स्मॉल-कैप फंड में निवेश से पहले किन बातों का रखें ध्यान? एक्सपर्ट ने बताए फंड चुनने के 5 जरूरी तरीके
स्मॉल-कैप म्यूचुअल फंड्स में निवेश करके अच्छा रिटर्न कमाना चाहते हैं? तो सिर्फ पिछले एक-दो साल का प्रदर्शन देखकर पैसा लगाना भारी पड़ सकता है। मनीफ्रंट के सीईओ मोहित गैंग ने बताया है कि सही फंड चुनते समय किन जरूरी बातों पर ध्यान देना चाहिए और कैसे जोखिम से बचा जा सकता है।

In Short
- स्मॉल-कैप फंड चुनते समय सिर्फ एक-दो साल नहीं, कम से कम 5 साल का प्रदर्शन देखना जरूरी है।
- फंड मैनेजर का अनुभव और पोर्टफोलियो में शामिल शेयरों की हिस्सेदारी पर भी ध्यान देना चाहिए।
- एक्सपर्ट के मुताबिक, बेहतर रिटर्न के साथ निवेश के जोखिम और शेयरों के वैल्यूएशन की जांच भी जरूरी है।
स्मॉल-कैप म्यूचुअल फंड में निवेश करके अच्छा रिटर्न कमाना चाहते हैं? तो सिर्फ पिछले एक-दो साल का शानदार प्रदर्शन देखकर किसी फंड में पैसा लगाना सही फैसला नहीं हो सकता। बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Moneyfront के को-फाउंडर और सीईओ मोहित गैंग ने बताया कि स्मॉल-कैप फंड चुनते समय निवेशकों को कई जरूरी बातों पर ध्यान देना चाहिए। इनमें फंड का पुराना प्रदर्शन, फंड मैनेजर का अनुभव, पोर्टफोलियो और निवेश से जुड़ा जोखिम शामिल है।
दरअसल, स्मॉल-कैप फंड्स में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है, लेकिन एक ही कैटेगरी के अलग-अलग फंड्स के रिटर्न में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। ऐसे में सही फंड चुनना बेहद जरूरी हो जाता है।
सिर्फ एक साल का नहीं, 5 साल का रिटर्न देखें
मोहित गैंग के मुताबिक, निवेशकों को किसी भी स्मॉल-कैप फंड में पैसा लगाने से पहले उसका कम से कम पांच साल का प्रदर्शन देखना चाहिए। सिर्फ एक या दो साल के अच्छे रिटर्न के आधार पर फैसला नहीं लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह देखना जरूरी है कि फंड ने लगातार अपने बेंचमार्क से बेहतर रिटर्न दिया है या नहीं। स्मॉल-कैप फंड्स के लिए निफ्टी 250 स्मॉलकैप इंडेक्स एक अहम बेंचमार्क है। निवेशकों को पांच साल के रोलिंग और सालाना रिटर्न पर भी ध्यान देना चाहिए।
फंड मैनेजर का अनुभव कितना जरूरी?
मोहित गैंग के मुताबिक, फंड मैनेजर का अनुभव भी काफी मायने रखता है। कई स्मॉल-कैप फंड्स को ऐसे मैनेजर संभाल रहे हैं, जिन्होंने तेजी वाले बाजार में तो अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन लंबी गिरावट का सामना नहीं किया।
इसलिए ऐसे फंड मैनेजर को प्राथमिकता देनी चाहिए, जिसने बाजार में तेजी और गिरावट के कई दौर देखे हों।
पोर्टफोलियो में ज्यादा निवेश बन सकता है जोखिम
मोहित गैंग ने बैंक ऑफ इंडिया स्मॉल कैप फंड का उदाहरण देते हुए बताया कि इस फंड ने कुछ शेयरों में 8 से 10 फीसदी तक निवेश किया है, जबकि आमतौर पर यह हिस्सेदारी 3 से 5 फीसदी रहती है।
इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट, ऑटो एंसिलरी और छोटी फार्मा कंपनियों में निवेश से फंड को फायदा हुआ है। हालांकि, किसी एक शेयर में बड़ी हिस्सेदारी होने से नुकसान का खतरा भी बढ़ जाता है।
रिस्क और वैल्यूएशन भी जरूर जांचें
मोहित गैंग के मुताबिक, निवेशकों को शार्प और सॉर्टिनो रेशियो जैसे पैमानों पर भी फंड की जांच करनी चाहिए। इससे जोखिम के मुकाबले मिलने वाले रिटर्न का अंदाजा लगता है।
इसके अलावा पोर्टफोलियो में शामिल शेयरों के वैल्यूएशन पर भी ध्यान देना जरूरी है। कुल मिलाकर, स्मॉल-कैप फंड चुनते समय सिर्फ ज्यादा रिटर्न नहीं, बल्कि लगातार प्रदर्शन, अनुभवी मैनेजर और जोखिम को समझना भी जरूरी है।