बाजार में उथल-पुथल, फिर भी SIP का जलवा कायम! भारतीय निवेशकों की बदलती मैच्योरिटी देख एक्सपर्ट हैरान
बिजनेस टुडे के शो Market Commentary में सीनियर एंकर शैलेंद्र भटनागर के सवालों का जवाब देते हुए श्रीराम एएमसी के सीनियर फंड मैनेजर प्रतीक निगुडकर के अनुसार, लगातार मजबूत SIP इनफ्लो यह दिखाता है कि भारतीय निवेशक अब केवल तेजी के दौर में निवेश करने वाले नहीं रह गए हैं।

In Short
- लगातार तीसरे महीने SIP के जरिए ₹30,000 करोड़ से अधिक का निवेश आया, जो खुदरा निवेशकों के मजबूत भरोसे को दर्शाता है।
- बाजार में उतार-चढ़ाव और सीमित रिटर्न के बावजूद निवेशकों ने SIP निवेश जारी रखा, जिससे लंबी अवधि की सोच का संकेत मिलता है।
- एक्सपर्ट्स के अनुसार मजबूत SIP इनफ्लो म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को स्थिर पूंजी देता है और बाजार की मजबूती बढ़ाने में मदद करता है।
भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग को खुदरा निवेशकों से लगातार मजबूत समर्थन मिल रहा है। मंथली सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश लगातार तीसरे महीने 30,000 करोड़ रुपये के स्तर पर बना हुआ है। मार्केट एक्सपर्ट का मानना है कि यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारतीय निवेशकों की बदलती सोच और मैच्योरिटी का संकेत है।
बिजनेस टुडे के शो Market Commentary में सीनियर एंकर शैलेंद्र भटनागर के सवालों का जवाब देते हुए श्रीराम एएमसी के सीनियर फंड मैनेजर प्रतीक निगुडकर के अनुसार, लगातार मजबूत SIP इनफ्लो यह दिखाता है कि भारतीय निवेशक अब केवल तेजी के दौर में निवेश करने वाले नहीं रह गए हैं।
उन्होंने कहा कि यह बदलाव बताता है कि निवेशक बाजार के शॉर्ट टर्म उतार-चढ़ाव से ऊपर उठकर लंबी अवधि के लक्ष्यों पर ध्यान दे रहे हैं।
मुश्किल दौर में भी नहीं टूटा निवेशकों का भरोसा
निगुडकर ने कहा कि पिछले दो-तीन साल में निवेशकों ने कई निराशाजनक दौर देखे हैं। कोविड के बाद जिस तरह बाजार में लगातार तेज तेजी देखने को मिली थी, वैसा माहौल अब नहीं रहा। इसके बावजूद SIP निवेश में कोई बड़ी कमजोरी नहीं आई।
यही वजह है कि मौजूदा रुझान को बाजार के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। अस्थिरता के समय निवेशकों का नियमित निवेश जारी रखना इस बात का संकेत है कि वे अब अधिक अनुशासित और लक्ष्य आधारित निवेश रणनीति अपना रहे हैं।
म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए क्यों अहम है यह ट्रेंड?
एक्सपर्ट ने कहा कि म्यूचुअल फंड कंपनियों के लिए SIP के जरिए आने वाला पैसा एक स्थिर पूंजी स्रोत माना जाता है। इससे फंड मैनेजरों को बाजार में गिरावट के दौरान मूल्य आधारित अवसरों में निवेश करने और लंबी अवधि की विकास क्षमता वाली कंपनियों में हिस्सेदारी बढ़ाने का मौका मिलता है।
निगुडकर का कहना है कि इसका फायदा केवल फंड हाउस तक सीमित नहीं है। वित्तीय बाजारों की गहराई बढ़ने, बचत के वित्तीयकरण को बढ़ावा मिलने और कंपनियों के लिए पूंजी जुटाना आसान होने जैसे व्यापक लाभ भी इससे जुड़े हैं।
बचत के तरीके में दिख रहा बड़ा बदलाव
एक्सपर्ट ने कहा कि हालिया बाजार तेजी के बावजूद कई फंड मैनेजर वैल्यूएशन को लेकर सतर्क हैं। ऐसे माहौल में SIP निवेश का मजबूत बने रहना इस बात का संकेत है कि खुदरा निवेशक अब जल्द मुनाफे के बजाय लॉन्ग टर्म संपत्ति निर्माण पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।