Small Cap Funds: बाजार में 10% तक तेजी, फिर भी इन 5 फंड्स ने किया निराश! आखिर कहां हुई चूक?

स्मॉल-कैप म्यूचुअल फंड्स में इस साल रिटर्न का बड़ा अंतर देखने को मिला है। जहां संबंधित इंडेक्स ने करीब 9 से 10 फीसदी तक रिटर्न दिया, वहीं कुछ बड़े फंड्स का प्रदर्शन कमजोर रहा। मनीफ्रंट के सीईओ मोहित गैंग ने बिजनेस टुडे से बातचीत में पांच ऐसे फंड्स का जिक्र किया है। आखिर इनका रिटर्न क्यों पिछड़ा और निवेशकों को किन संकेतों पर नजर रखनी चाहिए?

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Small Cap Funds में किसने डुबोया पैसा?
Small Cap Funds में किसने डुबोया पैसा?

In Short

  • स्मॉल-कैप इंडेक्स में करीब 9 से 10 फीसदी तेजी के बावजूद कुछ फंड्स का रिटर्न कमजोर रहा।
  • एक्सपर्ट ने HDFC, Canara Robeco, Edelweiss, UTI और ICICI Prudential के स्मॉल-कैप फंड्स का जिक्र किया।
  • बड़ा AUM और तेजी से बदलते सेक्टर ट्रेंड कमजोर प्रदर्शन की संभावित वजहें बताई गईं।

By Shakshi:

स्मॉल-कैप म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने वाले लोगों के लिए इस साल मिले-जुले नतीजे सामने आए हैं। एक तरफ कई स्मॉल-कैप फंड्स ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है, तो दूसरी तरफ कुछ बड़े और जाने-माने फंड्स का प्रदर्शन कमजोर रहा है। हैरानी की बात यह है कि जब स्मॉल-कैप इंडेक्स ने करीब 9 से 10 फीसदी तक रिटर्न दिया, तब भी कुछ फंड्स निवेशकों को फायदा नहीं पहुंचा सके। आखिर ऐसा क्यों हुआ और निवेश करने से पहले किन बातों पर ध्यान देना जरूरी है?

बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए मनीफ्रंट (Moneyfront) के को-फाउंडर और सीईओ मोहित गैंग ने कहा कि जब कोई इंडेक्स करीब 10 फीसदी का रिटर्न दे रहा हो, तो किसी फंड का उससे थोड़ा कम प्रदर्शन करना सामान्य माना जा सकता है। लेकिन अगर इंडेक्स 10 फीसदी ऊपर है और कोई फंड 1 फीसदी के नुकसान में है, तो यह चिंता की बात है। निवेशकों को ऐसे फंड्स के कमजोर प्रदर्शन की वजह जरूर समझनी चाहिए।

किन स्मॉल-कैप फंड्स का प्रदर्शन रहा कमजोर?

मोहित गैंग के मुताबिक, इस साल अब तक यानी ईयर-टू-डेट (YTD) रिटर्न के मामले में कुछ बड़े स्मॉल-कैप फंड्स पिछड़ गए हैं।

उन्होंने कमजोर प्रदर्शन करने वाले फंड्स में HDFC Small Cap Fund, Canara Robeco Small Cap Fund, Edelweiss Small Cap Fund, UTI Small Cap Fund और ICICI Prudential Small Cap Fund का नाम लिया।

मोहित गैंग ने बताया कि इनमें HDFC Small Cap Fund का आकार काफी बड़ा है। इस फंड का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) करीब ₹42,000 करोड़ है और यह इंडस्ट्री के सबसे बड़े स्मॉल-कैप फंड्स में शामिल है।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इनमें से कुछ फंड्स का लंबी अवधि का रिकॉर्ड ठीक रहा है। लेकिन YTD के साथ पिछले एक और दो साल का प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं रहा है।

बड़े फंड्स के लिए क्यों बढ़ रही मुश्किल?

मोहित गैंग के मुताबिक, कमजोर प्रदर्शन की एक बड़ी वजह फंड का बहुत बड़ा आकार हो सकता है।

उन्होंने समझाया कि जब किसी म्यूचुअल फंड का AUM बहुत ज्यादा होता है, तो फंड मैनेजर के लिए बाजार की बदलती परिस्थितियों के अनुसार जल्दी निवेश बदलना मुश्किल हो जाता है।

इसके उलट, छोटे आकार वाले फंड्स के मैनेजर अपेक्षाकृत आसानी से अपने पोर्टफोलियो में बदलाव कर सकते हैं।

यही वजह है कि तेजी से बदलते बाजार में छोटे AUM वाले फंड्स को कुछ मामलों में फायदा मिल सकता है।

हर महीने बदल रहा बाजार का ट्रेंड

मोहित गैंग ने बताया कि पिछले एक साल में शेयर बाजार में सेक्टर रोटेशन काफी तेज रहा है। इसका मतलब है कि निवेशकों की दिलचस्पी लगातार एक सेक्टर से दूसरे सेक्टर की ओर बदलती रही है।

कभी डिफेंस सेक्टर में तेजी देखने को मिली, तो कभी पावर और इंजीनियरिंग कंपनियों के शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया। इसके अलावा कुछ स्मॉल-कैप डेटा सेंटर कंपनियों के शेयर भी चर्चा में रहे।

उनके मुताबिक, बाजार में कोई एक थीम लंबे समय तक नहीं टिक पाई। कई बार एक-दो महीने में ही निवेश का ट्रेंड बदल गया।

ऐसे माहौल में जो फंड मैनेजर समय पर अपने पोर्टफोलियो में बदलाव नहीं कर पाए, उनके फंड्स का रिटर्न प्रभावित हुआ।

क्या ज्यादा AUM होना ही खराब रिटर्न की वजह है?

मोहित गैंग का कहना है कि बड़े AUM को कमजोर प्रदर्शन की एक संभावित वजह माना जा सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि HSBC जैसे कुछ फंड हाउस करीब ₹18,000 से ₹20,000 करोड़ के AUM के बावजूद अच्छा प्रदर्शन करने में सफल रहे हैं।

इससे साफ होता है कि केवल फंड का आकार ही रिटर्न तय नहीं करता। फंड मैनेजर की निवेश रणनीति, सही शेयरों का चुनाव और बदलते बाजार के अनुसार फैसले लेने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होती है।

निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

मोहित गैंग की बातों से यह संकेत मिलता है कि निवेशकों को किसी स्मॉल-कैप फंड में पैसा लगाने से पहले सिर्फ उसके हालिया रिटर्न पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

फंड के प्रदर्शन की तुलना उसके बेंचमार्क इंडेक्स से करना जरूरी है। इसके अलावा पिछले एक, दो और लंबी अवधि के रिटर्न को भी देखना चाहिए।

अगर कोई फंड लगातार अपने बेंचमार्क से काफी पीछे रह रहा है, तो उसके प्रदर्शन की वजह समझना जरूरी है।

साथ ही फंड का AUM, पोर्टफोलियो में बदलाव और फंड मैनेजर की रणनीति पर भी ध्यान देना चाहिए। हालांकि, सिर्फ कुछ महीनों के कमजोर रिटर्न के आधार पर किसी फंड को खराब मान लेना भी सही नहीं होगा।

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