SIP vs STP: म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए कौन-सा तरीका है बेहतर? जानें दोनों में बड़ा अंतर और फायदे

SIP और STP दोनों म्यूचुअल फंड में पैसा धीरे-धीरे लगाने के तरीके हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल अलग जरूरतों के लिए होता है। SIP नियमित आमदनी वालों के लिए आसान हो सकती है, जबकि STP पहले से मौजूद बड़ी रकम को चरणों में निवेश करने में मदद करती है।

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In Short

  • SIP में पैसा सीधे बैंक खाते से चुनी गई म्यूचुअल फंड स्कीम में जाता है।
  • STP में रकम एक ही AMC की एक स्कीम से दूसरी स्कीम में ट्रांसफर होती है।
  • दोनों में टैक्स, Exit Load और बाजार के जोखिम को समझना जरूरी है।

By Gaurav Kumar:

SIP vs STP: म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए SIP और STP दो अलग तरीके हैं। SIP यानी Systematic Investment Plan में निवेशक अपने बैंक खाते से तय रकम नियमित रूप से किसी म्यूचुअल फंड स्कीम में लगाता है। वहीं STP यानी Systematic Transfer Plan में पैसा पहले से एक म्यूचुअल फंड स्कीम में लगा होता है और वहां से तय रकम दूसरी स्कीम में ट्रांसफर की जाती है।

दोनों का मकसद पैसा धीरे-धीरे निवेश करना है, लेकिन दोनों का इस्तेमाल अलग जरूरतों के लिए होता है।

SIP और STP में सबसे बड़ा अंतर

SIP में हर बार नई रकम बैंक खाते से म्यूचुअल फंड में जाती है। यह उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है, जो हर महीने अपनी सैलरी या दूसरी नियमित आमदनी से थोड़ी रकम निवेश करना चाहते हैं।

STP में नया पैसा बैंक खाते से नहीं आता। इसमें पहले से किसी फंड में रखा पैसा धीरे-धीरे दूसरी स्कीम में भेजा जाता है। यह तरीका उन निवेशकों के काम आ सकता है, जिनके पास पहले से बड़ी रकम मौजूद है।

ये खबर पढ़ना न भूलें: STP क्या है और यह कैसे काम करता है? जानिए एक फंड से दूसरे फंड में कैसे ट्रांसफर होता है पैसा

SIP में निवेशक एक ही स्कीम में नियमित पैसा लगाता रहता है। STP में पैसा एक स्कीम से दूसरी स्कीम में जाता है। यह ट्रांसफर केवल एक ही म्यूचुअल फंड कंपनी यानी AMC की योग्य स्कीमों के बीच हो सकता है।

दोनों के फायदे क्या हैं?

SIP नियमित निवेश की आदत बनाने में मदद करती है। बाजार नीचे होने पर उसी रकम में ज्यादा यूनिट और बाजार ऊपर होने पर कम यूनिट मिल सकती हैं। इसे Rupee Cost Averaging कहा जाता है। हालांकि, इससे रिटर्न की गारंटी नहीं मिलती।

STP में बड़ी रकम को एक साथ म्यूचुअल फंड में लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। निवेशक पहले रकम को किसी लिक्विड या डेट फंड में रख सकता है और फिर धीरे-धीरे इक्विटी फंड में भेज सकता है। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कुछ हद तक कम हो सकता है।

टैक्स में क्या फर्क है?

SIP में पैसा लगाते समय टैक्स नहीं लगता। बाद में यूनिट बेचने पर हुए मुनाफे पर लागू नियमों के मुताबिक Capital Gains Tax लग सकता है।

STP के हर ट्रांसफर में सोर्स फंड की यूनिट बेची जाती हैं और डेस्टिनेशन फंड की यूनिट खरीदी जाती हैं। इसलिए हर ट्रांसफर पर Capital Gains Tax और स्कीम के नियमों के अनुसार Exit Load लग सकता है।

SIP या STP में क्या चुनें?

हर महीने थोड़ी रकम निवेश करनी हो, तो SIP ज्यादा आसान विकल्प हो सकती है। पहले से बड़ी रकम हो और उसे धीरे-धीरे दूसरे फंड में भेजना हो, तो STP उपयोगी हो सकती है।

किसी एक को सभी निवेशकों के लिए बेहतर नहीं कहा जा सकता। सही विकल्प आपकी आमदनी, निवेश की रकम, लक्ष्य, समय और जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करता है। दोनों में बाजार का जोखिम रहता है और रिटर्न तय नहीं होता।

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