स्मॉल कैप या लार्ज कैप फंड- इस वक्त निवेशक कहां करें निवेश? जानिए एक्सपर्ट की राय
शेयर बाजार में गिरावट के बीच मिड और स्मॉल कैप फंड्स को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। लेकिन एक मार्केट एक्सपर्ट ने SIP के रिटर्न को लेकर चौंकाने वाली बात कही है। आखिर क्यों वह फ्लेक्सी कैप के मुकाबले मल्टी कैप फंड्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं? जानिए।

In Short
- बाजार में गिरावट के बावजूद मिड और स्मॉल कैप में SIP करने वालों को फायदा होने की बात।
- मिड और स्मॉल कैप फंड्स के रिटर्न को लेकर मार्केट एक्सपर्ट ने क्या कहा?
- मल्टी कैप और फ्लेक्सी कैप में किसे ज्यादा पसंद कर रहे एक्सपर्ट और क्यों?
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच मिड कैप और स्मॉल कैप शेयरों की महंगी वैल्यूएशन को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि, बाजार के एक अनुभवी एक्सपर्ट का नजरिया इससे अलग है। बिजनेस टुडे के एक शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Invest At Ease के फाउंडर, शरद टंडन ने कहा कि जिन निवेशकों ने पिछले दो साल में मिड और स्मॉल कैप फंड्स में SIP के जरिए लगातार पैसा लगाया है, वे बाजार में गिरावट के बावजूद फायदे में हैं। एक्सपर्ट ने मौजूदा बाजार में फ्लेक्सी कैप के मुकाबले मल्टी कैप फंड्स को अपनी पसंद बताया है।
बाजार गिरा, फिर भी SIP निवेशकों को फायदा
एक्सपर्ट के मुताबिक, पिछले दो साल में मिड और स्मॉल कैप फंड्स में नियमित SIP करने वाले निवेशकों को अब भी करीब 4 से 10 फीसदी का पॉजिटिव रिटर्न मिल रहा होगा। वहीं, लार्ज कैप में निवेश करने वालों का रिटर्न निगेटिव रहने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले मिड और स्मॉल कैप को लेकर बनी धारणा को समझना जरूरी है। सितंबर में निफ्टी करीब 26,000 के स्तर पर था, लेकिन गिरावट के बाद यह 23,000 से नीचे आ गया। इसी दौरान स्मॉल कैप इंडेक्स में भी लगभग इसी तरह का करेक्शन देखने को मिला।
उनके मुताबिक, निवेशकों का रिटर्न सिर्फ बाजार की गिरावट पर निर्भर नहीं करता, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करता है कि पैसा कब और किस तरीके से लगाया गया है।
मिड और स्मॉल कैप में क्यों दिख रहे हैं मौके?
एक्सपर्ट का मानना है कि पिछले दो से तीन साल में भारतीय शेयर बाजार में असली ग्रोथ का बड़ा हिस्सा ब्रॉडर मार्केट यानी मिड और स्मॉल कैप शेयरों में देखने को मिला है।
उनके मुताबिक, इन कंपनियों में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम होने से विदेशी बिकवाली का असर भी अलग हो सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत में घरेलू खपत, डिजिटलाइजेशन, हेल्थकेयर और उभरते उद्योगों की ग्रोथ का फायदा ब्रॉडर मार्केट की कंपनियों को मिल सकता है। हालांकि, इन शेयरों में उतार-चढ़ाव भी निवेश का हिस्सा है।
मल्टी कैप को फ्लेक्सी कैप से ज्यादा क्यों पसंद कर रहे एक्सपर्ट?
एक्सपर्ट ने मल्टी कैप फंड्स को लेकर अपनी पसंद की वजह भी बताई। दरअसल, मल्टी कैप फंड्स में कम से कम 25 फीसदी निवेश मिड कैप और 25 फीसदी स्मॉल कैप में रखना जरूरी होता है।
यानी कुल मिलाकर कम से कम 50 फीसदी पैसा इन दोनों कैटेगरी में लगा रहता है।
वहीं, फ्लेक्सी कैप फंड मैनेजर बाजार की स्थिति के हिसाब से लार्ज कैप शेयरों में ज्यादा निवेश कर सकता है।
एक्सपर्ट ने कहा कि एक निवेशक के तौर पर वह मल्टी कैप में ज्यादा सहज महसूस करते हैं, क्योंकि इसमें मिड और स्मॉल कैप का कम से कम 50 फीसदी एक्सपोजर तय रहता है।
उनके मुताबिक, लंबी अवधि तक निवेश करने और बाजार के उतार-चढ़ाव को सहने की क्षमता रखने वाले निवेशकों के लिए मल्टी कैप फंड्स ब्रॉडर मार्केट की ग्रोथ में हिस्सेदारी लेने का एक विकल्प हो सकते हैं।