SIP क्यों जरूरी है? दीपक शेनॉय ने बताया निवेश का ऐसा फायदा, जो बाजार के उतार-चढ़ाव से अलग है

SIP में हर महीने बढ़ते निवेश के बीच दीपक शेनॉय ने बताया कि इसका असली फायदा बाजार में कीमत का औसत निकालना नहीं बल्कि नियमित निवेश की आदत बनाना है।

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In Short

  • दीपक शेनॉय के मुताबिक SIP का सबसे बड़ा फायदा कीमत का औसत निकालना नहीं बल्कि हर महीने नि
  • SIP कमाई बचत और निवेश के मासिक चक्र को आसान बनाकर निवेश में अनुशासन लाने में मदद करती है
  • शुरुआती निवेश के दौर में बचत की गई रकम ज्यादा अहम होती है जबकि समय के साथ रिटर्न का असर बढ़ने लगता है

By Gaurav Kumar:

SIP Investment: भारत में SIP यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के जरिए निवेश करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हर महीने SIP में करीब 31,000 करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है। लेकिन कैपिटलमाइंड के CEO दीपक शेनॉय का कहना है कि SIP का असली फायदा सिर्फ बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव के बीच खरीदारी की औसत कीमत निकालना नहीं है।

उनके मुताबिक, रुपी कॉस्ट एवरेजिंग SIP के जरिए नियमित निवेश करने का नतीजा है, लेकिन यह SIP शुरू करने की मुख्य वजह नहीं होनी चाहिए।

हर महीने की कमाई से जुड़ा है SIP का तरीका

दीपक शेनॉय के अनुसार, SIP इसलिए ज्यादा काम की है क्योंकि ज्यादातर लोगों की कमाई हर महीने आती है। लोगों का सामान्य तरीका होता है कि वे कमाते हैं, खर्च करते हैं, बचत करते हैं और फिर निवेश करते हैं।

SIP इसी आदत को आसान बना देती है। इसमें हर महीने कमाई का एक हिस्सा अपने आप निवेश हो जाता है। इससे निवेशक को बार-बार यह सोचने की जरूरत नहीं पड़ती कि कब और कितना पैसा लगाना है।

यह तरीका उन लोगों के लिए ज्यादा उपयोगी है, जिनकी हर महीने तय आय आती है।

पहले निवेश करने से बनती है बचत की आदत

शेनॉय का कहना है कि SIP का एक बड़ा फायदा यह भी है कि अगर पैसा निवेश नहीं किया जाए तो वह अक्सर खर्च हो जाता है।

SIP में पहले पैसा निवेश किया जाता है और फिर बाकी पैसों से खर्च किया जाता है। इससे एक तरह की नियमित बचत की आदत बनती है, जो लंबे समय में बड़ा निवेश फंड बनाने में मदद कर सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि हर महीने निवेश की रकम एक जैसी होना जरूरी नहीं है। जो लोग खुद हर महीने निवेश करते हैं, वे अपनी स्थिति के हिसाब से कभी ज्यादा और कभी कम पैसा लगा सकते हैं।

शुरुआत में बचत की रकम होती है ज्यादा अहम

शेनॉय के मुताबिक, निवेश के शुरुआती सालों में फंड बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निवेशक की अपनी बचत और लगाई गई रकम की होती है।

जब निवेश का पैसा धीरे-धीरे बढ़ने लगता है, तब रिटर्न का असर भी ज्यादा दिखाई देने लगता है। इसलिए शुरुआत से नियमित निवेश करना फंड बढ़ाने में मदद कर सकता है।

SIP सिर्फ पैसा बढ़ाने का जरिया नहीं

दीपक शेनॉय के अनुसार, निवेश की प्रक्रिया में तीन हिस्से होते हैं। पहला है पैसा बचाकर निवेश करना, दूसरा है उस पैसे को रिटर्न के जरिए बढ़ाना और तीसरा है जरूरत के समय उस पैसे का इस्तेमाल करना।

उनका कहना है कि निवेश का मकसद सिर्फ बड़ा फंड बनाना नहीं होना चाहिए, बल्कि उस पैसे का इस्तेमाल जीवन को बेहतर बनाने के लिए भी होना चाहिए।

SIP को सिर्फ बाजार में कीमत का औसत निकालने की रणनीति के तौर पर नहीं, बल्कि नियमित कमाई को लंबे समय की संपत्ति में बदलने के तरीके के रूप में देखना चाहिए।
 

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