सैलरी आते ही खाली हो जाता है अकाउंट? 80-20 बजट रूल अपनाकर बिना कंजूसी ऐसे बढ़ाएं अपनी सेविंग

सैलरी आने के कुछ दिनों बाद ही अकाउंट खाली होने लगे तो सेविंग मुश्किल लग सकती है। 80-20 बजट रूल में सिर्फ एक आसान फॉर्मूला अपनाना होता है, जिससे खर्च भी चलते रहते हैं और भविष्य के लिए पैसा भी बचाया जा सकता है।

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In Short

  • सैलरी का 20% हिस्सा सेविंग और इन्वेस्टमेंट के लिए अलग करें।
  • बाकी 80% रकम से जरूरत और शौक से जुड़े खर्च मैनेज करें।
  • 20% बचाना मुश्किल हो तो 10% से शुरुआत कर धीरे-धीरे सेविंग बढ़ाएं।

By Gaurav Kumar:

महीने की शुरुआत में सैलरी आते ही कई लोग खर्चों की प्लानिंग शुरू कर देते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में बैंक अकाउंट का बैलेंस कम होने लगता है। ऐसे में सेविंग करना मुश्किल लग सकता है। हर छोटे खर्च का हिसाब रखने या अपनी इच्छाओं को रोकने के बजाय एक आसान बजटिंग तरीका अपनाया जा सकता है। 80-20 बजट रूल में इनकम को सिर्फ दो हिस्सों में बांटना होता है, जिससे सेविंग और रोजमर्रा के खर्च दोनों को मैनेज किया जा सकता है। आइए समझते हैं कि यह रूल कैसे काम करता है और इसे अपनी जिंदगी में कैसे लागू किया जा सकता है।

क्या है 80-20 बजट रूल?

80-20 बजट रूल में अपनी कुल इन-हैंड सैलरी को दो हिस्सों में बांटना होता है। सैलरी का 20% हिस्सा भविष्य के लिए रखा जाता है, यानी इस रकम का इस्तेमाल सेविंग और इन्वेस्टमेंट में किया जाता है। बाकी 80% रकम आज के खर्चों के लिए होती है। इसमें आपकी जरूरतों के साथ-साथ आपके शौक पर होने वाला खर्च भी शामिल है।

दूसरे बजट रूल से कैसे है आसान?

इस रूल में आपको हर खर्च को अलग-अलग कैटेगरी में बांटने की जरूरत नहीं होती। 50-30-20 रूल की तरह यह तय नहीं करना पड़ता कि कौन सा खर्च जरूरत है और कौन सा शौक। आपको केवल अपनी इनकम का 20% हिस्सा सेविंग के लिए अलग करना है। इसके बाद बाकी 80% रकम को अपनी जरूरत के हिसाब से खर्च किया जा सकता है।

सैलरी मिलते ही सबसे पहले करें यह काम

जैसे ही आपके अकाउंट में सैलरी क्रेडिट हो, उसका 20% हिस्सा तुरंत किसी दूसरे सेविंग अकाउंट या इन्वेस्टमेंट में ट्रांसफर कर दें। इसके लिए एसआईपी, आरडी या पीपीएफ जैसे ऑप्शन इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इस सेविंग को महीने के आखिर तक टालने के बजाय शुरुआत में ही अलग करना जरूरी है।

कर्ज है तो 20% रकम का ऐसे करें इस्तेमाल

अगर आपके ऊपर कोई पुराना लोन या क्रेडिट कार्ड का भारी कर्ज है, तो 20% की सेविंग का इस्तेमाल उसे तेजी से चुकाने में भी किया जा सकता है। हालांकि इसमें होम लोन शामिल नहीं है। इस तरह सेविंग के लिए तय रकम पुराने कर्ज को कम करने में मदद कर सकती है।

बाकी 80% रकम में मैनेज करें पूरे महीने के खर्च

20% रकम अलग करने के बाद बची हुई 80% रकम से घर का किराया, राशन, बिजली का बिल, बाहर खाना, फिल्म देखना और शॉपिंग जैसे खर्च मैनेज किए जा सकते हैं। अगर आपके सभी खर्च इसी 80% की लिमिट में हैं, तो अपनी पसंद की चीजों पर पैसा खर्च करने को लेकर गिल्ट महसूस करने की जरूरत नहीं है।

20% सेविंग मुश्किल है तो 10% से करें शुरुआत

अगर आपकी सैलरी कम है और शुरुआत में 20% रकम बचाना मुश्किल हो रहा है, तो 10% से शुरुआत की जा सकती है। सबसे जरूरी है नियमित सेविंग की आदत बनाना। जैसे-जैसे आपकी इनकम बढ़े, सेविंग का हिस्सा भी धीरे-धीरे बढ़ाकर 20% तक ले जाया जा सकता है।

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