरीदने के दौरान देखने को मिलते हैं।

ज्वेलरी को निवेश का जरिया बनाने से बचें

दमानी ने साफ कहा कि अगर ज्वेलरी पहनने के लिए खरीदी जा रही है, तभी इसे खरीदना चाहिए। लेकिन अगर मकसद सिर्फ निवेश है तो ज्वेलरी से बचना बेहतर है।

उनके मुताबिक, ज्वेलरी में मेकिंग चार्ज एक बड़ा खर्च होता है, जो करीब 10% से 15% तक हो सकता है। इससे निवेश पर मिलने वाले रिटर्न पर असर पड़ता है। खासतौर पर तब जब सोने और चांदी की कीमतें पहले ही ऊंचे स्तर पर हों।

नई पीढ़ी बदल रही है ज्वेलरी खरीदने का तरीका

दमानी ने यह भी बताया कि ज्वेलरी खरीदने का ट्रेंड बदल रहा है। युवा ग्राहक अब हल्की और अलग तरह की ज्वेलरी पसंद कर रहे हैं। ऐसे में पारंपरिक ज्वेलरी को लंबे समय के निवेश के रूप में देखना सही नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि परिवारों को बच्चों के लिए आज ही ज्वेलरी में निवेश करने के बजाय उन्हें भविष्य में अपनी पसंद के हिसाब से फैसला लेने देना चाहिए।

निवेशकों के लिए क्या है सलाह?

दमानी की सलाह है कि अगर उद्देश्य संपत्ति को सुरक्षित रखना या पोर्टफोलियो में सोना-चांदी शामिल करना है, तो कम लागत वाले विकल्पों को प्राथमिकता देनी चाहिए। फेस्टिव सीजन से पहले मिल रहा मौजूदा डिस्काउंट निवेशकों के लिए एक सीमित समय का मौका हो सकता है।

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