बैंक लॉकर से गायब हुआ सामान, जानिए कितना मिलेगा मुआवजा और क्या कहता है RBI का नियम
कानपुर में बैंक लॉकर से करीब 50 लाख रुपये की ज्वेलरी गायब होने के दावे ने लॉकर की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर लॉकर से कीमती सामान गायब हो जाए तो बैंक कितना जिम्मेदार होगा और ग्राहक को कितना मुआवजा मिल सकता है। जानें क्या कहते हैं RBI के नियम।

In Short
- कानपुर में महिला ने बैंक लॉकर से करीब 50 लाख रुपये की ज्वेलरी और कीमती सामान गायब होने का दावा किया।
- बैंक की लापरवाही साबित होने पर देनदारी सालाना लॉकर किराए के 100 गुना तक सीमित हो सकती है।
- लॉकर में रखे सामान की कीमत साबित करने के लिए बिल तस्वीरें वैल्यूएशन सर्टिफिकेट और इंश्योरेंस दस्तावेज जरूरी हो सकते हैं।
RBI Locker Rules: बैंक लॉकर में ज्वेलरी रखना आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है लेकिन कानपुर में सामने आए एक मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक महिला का दावा है कि उसके बैंक लॉकर से करीब 50 लाख रुपये की ज्वेलरी और अन्य कीमती सामान गायब हो गया। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इस मामले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर बैंक लॉकर से सामान गायब हो जाए तो बैंक की जिम्मेदारी कितनी होती है और ग्राहक को कितना मुआवजा मिल सकता है।
कानपुर में क्या हुआ?
महिला ने साल 2003 में तत्कालीन स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर की स्वरूप नगर शाखा में लॉकर लिया था। बाद में यह बैंक 2017 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में शामिल हो गया।
पति की मौत के बाद महिला लखनऊ चली गई और लंबे समय तक शाखा नहीं गई। हालांकि लॉकर का किराया उसके खाते से कटता रहा। जब वह बाद में बैंक पहुंची और लॉकर खोला तो उसके मुताबिक लॉकर खाली था।
पुलिस ने ब्रांच मैनेजर और अन्य बैंक कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। लॉकर एक्सेस रिकॉर्ड सीसीटीवी फुटेज और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
बैंक की जिम्मेदारी क्या है?
RBI के नियमों के मुताबिक बैंकों को लॉकर की सुरक्षा के लिए उचित इंतजाम करने होते हैं। बैंक को लॉकर ऑपरेशन की तारीख और समय का रिकॉर्ड रखना होता है। ग्राहक को लॉकर ऑपरेशन की जानकारी एसएमएस या ईमेल के जरिए भी भेजनी होती है।
अगर चोरी सेंधमारी लूट या बैंक कर्मचारी की धोखाधड़ी में बैंक की लापरवाही साबित होती है तो बैंक की जिम्मेदारी तय हो सकती है।
पूरा नुकसान मिलना जरूरी नहीं
यहां एक अहम बात समझना जरूरी है। बैंक लॉकर के अंदर रखी चीजों की लिस्ट नहीं बनाता। अगर कोई कीमती सामान गायब होता है तो ग्राहक को यह साबित करना पड़ सकता है कि लॉकर में क्या रखा था और उसकी कीमत कितनी थी।
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RBI के नियमों के मुताबिक बैंक की जिम्मेदारी सालाना लॉकर किराए के 100 गुना तक सीमित हो सकती है। उदाहरण के लिए अगर लॉकर का सालाना किराया 3,000 रुपये है तो बैंक की देनदारी 3 लाख रुपये तक हो सकती है भले ही गायब सामान की कीमत इससे कहीं ज्यादा हो।
सबूत रखना क्यों जरूरी?
ज्वेलरी की खरीद की रसीद तस्वीरें वैल्यूएशन सर्टिफिकेट और इंश्योरेंस डॉक्यूमेंट ऐसे मामलों में अहम साबित हो सकते हैं। खासकर तब जब मामला बैंक पुलिस कंज्यूमर फोरम या कोर्ट तक पहुंचे।
लंबे समय तक लॉकर न छोड़ें
RBI नियमों के तहत अगर कोई लॉकर सात साल तक इस्तेमाल नहीं होता और ग्राहक से संपर्क नहीं हो पाता तो बैंक तय प्रक्रिया के बाद उसे तोड़ने की कार्रवाई कर सकता है।
कानपुर मामले की जांच अभी जारी है। यह जांच तय करेगी कि लॉकर किसने एक्सेस किया और बैंक की ओर से किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं। फिलहाल यह मामला एक बात साफ करता है कि बैंक लॉकर सुरक्षा देता है लेकिन अंदर रखे सामान की पूरी कीमत की गारंटी नहीं देता।