AI और डेटा सेंटर से बदल रहा रियल एस्टेट सेक्टर! क्या REITs में निवेश से मिलेगा फायदा?

AI और डेटा सेंटर की बढ़ती मांग से रियल एस्टेट सेक्टर में बड़ा बदलाव आ रहा है। अब कंपनियां सिर्फ ऑफिस नहीं, बल्कि नई तकनीक से लैस बड़े कैंपस बना रही हैं। ऐसे में क्या आम निवेशक REITs के जरिए इस ग्रोथ का फायदा उठा सकते हैं? जानिए एक्सपर्ट की राय।

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In Short

  • AI और डेटा सेंटर की बढ़ती मांग से भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर में बड़ा बदलाव आ रहा है।
  • डेटा सेंटर में भारी निवेश की जरूरत, निवेशकों को ROI और कैश फ्लो पर ध्यान देने की सलाह।
  • GCCs, बैंकों और MNCs की बढ़ती मांग से REITs को फायदा, AI से लैस ऑफिस स्पेस की लीजिंग भी बढ़ी।

By Sonam:

भारत में रियल एस्टेट सेक्टर तेजी से बदल रहा है। अब यह सिर्फ ऑफिस और कमर्शियल बिल्डिंग तक सीमित नहीं रह गया है। रियल एस्टेट कंपनियां डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और नई तकनीकों वाले बड़े कैंपस तैयार करने पर ध्यान दे रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जो निवेशक खुद डेटा सेंटर या AI इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बना सकते, क्या वे इस सेक्टर की ग्रोथ का फायदा अपने पोर्टफोलियो में उठा सकते हैं?

बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Talk The Walk LLP की मैनेजिंग पार्टनर संचिता मुखर्जी ने कहा कि भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में डेटा सेंटर कमर्शियल रियल एस्टेट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनते जा रहे हैं। उनके मुताबिक, डेटा सेंटर की बढ़ती मांग से कमर्शियल प्रॉपर्टी की वैल्यूएशन को भी फायदा मिल रहा है।

डेटा सेंटर बनाने में आता है भारी खर्च

संचिता मुखर्जी ने बताया कि AI के दौर में बड़े डेटा सेंटर बनाने और चलाने के लिए भारी निवेश की जरूरत होती है। इनमें बिजली, कूलिंग सिस्टम और दूसरे जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर काफी पैसा खर्च करना पड़ता है।

ऐसे में निवेशकों को सिर्फ डेटा सेंटर की बढ़ती मांग नहीं देखनी चाहिए। उन्हें यह भी समझना जरूरी है कि निवेश पर कितना रिटर्न (ROI) मिलेगा, कितना कैश फ्लो आएगा और आखिर में निवेशकों को कितना पैसा बांटा जाएगा।

भारत में REITs को क्यों मिल रहा फायदा?

संचिता मुखर्जी के मुताबिक, भारत में रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट यानी REITs का सालाना डिस्ट्रीब्यूटेबल कैश फ्लो अच्छा बना हुआ है।

इसकी एक बड़ी वजह ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), बैंकों, वित्तीय संस्थानों और मल्टीनेशनल कंपनियों की बढ़ती दिलचस्पी है। इसके अलावा AI से जुड़े डेटा सेंटर की मांग भी बढ़ रही है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

भारत में AI आधारित डेटा सेंटर के विकास को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जिससे कमर्शियल रियल एस्टेट के लिए नए अवसर बन रहे हैं।

अब सिर्फ ऑफिस स्पेस नहीं, AI से लैस कैंपस की मांग

संचिता ने बताया कि कंपनियों की जरूरतें भी बदल रही हैं। अब केवल कर्मचारियों के बैठने के लिए ऑफिस बनाना काफी नहीं है।

कंपनियां बेहतर क्वालिटी वाले कमर्शियल स्पेस, बड़े कैंपस और AI से लैस वर्कस्पेस की तलाश कर रही हैं। इसी वजह से कई रियल एस्टेट कंपनियां नई तकनीकों और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर वाले ऑफिस कैंपस विकसित कर रही हैं।

REITs को कैसे हो सकता है फायदा?

ऐसे आधुनिक कमर्शियल स्पेस की लीजिंग बढ़ रही है और इनसे अच्छा रेंटल यील्ड भी मिल रहा है।

संचिता मुखर्जी के मुताबिक, इन कमर्शियल प्रॉपर्टीज को मैनेज करने वाले REITs को इसका फायदा मिल रहा है। हालांकि, निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि किसी प्रोजेक्ट की लागत, उससे मिलने वाला कैश फ्लो और निवेशकों को होने वाला वास्तविक वितरण कितना है।

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