सोना खरीदने का बदल रहा तरीका! डिजिटल गोल्ड की खरीदारी में 83% का उछाल, आखिर क्यों बढ़ रहा क्रेज
भारत में सोना खरीदने का ट्रेंड तेजी से बदल रहा है। महंगी कीमतों के बावजूद डिजिटल गोल्ड की खरीदारी में जबरदस्त उछाल आया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ताजा रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। आखिर लोग डिजिटल गोल्ड की तरफ क्यों बढ़ रहे हैं और इसमें निवेश कितना समझदारी भरा है? जानिए पूरी डिटेल।

In Short
- सितंबर 2026 में डिजिटल गोल्ड की खरीदारी 83% बढ़कर ₹2,590 करोड़ पहुंच गई।
- साल 2026 में अब तक 16.3 टन डिजिटल गोल्ड खरीदा गया, पिछले साल से 76% ज्यादा।
- डिजिटल गोल्ड खरीदना आसान, लेकिन Gold ETF के मुकाबले रेगुलेशन और सुरक्षा से जुड़े जोखिम अलग हैं।
भारत में सोना खरीदने का तरीका तेजी से बदल रहा है। अब लोग ज्वेलरी, सिक्के और गोल्ड बार के अलावा डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भी सोना खरीद रहे हैं। सोने की ऊंची कीमतों के बावजूद डिजिटल गोल्ड की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट में डिजिटल गोल्ड की खरीदारी को लेकर दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं।
डिजिटल गोल्ड की खरीदारी में 83% की तेजी
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की अक्टूबर 2026 इंडिया गोल्ड मार्केट अपडेट के मुताबिक, सितंबर में भारत में डिजिटल गोल्ड की खरीदारी 2,590 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। यह पिछले साल सितंबर के मुकाबले 83% ज्यादा है। वहीं, अगस्त 2026 की तुलना में इसमें 4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
सितंबर में करीब 1.7 टन डिजिटल गोल्ड खरीदा गया। यह जनवरी 2025 से अब तक के लंबी अवधि के मासिक औसत से 18% ज्यादा है।
साल 2026 में अब तक डिजिटल गोल्ड की कुल खरीदारी 16.3 टन रही है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 9.2 टन था। यानी खरीदारी में 76% की बढ़ोतरी हुई है।
आखिर क्यों बढ़ रहा डिजिटल गोल्ड का क्रेज?
डिजिटल गोल्ड की लोकप्रियता बढ़ने की सबसे बड़ी वजह इसकी आसान खरीदारी है। इसके लिए ज्वेलरी शॉप जाने या एक साथ बड़ी रकम खर्च करने की जरूरत नहीं होती।
लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए छोटी रकम से भी सोना खरीद सकते हैं। इससे उन लोगों को फायदा होता है, जो धीरे-धीरे अपनी गोल्ड होल्डिंग बढ़ाना चाहते हैं।
हालांकि, WGC की रिपोर्ट में उम्र के आधार पर खरीदारों का आंकड़ा नहीं दिया गया है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि डिजिटल गोल्ड की बढ़ती मांग में युवाओं की कितनी हिस्सेदारी है।
Digital Gold, Gold ETF और फिजिकल गोल्ड में क्या अंतर है?
डिजिटल गोल्ड में ग्राहक ऑनलाइन सोना खरीदते हैं, जिसे आमतौर पर सर्विस प्रोवाइडर या कस्टोडियन सुरक्षित रखता है। इसमें स्टोरेज, रिडेम्पशन और दूसरे चार्ज की जानकारी लेना जरूरी है।
वहीं, गोल्ड ETF शेयर बाजार में खरीदे और बेचे जाते हैं। इसके लिए डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट की जरूरत होती है। ये रेगुलेटेड निवेश प्रोडक्ट हैं।
फिजिकल गोल्ड में ज्वेलरी, सिक्के और गोल्ड बार शामिल हैं। इसमें सोना सीधे आपके पास रहता है, लेकिन मेकिंग चार्ज, स्टोरेज और खरीद-बिक्री की कीमतों में अंतर जैसी बातें ध्यान देने वाली हैं।
डिजिटल गोल्ड खरीदने से पहले क्या ध्यान रखें?
डिजिटल गोल्ड खरीदना आसान जरूर है, लेकिन यह हर निवेशक के लिए सबसे बेहतर विकल्प हो, ऐसा जरूरी नहीं है।
गोल्ड ETF के मुकाबले डिजिटल गोल्ड पर वैसा स्थापित सिक्योरिटीज मार्केट रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लागू नहीं होता। इसलिए निवेशकों को प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता, सोने की सुरक्षा, खरीद-बिक्री के अंतर और रिडेम्पशन की शर्तें जांचनी चाहिए।
डिजिटल गोल्ड की बढ़ती खरीदारी दिखाती है कि भारतीयों की सोना खरीदने की आदतों में बदलाव आ रहा है। हालांकि, यह बदलाव कितना टिकाऊ होगा, यह कीमतों, भरोसे, लागत और रेगुलेशन पर निर्भर करेगा।