अधिक म्यूचुअल फंड रखना भी हो सकता है नुकसानदायक! जानिए ओवरडायवर्सिफिकेशन का खतरा
निवेश में डायवर्सिफिकेशन जरूरी माना जाता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा निवेश पोर्टफोलियो को उलझा सकता है। कई म्यूचुअल फंड और शेयर रखने के बाद भी अगर निवेश दोहराए जा रहे हैं तो फायदा कम हो सकता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सही निवेश चुनना ज्यादा जरूरी है, सिर्फ संख्या बढ़ाना नहीं।

In Short
- ज्यादा म्यूचुअल फंड रखने से हमेशा बेहतर डायवर्सिफिकेशन नहीं मिलता
- एक जैसे शेयरों में निवेश से पोर्टफोलियो में बढ़ सकता है ओवरलैप
- निवेश की संख्या नहीं बल्कि सही एसेट अलोकेशन और लक्ष्य पर ध्यान देना जरूरी
निवेश करते समय अक्सर कहा जाता है कि पैसा एक ही जगह नहीं लगाना चाहिए। अलग-अलग जगह निवेश करने से जोखिम कम करने में मदद मिलती है। लेकिन क्या बहुत ज्यादा निवेश करना भी फायदेमंद है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जरूरत से ज्यादा डायवर्सिफिकेशन यानी ओवरडायवर्सिफिकेशन पोर्टफोलियो को मजबूत बनाने के बजाय उलझा सकता है।
ज्यादा फंड रखने से नहीं बढ़ती सुरक्षा
कई निवेशक अपने पोर्टफोलियो में कई म्यूचुअल फंड, शेयर, गोल्ड ईटीएफ और इंटरनेशनल फंड जोड़ते जाते हैं। उन्हें लगता है कि ज्यादा निवेश का मतलब ज्यादा सुरक्षा है। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि डायवर्सिफिकेशन का उद्देश्य जोखिम को संभालना है, लगातार निवेश बढ़ाना नहीं।
सीए क्रेशा गुप्ता के मुताबिक, किसी भी नए निवेश को जोड़ने से पहले यह देखना चाहिए कि वह पोर्टफोलियो को मजबूत बना रहा है या सिर्फ निवेश की संख्या बढ़ा रहा है।
अलग-अलग फंड में हो सकती है एक जैसी होल्डिंग
ओवरडायवर्सिफिकेशन की बड़ी समस्या यह है कि कई म्यूचुअल फंड में एक जैसे शेयर हो सकते हैं। ऐसे में निवेशक के पास कई फंड होने के बावजूद असली विविधता नहीं बन पाती।
निशांत शंकर के मुताबिक, कई फंड रखने के बाद भी पोर्टफोलियो कई बार बड़े मार्केट इंडेक्स जैसे रिटर्न देने लगता है, जबकि उसे संभालने में ज्यादा समय और मेहनत लगती है।
इन संकेतों से पहचानें समस्या
अगर निवेशक को यह पता नहीं है कि उसने कौन सा निवेश क्यों किया है, हर साल नए फंड जोड़ रहा है या पुराने निवेश की समीक्षा नहीं कर रहा है, तो यह ओवरडायवर्सिफिकेशन का संकेत हो सकता है।
ज्यादा निवेश होने पर पोर्टफोलियो को ट्रैक करना और रीबैलेंस करना भी मुश्किल हो जाता है।
सही डायवर्सिफिकेशन कितना जरूरी
एक्सपर्ट्स के अनुसार, हर निवेशक के लिए डायवर्सिफिकेशन की सीमा अलग हो सकती है। यह निवेश लक्ष्य, जोखिम क्षमता और समय अवधि पर निर्भर करती है।
कई निवेशकों के लिए 2 से 4 अच्छे म्यूचुअल फंड पर्याप्त हो सकते हैं। वहीं, सीधे शेयरों में निवेश करने वाले लोग 15 से 20 अच्छे शेयरों से भी पर्याप्त विविधता हासिल कर सकते हैं।
निवेश बढ़ाने से ज्यादा जरूरी है सही चुनाव
पोर्टफोलियो को बेहतर बनाने के लिए सबसे पहले सभी निवेशों की समीक्षा करनी चाहिए। यह देखना जरूरी है कि कौन से निवेश एक जैसे हैं और किनकी जरूरत नहीं रह गई है।
निवेश का लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा चीजें जोड़ना नहीं, बल्कि सही निवेश चुनकर एक संतुलित पोर्टफोलियो बनाना होना चाहिए।