Gen Z की कमाई आखिर जा कहां रही है? घर-कार नहीं, अब इन चीजों पर खर्च हो रही कमाई; जानिए वजह
Gen Z के पैसों को लेकर बदलते नजरिए पर निवेश विशेषज्ञ संतोष जोसेफ ने बड़ी बात कही है। क्या युवा सिर्फ खर्च करने में विश्वास रखते हैं या उनकी वित्तीय सोच पहले से ज्यादा समझदार हो रही है? जानिए कैसे बदल रहे हैं निवेश, बचत और पैसे मैनेज करने के तरीके।

In Short
- Gen Z के लिए बदल गए हैं निवेश और पैसे से जुड़े पुराने लक्ष्य
- सोशल मीडिया और FOMO बदल रहे हैं युवाओं के खर्च करने का तरीका
- संतोष जोसेफ बोले ऑटोमेशन से बेहतर बन सकती है वित्तीय आदतें
भारत के Gen Z निवेशक अपनी कमाई को पुराने समय के वित्तीय लक्ष्यों से अलग तरीके से देख रहे हैं। जहां पहले घर खरीदना, कार लेना और रिटायरमेंट की तैयारी को आर्थिक सफलता का आधार माना जाता था, वहीं अब युवा पीढ़ी की प्राथमिकताएं बदल रही हैं।
बिजनेस टुडे के एक शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए जर्मिनेट इन्वेस्टर सर्विसेज के संस्थापक संतोष जोसेफ ने कहा कि आज के युवाओं के लिए “माइलस्टोन बदल गए हैं, उनकी जरूरतें और प्राथमिकताएं पूरी तरह अलग हैं।” उन्होंने बताया कि कई युवा किराये के घर में रहना, लंबे समय तक परिवार के साथ रहना या नौकरी के लिए अलग-अलग शहरों में जाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
अनुभवों और लाइफस्टाइल पर बढ़ रहा खर्च
Gen Z के खर्च करने के तरीके में भी बड़ा बदलाव आया है। यह पीढ़ी सिर्फ चीजें खरीदने के बजाय अनुभवों, प्रीमियम गैजेट्स और लाइफस्टाइल से जुड़े खर्चों पर ज्यादा ध्यान दे रही है।
संतोष जोसेफ के मुताबिक, युवा आज “अनुभव जमा करने और तुरंत संतुष्टि पाने” की कोशिश कर रहे हैं। इसके पीछे सोशल मीडिया और दोस्तों के बीच बने रहने का दबाव भी एक बड़ी वजह है। यही वजह है कि कई बार खर्च के फैसले सिर्फ जरूरत के आधार पर नहीं, बल्कि सामाजिक प्रभाव और FOMO यानी कुछ छूट जाने के डर से भी प्रभावित होते हैं।
सिर्फ बचत की सलाह से नहीं बदलेगी आदत
जोसेफ का कहना है कि Gen Z के लिए सिर्फ कम खर्च करने की सलाह देना काफी नहीं होगा। वित्तीय कंपनियों, वेल्थ मैनेजर्स और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स को इस पीढ़ी की सोच को समझते हुए नए तरीके अपनाने होंगे।
उनके अनुसार, पैसों के मैनेजमेंट को आसान बनाने के लिए ऑटोमेशन जरूरी है। उन्होंने कहा कि युवाओं को पैसे मैनेज करने, खर्चों को नियंत्रित करने और निवेश करने की प्रक्रिया को ऑटोमेट करने में मदद करनी चाहिए।
ऑटोमेशन से बन सकती है बेहतर वित्तीय आदत
Gen Z जहां पहले से ज्यादा टेक्नोलॉजी फ्रेंडली है और कम उम्र में निवेश की शुरुआत कर रही है, वहीं सोशल मीडिया के शोर, जल्दी रिटर्न देने वाले निवेश विकल्पों और नए एसेट क्लास के बीच सही फैसला लेना चुनौती भी है।
ऐसे में ऑटोमेटेड SIP, नियम आधारित बचत और तय निवेश योजनाएं युवाओं को जल्दबाजी में लिए गए फैसलों से बचाने में मदद कर सकती हैं।
Gen Z को सिर्फ खर्चीला मानना सही नहीं
संतोष जोसेफ ने इस धारणा को भी खारिज किया कि पूरी Gen Z लापरवाह खर्च करने वाली पीढ़ी है। उन्होंने कहा कि आज कई Gen Z युवा स्वाभाविक रूप से अच्छे, जिम्मेदार और बेहतर सेवर्स व निवेशक भी हैं।
कुल मिलाकर Gen Z निवेशकों की तस्वीर एक जैसी नहीं है। इस पीढ़ी का एक हिस्सा लाइफस्टाइल खर्चों में ज्यादा उलझ सकता है, जबकि दूसरा हिस्सा कम उम्र में ही निवेश और बचत की अच्छी आदतें बना रहा है। ऐसे में जरूरत है कि उन्हें सलाह के साथ सही टूल्स और ऑटोमेशन की सुविधा दी जाए, न कि सिर्फ आलोचना की जाए।