करोड़ों पीएफ खाताधारकों के लिए बड़ी खबर! PF के पैसों से जुड़े मामले पर कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला
ईपीएफओ (EPFO) किसी रिटायर्ड कर्मचारी से उसे मिला हुआ पीएफ का पैसा वापस नहीं मांग सकता। अदालत ने कहा कि ईपीएफ कानून कर्मचारियों के फायदों की रक्षा के लिए बनाया गया है इसलिए कंपनी की गलती का बोझ कर्मचारियों पर नहीं डाला जा सकता।

रिटायर हो चुके कर्मचारियों के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट से बड़ी राहत की खबर आई है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर किसी कंपनी या उसके पीएफ (PF) ट्रस्ट से नियमों को मानने में कोई गलती हुई है तो उसका जिम्मेदार कर्मचारी नहीं होगा।
ऐसे में ईपीएफओ (EPFO) किसी रिटायर्ड कर्मचारी से उसे मिला हुआ पीएफ का पैसा वापस नहीं मांग सकता। अदालत ने कहा कि ईपीएफ कानून कर्मचारियों के फायदों की रक्षा के लिए बनाया गया है इसलिए कंपनी की गलती का बोझ कर्मचारियों पर नहीं डाला जा सकता।
कर्मचारी को बड़ी राहत, पैसा वापस मांगने का नोटिस रद्द
तेलंगाना हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि ईपीएफओ (EPFO) किसी रिटायर्ड कर्मचारी से पीएफ का पैसा वापस नहीं मांग सकता भले ही कंपनी या उसके पीएफ ट्रस्ट ने नियमों का पालन करने में गलती की हो। कोर्ट ने साफ किया कि पीएफ कानून के तहत नियमों को मानने की जिम्मेदारी कंपनी और उसके ट्रस्ट की होती है न कि कर्मचारी की।
जज नागेश भीमापका ने रिटायर हो चुके कर्मचारी जेवी नृपेंद्र राव को भेजे गए ईपीएफओ के वसूली नोटिस को रद्द कर दिया। इस नोटिस में राव को ढाई करोड़ रुपये 12 परसेंट सालाना ब्याज के साथ लौटाने के लिए कहा गया था।
क्या था पूरा मामला?
जेवी नृपेंद्र राव साल 2023 में रिटायर हुए थे। उन्हें अपनी कंपनी के पीएफ ट्रस्ट के जरिए पीएफ का पैसा मिलना था। 21 जुलाई 2023 को उन्हें कुछ हिस्से के भुगतान के रूप में ढाई करोड़ रुपये मिले थे जबकि करीब 70 लाख रुपये का भुगतान बाकी था।
यह बाकी पैसा इसलिए अटका हुआ था क्योंकि ट्रस्ट ने यस बैंक के बॉन्ड में पैसे लगाए थे जो बाद में फ्रीज हो गए थे। इसी दौरान कंपनी ने 1 मार्च 2023 से अपने पीएफ ट्रस्ट का पुराना दर्जा भी छोड़ दिया था।
ईपीएफओ (EPFO) का क्या कहना था?
ईपीएफओ का कहना था कि जब कंपनी ने अपने ट्रस्ट का दर्जा छोड़ दिया था तब उसे सभी सदस्यों के जमा पैसे ईपीएफओ को ट्रांसफर करने चाहिए थे। लेकिन ऐसा करने के बजाय कंपनी ने सीधे राव को ढाई करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया जो नियमों के खिलाफ था।
इसी वजह से ईपीएफओ ने 17 फरवरी 2025 को राव को नोटिस जारी कर सात दिन के भीतर पूरा पैसा ब्याज समेत लौटाने को कहा था।
कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
हाईकोर्ट ने कहा कि पीएफ कानून में ऐसा कोई नियम नहीं है जो केवल कंपनी की गलती के कारण कर्मचारी से पैसा वसूलने की इजाजत देता हो। कोर्ट ने यह भी देखा कि राव पर धोखाधड़ी करने या गलत जानकारी देने का कोई आरोप नहीं था।
अदालत ने कहा कि अगर किसी नियम का उल्लंघन हुआ भी है तो कार्रवाई कंपनी और उसके पीएफ ट्रस्ट के खिलाफ होनी चाहिए न कि उस कर्मचारी के खिलाफ जिसने अपना हक का पीएफ पैसा पाया है।
भविष्य की कार्रवाई का रास्ता खुला
हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर किसी खास कानूनी नियम के तहत भविष्य में कोई जिम्मेदारी बनती है तो ईपीएफओ नया नोटिस जारी कर सकता है। लेकिन इसके लिए कर्मचारी को पहले अपनी बात रखने का मौका देना होगा और यह भी साफ बताना होगा कि नोटिस किस कानूनी आधार पर जारी किया जा रहा है।
इस फैसले से साफ हो गया है कि PF से जुड़े नियमों का पालन करना कंपनी और उसके ट्रस्ट की जिम्मेदारी है। वहीं, कर्मचारियों को मिलने वाले उनके वैध PF पैसे को कानून का संरक्षण मिलता है और कंपनी की गलती का नुकसान उन पर नहीं डाला जा सकता।