SIF में निवेश से पहले जान लें ये जरूरी बातें! एक्सपर्ट ने बताया किन निवेशक के लिए नहीं है यह ऑप्शन

एक्सपर्ट ने कहा कि साल 2020 से 2024 के बीच जैसा रिटर्न मिला है, भविष्य में उसकी उम्मीद करना मुश्किल है। जब बाजार में बहुत अधिक रिटर्न मिलने का समय होता है, तब इक्विटी फंड अच्छे लगते हैं, लेकिन जब बाजार मध्यम रिटर्न के फेज में आता है, तो निवेशकों को जोखिम को समझकर बेहतर रिजल्ट देने वाले प्रोडक्ट की जरूरत होती है।

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By Gaurav Kumar:

निवेश के ऑप्शन में से एक स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स (SIF) उन निवेशकों के लिए एक बड़ा सॉल्यूशन हो सकती है जो बाजार में मध्यम रिटर्न के दौर से जूझ रहे हैं। सेबी ने SIF को साल 2024 में पेश किया था जो 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी हुआ था।

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड के कार्यकारी निदेशक और मुख्य निवेश अधिकारी एस. नरेन के मुताबिक, म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में यह हाल के सालों का सबसे महत्वपूर्ण बदलाव है। नरेन का मानना है कि साल 2020 से 2024 के बीच जैसा रिटर्न मिला है, भविष्य में उसकी उम्मीद करना मुश्किल है। जब बाजार में बहुत अधिक रिटर्न मिलने का समय होता है, तब इक्विटी फंड अच्छे लगते हैं, लेकिन जब बाजार मध्यम रिटर्न के फेज में आता है, तो निवेशकों को जोखिम को समझकर बेहतर रिजल्ट देने वाले प्रोडक्ट की जरूरत होती है।

SIF में किसे निवेश करना चाहिए और किसे नहीं?

एक्सपर्ट के मुताबिक यह कैटेगरी उन लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए है जो बाजार के उतार-चढ़ाव को झेल सकते हैं और कम से कम 10 लाख रुपये का निवेश करने की क्षमता रखते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि जो निवेशक 20 प्रतिशत या उससे ज्यादा के सालाना रिटर्न चाहते हैं उनके लिए SIF नहीं है। इसके अलावा ऐसे लोग जो अपनी जमा पूंजी को पूरी तरह सुरक्षित रखना चाहते हैं, उन्हें भी इससे दूर रहना चाहिए।

एक्सपर्ट के मुताबिक, एसआईएफ कैटेगरी उन समझदार और अनुभवी निवेशकों के लिए है जो महीनों में नहीं, बल्कि सालों में अपना प्रदर्शन देखते हैं और बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच संयम रख सकते हैं।

ICICI Prudential AMC के हाल में लॉन्च किए गए SIF विकल्पों में नरेन ने 'एक्टिव एसेट एलोकेटर' रणनीति को खास बताया। पारंपरिक मल्टी-एसेट फंडों में जहां सोना और चांदी जैसी तय एसेट कैटेगरी में निवेश रखना जरूरी होता है, वहीं एक्टिव एसेट एलोकेटर (SIF) में ऐसा कोई अनिवार्य नियम नहीं है। इस फंड में कच्चे तेल, एल्युमीनियम और तांबे जैसी कमोडिटीज में भी निवेश किया जा सकेगा।

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