सोना,शेयर या फिक्स्ड इनकम? अगले 12–18 महीनों के लिए मिलन पारिख ने बताया कहां दिख रहे मौके
अगले 12–18 महीनों में निवेशकों को शेयर बाजार, सोना, चांदी, फिक्स्ड इनकम या कैश में से किस पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए? Jainam Broking के Milan Parikh ने अलग-अलग निवेश विकल्पों के जोखिम और मौकों पर अपनी राय दी है। उन्होंने Large Cap से लेकर Gold और G-Sec तक निवेशकों के लिए आगे की रणनीति समझाई है।

In Short
- 10 साल के G-Sec की यील्ड करीब 7% है।
- Gold में धीरे-धीरे निवेश करने की सलाह।
- - Equity में मजबूत कंपनियों पर फोकस जरूरी।
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों के सामने बड़ा सवाल है कि अगले 12–18 महीनों में पैसा कहां लगाया जाए। शेयर बाजार, सोना, फिक्स्ड इनकम या कैश में से किसे चुना जाए? Jainam Broking के मैनेजिंग डायरेक्टर और चेयरमैन मिलन पारिख का मानना है कि किसी एक जगह पूरा पैसा लगाने के बजाय अलग-अलग निवेश विकल्पों में सही बंटवारा करना जरूरी है।
निवेशक बार-बार करते हैं ये गलतियां
पारिख के मुताबिक, बाजार का दौर बदलता रहता है, लेकिन निवेशकों का व्यवहार अक्सर एक जैसा रहता है। तेजी के समय निवेशक पिछले रिटर्न देखकर किसी शेयर या सेक्टर के पीछे भागने लगते हैं। वहीं बाजार गिरने पर डर में फैसले लेने लगते हैं।
उनका कहना है कि निवेश से पहले कंपनी के कारोबार, कमाई, शेयर की कीमत और उससे जुड़े जोखिम को समझना जरूरी है। सिर्फ कमाई देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। कंपनी का कैश फ्लो, बैलेंस शीट, मैनेजमेंट की क्वालिटी, बाजार में मुकाबला और आगे ग्रोथ की क्षमता भी देखनी चाहिए।
Large Cap या Small Cap में कहां मौका?
Large Cap कंपनियों के पास आमतौर पर स्थापित कारोबार और मजबूत बैलेंस शीट होती है। वहीं Mid और Small Cap कंपनियों में ज्यादा ग्रोथ की संभावना हो सकती है, लेकिन जोखिम भी ज्यादा हो सकता है।
पारिख के मुताबिक, Broad Market के कुछ हिस्सों के मुकाबले Large Cap का वैल्यूएशन फिलहाल ज्यादा आरामदायक दिखाई दे रहा है। इसलिए केवल कंपनी का आकार देखकर नहीं, बल्कि उसकी कमाई, बैलेंस शीट और वैल्यूएशन देखकर निवेश का फैसला करना चाहिए।
रुपया और ब्याज दरें कैसे डालेंगी असर?
रुपये में कमजोरी से एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों को फायदा हो सकता है। वहीं विदेश से कच्चा माल खरीदने वाली कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।
ब्याज दरों में बदलाव का असर कर्ज की लागत, लोन की मांग, लोगों के खर्च और निवेश पर पड़ सकता है। इसके अलावा दुनिया में जारी तनाव कच्चे तेल की कीमतों, कारोबार और विदेशी निवेशकों के रुख को प्रभावित कर सकता है।
सोना और चांदी में अब क्या करें?
चांदी ने 2025 में करीब 130% रिटर्न दिया और इसकी कीमत ₹2 लाख प्रति किलो के पार पहुंची। वहीं सोने का पांच साल का CAGR 23.2% रहा। इसी दौरान भारतीय शेयर बाजार का CAGR 16.5% और अमेरिकी शेयर बाजार का 19.6% रहा।
पारिख के मुताबिक, सोना निवेश के अलग-अलग विकल्पों में संतुलन बनाने में मदद करता है। पहले से निवेश करने वालों को देखना चाहिए कि उनके पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी कितनी है। नया निवेश करने वाले एक साथ पूरा पैसा लगाने के बजाय धीरे-धीरे निवेश कर सकते हैं।
चांदी में उतार-चढ़ाव ज्यादा हो सकता है। 2011 में चांदी करीब 18 डॉलर से बढ़कर 49 डॉलर प्रति औंस पहुंची थी, लेकिन इसके बाद इसमें 60% से ज्यादा की गिरावट आई थी।
अगले 12–18 महीनों में कहां दिख रहा मौका?
लंबी अवधि के लिए शेयर बाजार अहम बना हुआ है, लेकिन अब चुनिंदा मजबूत कंपनियों पर ध्यान देना जरूरी है। वहीं 10 साल के G-Sec पर करीब 7% यील्ड मिल रही है, जिससे फिक्स्ड इनकम भी निवेशकों के लिए एक विकल्प बन सकता है।
जनवरी 2026 में Gold ETF में ₹24,040 करोड़ का निवेश आया था। कैश रखने से निवेशकों को बाजार में बेहतर मौका मिलने पर पैसा लगाने की सुविधा मिलती है।
मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, घरेलू निवेश और फाइनेंशियल सर्विसेज में अवसर दिख सकते हैं। सितंबर 2025 तक बैंकों का Gross NPA घटकर 2.15% रह गया था। हालांकि, FY27 में बैंकिंग सेक्टर का NIM करीब 2.9% रहने का अनुमान है।
Nifty 50 की अगले 12 महीनों की चाल कंपनियों की कमाई में सुधार पर निर्भर करेगी। अगस्त में Nifty की 50 में से 23 कंपनियों के FY27 EPS अनुमान बढ़ाए गए थे। Parikh का कहना है कि किसी तय Nifty Target के बजाय कंपनियों की कमाई, वैल्यूएशन और वास्तविक प्रदर्शन पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।