8th Pay Commission: OPS वापसी की मांग तेज! बदल सकती है लाखों कर्मचारियों की किस्मत
8th Pay Commission को लेकर कर्मचारियों ने OPS बहाली की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि NPS और UPS सुरक्षित नहीं हैं। साथ ही, सुझाव देने की समय सीमा और शब्द सीमा बढ़ाने की मांग भी उठी है, जिससे कर्मचारियों की समस्याओं को बेहतर तरीके से रखा जा सके।

केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8th Pay Commission (आठवें वेतन आयोग) को लेकर बड़ी खबर आई है। नेशनल काउंसिल (JCM) की स्टाफ साइड ने वेतन आयोग को एक कड़ा पत्र लिखकर मौजूदा नियमों और पेंशन व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। इस पत्र में सबसे प्रमुख मांग पुरानी पेंशन योजना (OPS) को फिर से बहाल करने की है, जो सीधे तौर पर आपकी रिटायरमेंट के बाद की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी है।
पुरानी पेंशन (OPS) पर बढ़ा दबाव
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) जैसे बाजार पर आधारित सिस्टम कर्मचारियों के हित में नहीं हैं।
स्टाफ साइड ने साफ तौर पर दलील दी है कि सरकारी कर्मचारियों को किसी भी 'कॉन्ट्रीब्यूटरी' पेंशन स्कीम का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। उनकी मांग है कि कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना के तहत एक निश्चित और सुरक्षित आय मिलनी चाहिए।
अगर सरकार इस पर गंभीरता से विचार करती है, तो भविष्य में आपकी रिटायरमेंट प्लानिंग का जोखिम खत्म हो जाएगा और पूरी जिम्मेदारी सिस्टम पर होगी।
अपनी बात रखने के लिए मांगा ज्यादा समय और जगह
आयोग को लिखे पत्र में यह भी कहा गया है कि वर्तमान में अपनी मांगें रखने का तरीका बहुत सीमित है। अभी किसी भी मुद्दे पर सिर्फ 500 शब्दों में अपनी बात कहनी होती है, जिसे बढ़ाकर 1,000 शब्द करने की मांग की गई है।
साथ ही, यह भी प्रस्ताव दिया गया है कि कर्मचारियों को अपनी दलीलें पेश करने के लिए 31 मई 2026 तक का समय दिया जाए। इसके अलावा, दस्तावेजों को अपलोड करने की लिमिट 2 MB से बढ़ाकर 10 MB करने की मांग की गई है ताकि कर्मचारी आंकड़ों और सबूतों के साथ अपनी बात रख सकें।
महिला कर्मचारियों और विभाग की खास जरूरतों पर ध्यान
इस बार महिला कर्मचारियों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाने की तैयारी है। इसमें कार्यस्थल पर सुरक्षा, मैटरनिटी बेनिफिट, मासिक धर्म स्वास्थ्य और चाइल्ड केयर लीव (CCL) जैसे मुद्दों पर विस्तार से जानकारी देने की सुविधा मांगी गई है।
वहीं, जो कर्मचारी किसी खास विभाग में काम करते हैं, उनकी समस्याओं को अलग से सुनने का भी सुझाव दिया गया है। इसके अलावा, रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए पेंशन रिविजन और वेलफेयर से जुड़ी अन्य सुविधाओं को भी इस चर्चा के केंद्र में रखने पर जोर दिया गया है।