EPFO ने बदले PF से जुड़े कई नियम, Withdrawal और Claim को लेकर अब क्या होगा जानिए पूरी बात
ईपीएफओ ने 2026 में पीएफ से जुड़े नियमों में कई अहम बदलाव किए हैं। विदड्रॉल के लिए सर्विस रिक्वायरमेंट, नौकरी छोड़ने के बाद वेटिंग पीरियड, डिजिटल नॉमिनेशन और क्लेम सेटलमेंट की टाइमलाइन में बदलाव हुआ है। जानिए एम्प्लॉयी और एम्प्लॉयर कंट्रीब्यूशन से लेकर पीएफ विदड्रॉल और क्लेम डिले पर पेनल इंटरेस्ट तक नए रूल्स क्या हैं।

In Short
- पीएफ विदड्रॉल के लिए अब आम तौर पर 12 महीने की सर्विस जरूरी होगी।
- फुल पीएफ विदड्रॉल के लिए अनएम्प्लॉयमेंट पीरियड बढ़ाकर 12 महीने किया गया है।
- क्लेम सेटलमेंट में देरी पर 12% पेनल इंटरेस्ट का प्रावधान किया गया है।
EPFO withdrawal rules: ईपीएफओ ने ईपीएफ, ईपीएस और ईडीएलआई स्कीम्स, 2026 के तहत पीएफ से जुड़े नियमों में कई अहम बदलाव किए हैं। नए नियमों का मकसद पीएफ के कामकाज को आसान बनाना, प्रोसेस को ज्यादा डिजिटल करना और क्लेम सेटलमेंट में तेजी लाना है। इन बदलावों का सीधा असर ईपीएफ सब्सक्राइबर्स पर पड़ेगा। आइए जानते हैं नए नियमों में क्या बदला है।
कंट्रीब्यूशन के नियमों में बड़ा बदलाव नहीं
पीएफ में एम्प्लॉयी का स्टैच्यूटरी कंट्रीब्यूशन बेसिक सैलरी का 12% ही रहेगा, जबकि एम्प्लॉयर भी इतना ही कंट्रीब्यूशन करेगा। ईपीएफ कंट्रीब्यूशन पर ₹15,000 प्रति महीने की वेज सीलिंग लागू रहेगी, यानी इस सीमा तक अधिकतम स्टैच्यूटरी कंट्रीब्यूशन ₹1,800 होगा। इससे ज्यादा सैलरी पर कंट्रीब्यूशन करना पहले की तरह वॉलंटरी रहेगा। वेज सीलिंग को अब सरकार की नोटिफिकेशन से बदला जा सकेगा।
विड्रॉल के रूल्स अब तीन हिस्सों में
पहले पीएफ से पार्शियल विड्रॉल के लिए कई अलग-अलग कैटेगरी और कंडीशंस थीं। नए रूल्स में इन्हें तीन बड़े हिस्सों में बांट दिया गया है—एसेंशियल नीड्स, हाउसिंग और स्पेशल सरकमस्टांसेज।
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इससे मेंबर्स के लिए यह समझना आसान होगा कि किस जरूरत के लिए पीएफ से पैसा निकाला जा सकता है और क्या कंडीशंस लागू होंगी।
पीएफ अकाउंट में 25% बैलेंस रखना जरूरी
नए फ्रेमवर्क में सब्सक्राइबर के पीएफ अकाउंट को दो हिस्सों में देखा जाएगा। अकाउंट में मौजूद कुल बैलेंस का 25% मिनिमम बैलेंस के तौर पर रखना होगा, जबकि 75% रकम एलिजिबल पार्शियल विड्रॉल के लिए इस्तेमाल की जा सकेगी। हालांकि इसके लिए स्कीम में तय कंडीशंस पूरी करना जरूरी होगा।
विड्रॉल के लिए 12 महीने की सर्विस जरूरी
नए रूल्स में विड्रॉल के लिए सर्विस की रिक्वायरमेंट को एक जैसा किया गया है। अब एलिजिबल कैटेगरी में आमतौर पर कम से कम 12 महीने की सर्विस पूरी करनी होगी। मेडिकल विड्रॉल के लिए भी मिनिमम 12 महीने की सर्विस जरूरी होगी। यानी अलग-अलग जरूरतों के लिए अलग वेटिंग पीरियड की उलझन कम होगी।
नौकरी छोड़ने के बाद फुल विड्रॉल में बदलाव
पहले नौकरी छूटने के बाद दो महीने तक अनएम्प्लॉयड रहने पर पूरा पीएफ बैलेंस निकाला जा सकता था। अब फुल विड्रॉल के लिए 12 महीने की अनएम्प्लॉयमेंट जरूरी होगी। पार्शियल विड्रॉल की सुविधा जारी रहेगी, लेकिन इसके लिए वेटिंग पीरियड बढ़ाकर 36 महीने कर दिया गया है।
नॉमिनेशन का प्रोसेस अब ऑनलाइन
नए स्कीम में फिजिकल नॉमिनेशन फॉर्म्स को हटा दिया गया है और ऑनलाइन नॉमिनेशन को औपचारिक तौर पर मान्यता दी गई है। इससे मेंबर्स और एम्प्लॉयर्स को पेपरवर्क से राहत मिलेगी और नॉमिनेशन से जुड़े काम को ज्यादा तेजी से पूरा किया जा सकेगा।
पीएफ क्लेम सेटलमेंट की डेडलाइन 20 दिन
नए रूल्स में पीएफ क्लेम्स के सेटलमेंट की टाइमलाइन घटाकर 20 दिन कर दी गई है। अगर बिना वैलिड रीजन के क्लेम में देरी होती है, तो ईपीएफओ को 12% पेनल इंटरेस्ट देना होगा। यह रकम संबंधित रीजनल पीएफ कमिश्नर की सैलरी से वसूली जा सकेगी। इससे क्लेम प्रोसेस में जवाबदेही बढ़ेगी और मेंबर्स के क्लेम्स को समय पर निपटाने पर जोर रहेगा।