8वें वेतन आयोग में कितनी बढ़ेगी सैलरी और पेंशन? इन 5 बातों पर टिका है पूरा फैसला
8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें बढ़ गई हैं। हर किसी के मन में सवाल है कि सैलरी और पेंशन में कितना इजाफा होगा। लेकिन इस बार बढ़ोतरी का हिसाब सिर्फ फिटमेंट फैक्टर से तय नहीं होगा। जानिए कौन सी 5 बातें अहम भूमिका निभाएंगी।

In Short
- 8वें वेतन आयोग से करीब 47 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनर्स को फायदा मिलने की उम्मीद है।
- सैलरी और पेंशन में बढ़ोतरी का फैसला सरकारी खजाने, महंगाई और 5 अहम आर्थिक फैक्टर्स पर निर्भर करेगा।
- आयोग की सिफारिशें मई 2027 तक आ सकती हैं, लेकिन नई सैलरी और एरियर पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को 8वें वेतन आयोग से बड़ी उम्मीदें हैं। करीब 47 लाख कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनर्स को सैलरी और पेंशन बढ़ने का इंतजार है। हालांकि, बढ़ोतरी कितनी होगी, यह अभी तय नहीं है। इसके लिए सरकार की आर्थिक स्थिति, महंगाई और दूसरे खर्चों समेत पांच अहम बातों को ध्यान में रखा जाएगा।
सरकार ने 8वें वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को मंजूरी दे दी है। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में आयोग वेतन, पेंशन और भत्तों की समीक्षा करेगा। नवंबर 2025 में गठित आयोग को रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने मिले हैं। ऐसे में मई 2027 तक सिफारिशें आने की उम्मीद है।
सैलरी बढ़ोतरी में सरकारी खजाने की कितनी भूमिका?
पहला बड़ा फैक्टर देश की अर्थव्यवस्था और सरकारी खजाने की स्थिति है। अगर आर्थिक विकास अच्छा रहता है और सरकार पर वित्तीय दबाव कम होता है, तो बेहतर वेतन बढ़ोतरी की गुंजाइश बन सकती है।
दूसरा फैक्टर विकास योजनाओं पर होने वाला खर्च है। सरकार को कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने के साथ सड़क, रेलवे, अस्पताल, शिक्षा और कल्याणकारी योजनाओं के लिए भी पैसा रखना होगा। इसलिए आयोग इन खर्चों के बीच संतुलन बनाएगा।
पेंशन और राज्यों के बजट का भी पड़ेगा असर
तीसरा अहम फैक्टर ओल्ड पेंशन स्कीम का खर्च है। पुरानी पेंशन व्यवस्था के तहत आने वाले कर्मचारियों की पेंशन सरकार देती है। पेंशन बढ़ने से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
चौथा फैक्टर राज्यों की आर्थिक स्थिति है। कई राज्य केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर अपने कर्मचारियों का वेतन बढ़ाते हैं। ऐसे में राज्यों की खर्च उठाने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी।
प्राइवेट कंपनियों की सैलरी से होगी तुलना
पांचवां फैक्टर निजी कंपनियों और सरकारी उपक्रमों में मिलने वाली सैलरी है। आयोग सरकारी कर्मचारियों के वेतन की तुलना इन क्षेत्रों से कर सकता है। हालांकि, इसका मतलब सरकारी वेतन को निजी कंपनियों के बराबर करना नहीं है।
कब मिलेगी बढ़ी हुई सैलरी?
7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था और उसकी सिफारिशें जनवरी 2016 से लागू हुई थीं। फिलहाल महंगाई भत्ता (DA) बेसिक सैलरी का 58% है।
8वां वेतन आयोग बेसिक सैलरी के अलावा HRA, ट्रांसपोर्ट अलाउंस, मेडिकल सुविधाओं और ग्रेच्युटी की भी समीक्षा कर सकता है।
नई वेतन दरें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, सैलरी कितनी बढ़ेगी, कब मिलेगी और एरियर मिलेगा या नहीं, इस पर अंतिम फैसला सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा।