म्यूचुअल फंड बदलने की जल्दी न करें! राधिका गुप्ता ने बताया कब स्विच करना सही और कब हो सकता है नुकसान

म्यूचुअल फंड निवेश में सही फैसला लेना आसान नहीं होता। कई बार अच्छा प्रदर्शन करने वाला फंड भी निवेशकों को बदलने का मन बना देता है। लेकिन राधिका गुप्ता ने बताया कि कब फंड बदलना सही है और कब यह फैसला नुकसान पहुंचा सकता है। जानिए निवेशकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

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In Short

  • राधिका गुप्ता ने बताया क्यों हर बार ज्यादा रिटर्न देने वाले फंड के पीछे भागना सही नहीं
  • निवेशकों को फंड बदलने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और प्रदर्शन की समीक्षा करनी चाहिए
  • लगातार बेहतर रिटर्न की तलाश लंबे समय में निवेशकों के लिए जोखिम बढ़ा सकती है

By Gungun Mishra:

म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले कई लोग अक्सर तब अपना फंड बदलने का फैसला कर लेते हैं, जब कोई दूसरा फंड ज्यादा रिटर्न देता हुआ नजर आता है। लेकिन Edelweiss Mutual Fund की CEO राधिका गुप्ता का कहना है कि हर बार बेहतर प्रदर्शन करने वाले फंड के पीछे भागना लंबे समय में निवेशकों की संपत्ति को नुकसान पहुंचा सकता है।

उन्होंने कहा कि निवेश की शुरुआत आमतौर पर किसी साफ वित्तीय लक्ष्य के साथ होती है। जैसे 10% रिटर्न हासिल करना, रिटायरमेंट के लिए पैसा जुटाना, महंगाई को मात देना या लंबे समय में संपत्ति बनाना।

अच्छा प्रदर्शन कर रहा है तो सिर्फ तुलना के लिए न बदलें फंड

राधिका गुप्ता के मुताबिक, परेशानी तब शुरू होती है जब निवेशक अपने फंड की तुलना किसी ऐसे फंड से करने लगते हैं जिसने हाल में ज्यादा रिटर्न दिया हो। इसके बाद निवेशक को लगता है कि उनका मौजूदा फंड अब उतना अच्छा नहीं है।

उन्होंने कहा कि अगर कोई फंड निवेशक के तय लक्ष्य के मुताबिक प्रदर्शन कर रहा है और वित्तीय लक्ष्य पूरे होने की दिशा में है, तो सिर्फ किसी दूसरे फंड के ज्यादा रिटर्न देने की वजह से बदलाव करना जरूरी नहीं है।

गुप्ता ने कहा कि अक्सर निवेशक अपने शुरुआती लक्ष्य को भूलकर दूसरे फंड की हालिया सफलता के पीछे भागने लगते हैं। यही सोच निवेश को लक्ष्य से हटाकर सिर्फ प्रदर्शन की तुलना पर केंद्रित कर देती है।

बार-बार फंड बदलने से बढ़ सकता है जोखिम

राधिका गुप्ता ने बताया कि लगातार बेहतर प्रदर्शन की तलाश निवेशकों को एक ऐसे चक्र में फंसा सकती है, जहां वे हाल के विजेताओं वाले फंड में पैसा लगाने लगते हैं। इससे पोर्टफोलियो में जोखिम बढ़ सकता है और निवेशक अपनी मूल योजना से ज्यादा आक्रामक निवेश करने लग सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि खराब प्रदर्शन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर कोई फंड अपने उद्देश्य के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर रहा है, तो उसकी समीक्षा करना जरूरी है। लेकिन सिर्फ किसी दूसरे फंड के हालिया बेहतर प्रदर्शन के आधार पर बदलाव करना सही कारण नहीं हो सकता।

ज्यादा रिटर्न भी मांगता है सवाल

गुप्ता ने कहा कि कम प्रदर्शन समस्या है, लेकिन बहुत ज्यादा प्रदर्शन भी सवाल खड़े करता है। क्योंकि असाधारण रिटर्न के पीछे कई बार ज्यादा जोखिम छिपा हो सकता है।

उन्होंने निवेशकों को सलाह दी कि वे सिर्फ एक साल के रिटर्न को देखकर फैसला न लें। फंड का मूल्यांकन औसत, न्यूनतम और अधिकतम रिटर्न जैसे आंकड़ों और बेंचमार्क के मुकाबले प्रदर्शन के आधार पर करना चाहिए।

निवेश का फैसला लक्ष्य के आधार पर करें

राधिका गुप्ता का कहना है कि सफल निवेश का मतलब हर साल सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाला फंड चुनना नहीं है। सही तरीका यह है कि ऐसा निवेश चुना जाए जो लंबे समय में वित्तीय लक्ष्यों तक पहुंचने में मदद करे और जिसमें निवेशक अनुशासन बनाए रख सकें।

उन्होंने चेतावनी दी कि कई बार संपत्ति को नुकसान खराब प्रदर्शन से नहीं, बल्कि लगातार बेहतर प्रदर्शन की तलाश से होता है।

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