G-Sec vs Corporate Bond: पहली बार बॉन्ड में निवेश कर रहे हैं? निवेश से पहले जान लें ये बातें

बॉन्ड में निवेश करने वाले लोगों के सामने अक्सर G-Sec और Corporate Bonds में चुनाव की उलझन रहती है। ज्यादा Yield आकर्षक जरूर लगती है, लेकिन इसके साथ जोखिम भी बढ़ सकता है। Quantum AMC की फंड मैनेजर स्नेहा पांडे ने बताया कि निवेशकों को सिर्फ रिटर्न नहीं, बल्कि बॉन्ड से जुड़े जोखिम भी समझने चाहिए।

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By Gaurav Kumar:

बॉन्ड में पहली बार निवेश करने वाले लोगों को Government Securities (G-Secs) और Corporate Debt के बीच चुनाव करते समय सबसे पहले यह देखना चाहिए कि ज्यादा रिटर्न के बदले वे कितना जोखिम उठा रहे हैं।

बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए क्वांटम एएमसी की फंड मैनेजर स्नेहा पांडे ने बताया कि Corporate Bonds ज्यादा Yield का आकर्षण दिखा सकते हैं, लेकिन अतिरिक्त रिटर्न के पीछे ऐसा जोखिम छिपा हो सकता है जिसे रिटेल निवेशक पूरी तरह नहीं समझते।

यह सलाह ऐसे समय में अहम है, जब निवेशक Fixed Deposits से आगे बढ़कर बेहतर Post-Tax Returns और पोर्टफोलियो में स्थिरता के लिए Debt Products तलाश रहे हैं।

G-Sec को क्यों माना गया सुरक्षित ऑप्शन?

एक्सपर्ट ने कहा कि G-Secs और Treasury Bills जैसे Government Securities डेट पोर्टफोलियो का आधार बन सकते हैं। इन पर भारत सरकार की गारंटी होती है, इसलिए इनमें Sovereign Credit Risk बेहद कम होता है। पहली बार Fixed Income में कदम रखने वाले निवेशकों के लिए यह कम जटिल विकल्प हो सकता है।

इसके मुकाबले Corporate Bonds में Credit Risk जुड़ा होता है। यानी कंपनी की वित्तीय स्थिति कमजोर पड़ने पर ब्याज या मूलधन के भुगतान पर दबाव आ सकता है। ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव के दौर में ज्यादा रिटर्न के लिए अतिरिक्त जोखिम लेना निवेशकों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है।

ज्यादा Yield दिखे तो सवाल पूछें

एक्सपर्ट की सबसे अहम चेतावनी है कि ज्यादा रिटर्न कभी भी मुफ्त में नहीं मिलता। अगर कोई बॉन्ड समान अवधि वाले G-Sec या AAA-रेटेड PSU Bond से काफी ज्यादा Yield दे रहा है, तो बाजार उसमें अतिरिक्त जोखिम की कीमत लगा रहा हो सकता है।

इसलिए सिर्फ Yield देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। निवेशकों को Issuer की गुणवत्ता, Bond की Liquidity, Portfolio में Concentration और वास्तविक Diversification को भी देखना चाहिए।

सिर्फ Credit Rating पर निर्भर न रहें

एक्सपर्ट ने Credit Rating को अकेला आधार बनाने से भी बचने की सलाह दी। एक्सपर्ट ने कहा कि निवेशक को यह समझना चाहिए कि Issuer कौन है, पोर्टफोलियो कितना Concentrated है और उसमें वास्तविक Diversification है या नहीं।

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