मृत्यु रजिस्ट्रेशन में देरी पर अब नहीं चलेगी मनमानी, 1 अक्टूबर से लागू होंगे नए नियम
डेथ सर्टिफिकेट एक जरूरी कानूनी दस्तावेज है, जिसकी जरूरत कई वित्तीय और कानूनी कामों में पड़ती है। 1 अक्टूबर 2026 से मृत्यु के देरी से रजिस्ट्रेशन के नियम सख्त होने जा रहे हैं। नए नियमों के तहत ज्यादा देरी पर मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत होगी।

In Short
- 1 अक्टूबर 2026 से डेथ सर्टिफिकेट में देरी से रजिस्ट्रेशन के नियम होंगे सख्त, ज्यादा देरी पर मजिस्ट्रेट के आदेश की जरूरत होगी।
- डेथ सर्टिफिकेट से बीमा, प्रोविडेंट फंड, म्यूचुअल फंड, शेयर और संपत्ति से जुड़े काम पूरे करने में मदद मिलती है।
- मृत्यु का रजिस्ट्रेशन नगर निगम, नगरपालिका, पंचायत या संबंधित स्थानीय अथॉरिटी के पास कराया जाता है।
डेथ सर्टिफिकेट यानी मृत्यु प्रमाण पत्र एक जरूरी कानूनी दस्तावेज है, जो किसी व्यक्ति की मृत्यु को आधिकारिक रूप से दर्ज करता है। परिवार को कई वित्तीय और कानूनी काम पूरे करने के लिए इसकी जरूरत पड़ती है।
इस दस्तावेज के बिना जीवन बीमा, प्रोविडेंट फंड और म्यूचुअल फंड से जुड़े दावों को निपटाने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा डिमैट अकाउंट और शेयर होल्डिंग ट्रांसफर करने, संपत्ति और विरासत से जुड़े मामलों को संभालने और मृत व्यक्ति के इनकम टैक्स से जुड़े काम पूरे करने में भी डेथ सर्टिफिकेट जरूरी होता है।
जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन Registration of Births and Deaths Act, 1969 के तहत अनिवार्य है।
कहां कराया जाता है मृत्यु का रजिस्ट्रेशन?
मृत्यु का रजिस्ट्रेशन उस स्थानीय क्षेत्र की अथॉरिटी के पास कराया जाता है, जहां व्यक्ति की मृत्यु हुई है। यह अथॉरिटी नगर निगम, नगरपालिका, पंचायत या कोई अन्य निर्धारित रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी हो सकती है।
कई राज्यों और स्थानीय निकायों की ओर से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है। इसके लिए सरकारी या नगर निकायों के पोर्टल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु अस्पताल में होती है, तो अस्पताल आमतौर पर मृत्यु के कारण का मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करता है और तय प्रक्रिया के अनुसार इसकी जानकारी दर्ज कराता है।
डेथ सर्टिफिकेट के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए?
डेथ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए जरूरी दस्तावेज राज्य और स्थानीय निकाय के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं। हालांकि, आमतौर पर आवेदन के साथ अस्पताल या डॉक्टर की ओर से जारी मेडिकल सर्टिफिकेट या मृत्यु के कारण का प्रमाण पत्र देना होता है।
इसके अलावा मृत व्यक्ति का नाम, जन्म की तारीख और जगह, मृत्यु की जानकारी देने वाले व्यक्ति का विवरण, अस्पताल से जुड़े दस्तावेज और तय आवेदन फॉर्म के साथ जरूरी कागजात जमा करने पड़ सकते हैं।
आवेदन करने से पहले संबंधित नगर निकाय या स्थानीय अथॉरिटी से जरूरी दस्तावेजों की जानकारी लेना जरूरी है।
1 अक्टूबर 2026 से बदलेंगे देरी से रजिस्ट्रेशन के नियम
मृत्यु के रजिस्ट्रेशन में देरी होने पर 1 अक्टूबर 2026 से नियम और सख्त हो जाएंगे। Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2026 के तहत देरी से जानकारी देने की प्रक्रिया को कड़ा किया गया है।
अगर मृत्यु की जानकारी एक साल से ज्यादा लेकिन दो साल के अंदर दी जाती है, तो रजिस्ट्रेशन के लिए जिला मजिस्ट्रेट, सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट की ओर से अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा।
वहीं, अगर मृत्यु के रजिस्ट्रेशन में दो साल से ज्यादा की देरी होती है, तो इसके लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी के आदेश की जरूरत होगी।
नए नियमों के तहत अधिकारियों को देरी से किए गए रजिस्ट्रेशन से पहले घटना की सही जानकारी और उसकी प्रमाणिकता की जांच भी करनी होगी। इसका उद्देश्य जन्म और मृत्यु की जानकारी समय पर दर्ज कराने को बढ़ावा देना है।