Credit Risk Funds क्या हैं और कैसे करते हैं काम? निवेश से पहले समझें फायदे और नुकसान
म्यूचुअल फंड में ज्यादा रिटर्न की तलाश करने वाले निवेशकों के लिए Credit Risk Funds एक विकल्प हो सकते हैं। ये फंड कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेश करके कमाई का मौका देते हैं, लेकिन इनमें कुछ ऐसे जोखिम भी हैं जो आपके निवेश को प्रभावित कर सकते हैं। समझें इनका पूरा गणित।

In Short
- Credit Risk Funds कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेश करके रिटर्न कमाने की कोशिश करते हैं।
- ज्यादा ब्याज के साथ इन फंड्स में क्रेडिट और डिफॉल्ट का जोखिम भी रहता है।
- निवेश से पहले फंड की क्रेडिट रेटिंग, लिक्विडिटी और जोखिम समझना जरूरी है।
म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए डेट फंड एक विकल्प हैं। इन्हीं में एक कैटेगरी क्रेडिट रिस्क फंड की भी है। ये फंड कंपनियों के बॉन्ड में पैसा लगाते हैं और ज्यादा ब्याज से बेहतर रिटर्न कमाने की कोशिश करते हैं। हालांकि, ज्यादा कमाई की संभावना के साथ जोखिम भी बढ़ जाता है। ऐसे में निवेश से पहले समझना जरूरी है कि ये फंड कैसे काम करते हैं और इनमें पैसा लगाने से क्या नुकसान हो सकता है।
क्या होते हैं क्रेडिट रिस्क फंड?
क्रेडिट रिस्क फंड ओपन-एंडेड डेट म्यूचुअल फंड होते हैं। SEBI के नियमों के मुताबिक, इन फंड्स को अपनी कुल संपत्ति का कम से कम 65 फीसदी हिस्सा AA और उससे कम रेटिंग वाले कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेश करना होता है। हालांकि, इसमें AA+ रेटिंग वाले बॉन्ड शामिल नहीं होते।
इन बॉन्ड्स में जोखिम अपेक्षाकृत ज्यादा होता है। इसलिए कंपनियां निवेशकों को अधिक ब्याज देती हैं। यही अतिरिक्त ब्याज फंड के लिए बेहतर रिटर्न का मौका पैदा करता है।
कैसे काम करते हैं ये फंड?
क्रेडिट रिस्क फंड निवेशकों से पैसा जुटाकर अलग-अलग कंपनियों के बॉन्ड में लगाते हैं। फंड मैनेजर निवेश से पहले कंपनी की आर्थिक स्थिति, कर्ज चुकाने की क्षमता और नकदी की उपलब्धता की जांच करता है।
फंड की कमाई मुख्य रूप से बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज और उनकी कीमतों में बदलाव पर निर्भर करती है। अगर किसी कंपनी की वित्तीय स्थिति बेहतर होती है और उसकी क्रेडिट रेटिंग बढ़ती है, तो उसके बॉन्ड की कीमत बढ़ सकती है। इससे फंड की NAV को फायदा मिल सकता है।
क्रेडिट रेटिंग क्यों है जरूरी?
क्रेडिट रेटिंग बताती है कि कोई कंपनी अपना कर्ज और ब्याज समय पर चुकाने में कितनी सक्षम है। AAA सबसे मजबूत क्रेडिट क्वालिटी को दर्शाती है। इसके बाद AA, A और BBB जैसी रेटिंग आती हैं।
कम रेटिंग वाले बॉन्ड आमतौर पर ज्यादा ब्याज देते हैं, लेकिन उनमें जोखिम भी अधिक होता है। रेटिंग घटने पर बॉन्ड की कीमत गिर सकती है, जिसका असर फंड की NAV पर पड़ता है।
निवेश करने के क्या फायदे हैं?
इन फंड्स में निवेशकों को अलग-अलग कंपनियों के बॉन्ड में पैसा लगाने का मौका मिलता है। इससे किसी एक कंपनी से जुड़े जोखिम का असर कुछ हद तक कम हो सकता है।
इसके अलावा प्रोफेशनल फंड मैनेजर कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर नजर रखते हैं। ज्यादा ब्याज और क्रेडिट रेटिंग में सुधार से बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। हालांकि, इसकी कोई गारंटी नहीं होती।
किन जोखिमों का रखना होगा ध्यान?
क्रेडिट रिस्क फंड में सबसे बड़ा खतरा कंपनी के कर्ज नहीं चुकाने का होता है। अगर कोई कंपनी डिफॉल्ट करती है, तो फंड को बड़ा नुकसान हो सकता है।
इसके अलावा क्रेडिट रेटिंग घटने, बॉन्ड बेचने में परेशानी, किसी एक कंपनी या सेक्टर में ज्यादा निवेश और ब्याज दरों में बदलाव से भी NAV प्रभावित हो सकती है।
इसलिए निवेशकों को सिर्फ ज्यादा रिटर्न या यील्ड देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। फंड की क्रेडिट क्वालिटी, पोर्टफोलियो, लिक्विडिटी, खर्च और अपनी जोखिम उठाने की क्षमता को समझना भी जरूरी है।