नो बैंक विजिट, नो पेपरवर्क! AI और डिजिटल टेक्नोलॉजी की मदद से Gen Z बदल रहे हैं होम लोन लेने का तरीका

भारत में होम लोन लेने का तरीका तेजी से बदल रहा है। Millennials और Gen Z डिजिटल माध्यमों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं, जिससे आवेदन और दस्तावेज जमा करने जैसी प्रक्रियाएं आसान हो रही हैं। AI भी पात्रता जांच और लोन विकल्पों में मदद कर सकता है, लेकिन इंसानी निगरानी की जरूरत बनी रहेगी।

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By Gaurav Kumar:

भारत में घर खरीदने के लिए होम लोन लेना लंबे समय तक कागजी कार्रवाई, बैंक ब्रांच के चक्कर, लेंडर्स से कई बार बातचीत और लंबे इंतजार से जुड़ा रहा है। अब टेक्नोलॉजी इस पूरी प्रक्रिया को बदल रही है। लोन की जानकारी खोजने से लेकर दस्तावेज जमा करने, पात्रता जांचने और आवेदन की स्थिति देखने तक कई काम डिजिटल हो रहे हैं।

नए दौर का होमबायर है डिजिटल

बेसिक होम लोन के सीईओ और को-फाउंडर अतुल मोंगा के मुताबिक, होमबायर की प्रोफाइल भी तेजी से बदल रही है। इस साल जारी एक कंज्यूमर इनसाइट्स स्टडी में 7,400 से ज्यादा होमबायर्स के जवाब शामिल थे। इसमें सामने आया कि Millennials और Gen Z मिलकर करीब 90 से 95% घरों की खरीदारी करते हैं।

स्टडी के अनुसार, 40 साल से कम उम्र के 72% लेनदार होम लोन के लिए ऑनलाइन आवेदन करना पसंद करते हैं। वहीं, 35 साल से कम उम्र के करीब 80% लेनदार DigiLocker का इस्तेमाल करते हैं। इससे साफ है कि आज का होमबायर टेक्नोलॉजी को अपनाने वाला है और होम लोन प्रक्रिया में भी तेज, आसान और पारदर्शी अनुभव चाहता है।

AI के साथ जरूरी रहेगा इंसानी फैसला

टेक्नोलॉजी का अगला कदम सिर्फ कागजी काम को ऑनलाइन करना नहीं है। AI और डेटा की मदद से लेंडर्स पात्रता जांचने, दस्तावेजों को सत्यापित करने, जोखिम पहचानने और सही लोन विकल्प से ग्राहक को जोड़ने में सक्षम हो सकते हैं। इससे उन लोगों के लिए भी लोन प्रक्रिया आसान हो सकती है, जिनकी वित्तीय प्रोफाइल पारंपरिक सिस्टम में पूरी तरह फिट नहीं बैठती।

हालांकि, एक्सपर्ट का मानना है कि हाउसिंग फाइनेंस में भरोसा बेहद जरूरी है। AI सटीक और समझाने योग्य हो सकता है, लेकिन ग्राहक को यह पता होना चाहिए कि उसे कोई खास विकल्प क्यों सुझाया गया है। इसलिए ऑटोमेटेड फैसलों के पीछे इंसानी निगरानी जरूरी रहेगी।

छोटे शहरों तक बढ़ सकती है पहुंच

टेक्नोलॉजी की मदद से छोटे शहरों और विकासशील बाजारों में औपचारिक हाउसिंग फाइनेंस की पहुंच बढ़ सकती है। डिजिटल माध्यम से ग्राहक जानकारी हासिल कर सकेंगे, विकल्पों की तुलना कर सकेंगे और शाखा गए बिना होम लोन की प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे।

असल बदलाव सिर्फ लोन को तेज बनाने का नहीं है। लक्ष्य पूरी प्रक्रिया को आसान, साफ और ज्यादा लोगों की पहुंच में लाना है। यही टेक्नोलॉजी भारत में ज्यादा लोगों के लिए घर खरीदने का रास्ता आसान बना सकती है।

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