Smallcap Mutual Fund में निवेशकों की भीड़! हर ₹100 में से ₹44 इन फंडों में, फिर क्यों बढ़ रही चिंता?

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद स्मॉलकैप और मिडकैप म्यूचुअल फंड में निवेशकों का पैसा तेजी से पहुंच रहा है। सितंबर में इक्विटी फंड के कुल निवेश का 44% हिस्सा इन्हीं कैटेगरी में गया। लेकिन बाजार में गिरावट के बाद भी इन शेयरों का वैल्यूएशन महंगा बना हुआ है। क्या निवेशकों का भरोसा अब जोखिम बढ़ा रहा है? जानिए रिपोर्ट के अहम संकेत।

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निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी के बीच महंगे वैल्यूएशन ने बढ़ाई चिंता, क्या अब निवेश करना जोखिम भरा?
निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी के बीच महंगे वैल्यूएशन ने बढ़ाई चिंता, क्या अब निवेश करना जोखिम भरा?

In Short

  • सितंबर 2026 में स्मॉलकैप और मिडकैप फंड में ₹16,873 करोड़ आए, जो कुल इक्विटी फंड निवेश का लगभग 44% है।
  • स्मॉलकैप शेयर लार्जकैप के मुकाबले 34% और मिडकैप शेयर 47% प्रीमियम पर कारोबार कर रहे थे।
  • W by Groww की रिपोर्ट में लार्जकैप को पोर्टफोलियो का मुख्य हिस्सा रखने और स्मॉलकैप-मिडकैप में चुनिंदा निवेश का सुझाव दिया गया है।

By Shakshi:

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों का भरोसा स्मॉलकैप और मिडकैप म्यूचुअल फंड पर बना हुआ है। सितंबर में इक्विटी फंड में आए कुल निवेश का 44% हिस्सा इन्हीं दो कैटेगरी में गया। हालांकि, रिपोर्ट में इनके महंगे वैल्यूएशन को लेकर चिंता जताई गई है। ऐसे में सवाल है कि क्या निवेशकों को अब ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?

भारतीय शेयर बाजार में स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों की लोकप्रियता कम नहीं हो रही है। पिछले एक साल में बाजार में गिरावट देखने को मिली, लेकिन इन कैटेगरी के म्यूचुअल फंड में निवेशकों ने लगातार पैसा लगाया है।

W by Groww की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 में इक्विटी म्यूचुअल फंड में कुल ₹38,307 करोड़ का शुद्ध निवेश आया। इसमें से ₹16,873 करोड़ अकेले स्मॉलकैप और मिडकैप फंड में लगाए गए।

हर ₹100 में से ₹44 इन फंडों में

रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में इक्विटी म्यूचुअल फंड में आने वाला निवेश 31% बढ़ा। हालांकि, इस दौरान इक्विटी फंड की कुल संपत्ति में गिरावट दर्ज की गई।

स्मॉलकैप और मिडकैप फंड में निवेशकों की दिलचस्पी मजबूत बनी हुई है। लेकिन विशेषज्ञों की चिंता यह है कि इन शेयरों की कीमतें अब भी बड़ी कंपनियों के शेयरों के मुकाबले काफी महंगी हैं।

बाजार गिरा, फिर भी स्मॉलकैप शेयर महंगे क्यों?

किसी शेयर का वैल्यूएशन बताता है कि निवेशक कंपनी की अनुमानित कमाई के मुकाबले कितनी कीमत चुका रहे हैं।

सितंबर 2024 में Smallcap 250 इंडेक्स का फॉरवर्ड P/E रेशियो 25 गुना था, जो सितंबर 2026 में घटकर 23.6 गुना हुआ। यानी इसमें करीब 6% की कमी आई।

वहीं, इसी अवधि में Nifty 50 का फॉरवर्ड P/E रेशियो 24.8 से घटकर 17.6 गुना रह गया। यह लगभग 29% की गिरावट है। इसका मतलब है कि बड़ी कंपनियों के शेयरों का वैल्यूएशन स्मॉलकैप के मुकाबले ज्यादा घटा है।

लार्जकैप के मुकाबले कितना प्रीमियम?

रिपोर्ट के मुताबिक, स्मॉलकैप शेयर लार्जकैप के मुकाबले करीब 34% प्रीमियम पर कारोबार कर रहे थे, जबकि ऐतिहासिक तौर पर इनमें औसतन 11% का डिस्काउंट रहा है।

इसी तरह मिडकैप शेयरों का प्रीमियम 47% था, जबकि इसका ऐतिहासिक औसत 19% है। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में गिरावट के बाद भी इन शेयरों का वैल्यूएशन पूरी तरह आकर्षक नहीं हुआ है।

निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?

रिपोर्ट में लार्जकैप फंड को इक्विटी पोर्टफोलियो का मुख्य हिस्सा रखने और स्मॉलकैप-मिडकैप में चुनिंदा निवेश करने की सलाह दी गई है। इन दोनों कैटेगरी में सक्रिय रूप से प्रबंधित फंड को प्राथमिकता दी गई है, जहां फंड मैनेजर कंपनियों का चयन करते हैं।

निवेशकों के लिए जरूरी बात: किसी फंड में लगातार पैसा आना अच्छे रिटर्न की गारंटी नहीं है। निवेश से पहले शेयरों के वैल्यूएशन, कंपनियों की कमाई की संभावनाओं और अपनी जोखिम उठाने की क्षमता को जरूर समझें।

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