Open-Ended And Close-Ended; म्यूचुअल फंड में क्या अंतर है समझें आसान भाषा में

म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले यह समझना जरूरी है कि ओपन एंडेड और क्लोज एंडेड फंड कैसे काम करते हैं। दोनों में निवेश, पैसा निकालने की सुविधा, लिक्विडिटी और लॉक इन पीरियड को लेकर बड़ा अंतर होता है। जानिए कौन सा फंड किस तरह के निवेशकों के लिए बेहतर हो सकता है।

Advertisement
AI Generated Image

In Short

  • ओपन एंडेड फंड में निवेशक कभी भी यूनिट खरीद और बेच सकते हैं जबकि क्लोज एंडेड फंड में तय अवधि होती है।
  • ओपन एंडेड फंड में SIP और लंपसम दोनों से निवेश की सुविधा मिलती है।
  • क्लोज एंडेड फंड में निवेश केवल NFO के दौरान किया जा सकता है और पैसा मैच्योरिटी पर मिलता है।

By Gaurav Kumar:

म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोगों के लिए यह समझना जरूरी है कि कौन सा फंड कैसे काम करता है। कुछ फंड में निवेशक कभी भी पैसा लगा और निकाल सकते हैं, जबकि कुछ फंड में निवेश की सुविधा केवल एक तय समय तक ही मिलती है। इन्हीं दोनों कैटेगरी को ओपन एंडेड और क्लोज एंडेड म्यूचुअल फंड कहा जाता है। दोनों के काम करने का तरीका अलग होता है, जिसे समझना निवेश के फैसले के लिए जरूरी है।

ओपन एंडेड म्यूचुअल फंड क्या होते हैं?

ओपन एंडेड म्यूचुअल फंड ऐसे फंड होते हैं जिनमें निवेशक पूरे साल बिजनेस डेज पर कभी भी यूनिट खरीद या बेच सकते हैं। इन फंड की कोई फिक्स मैच्योरिटी डेट नहीं होती, इसलिए इनमें लिक्विडिटी ज्यादा होती है।

इन फंड में निवेशक नेट एसेट वैल्यू यानी NAV के आधार पर यूनिट खरीदते या रिडीम करते हैं। NAV हर दिन घोषित किया जाता है और यह फंड में मौजूद सिक्योरिटीज के प्रदर्शन के आधार पर बदलता रहता है।

ओपन एंडेड फंड कैसे काम करते हैं?

न्यू फंड ऑफर यानी NFO के बाद म्यूचुअल फंड कंपनी आमतौर पर करीब 5 दिन में निवेशकों को यूनिट अलॉट करती है और फंड को मार्केट में लॉन्च करती है। आमतौर पर NFO अधिकतम 15 दिनों तक खुला रहता है।

NFO खत्म होने के बाद भी निवेशक इन फंड में लगातार निवेश कर सकते हैं। इनमें SIP, लंपसम या STP के जरिए पैसा लगाया जा सकता है। फंड मैनेजर मार्केट की स्थिति और रिसर्च के आधार पर निवेश से जुड़े फैसले लेते हैं।

ओपन एंडेड फंड के फायदे क्या हैं?

ओपन एंडेड फंड का सबसे बड़ा फायदा इसकी लिक्विडिटी है। निवेशक किसी भी बिजनेस डे पर अपनी जरूरत के अनुसार यूनिट खरीद या बेच सकते हैं।इन फंड में ट्रांसपेरेंसी भी ज्यादा होती है। निवेशक फंड के पोर्टफोलियो, इसमें शामिल स्टॉक्स, पुराना प्रदर्शन और फंड मैनेजर की परफॉर्मेंस को देख सकते हैं।

इसके अलावा निवेशकों को कई विकल्प मिलते हैं। वे अपनी जरूरत और लक्ष्य के हिसाब से इक्विटी या डेट फंड में SIP, लंपसम या STP के जरिए निवेश कर सकते हैं।

ओपन एंडेड फंड को प्रोफेशनल फंड मैनेजर संभालते हैं। वे रिसर्च और मार्केट की स्थिति को देखकर निवेश से जुड़े फैसले लेते हैं, जिससे निवेशकों को खुद हर समय मार्केट पर नजर रखने की जरूरत नहीं पड़ती।

क्लोज एंडेड म्यूचुअल फंड क्या होते हैं?

क्लोज एंडेड म्यूचुअल फंड में निवेशक केवल फंड लॉन्च होने के समय यानी NFO पीरियड के दौरान ही पैसा लगा सकते हैं। इसके बाद नए निवेश की सुविधा बंद हो जाती है।

इन फंड में निवेश की एक तय अवधि होती है और मैच्योरिटी से पहले आमतौर पर पैसा निकालना संभव नहीं होता। यानी इसमें निवेशकों को तय समय तक निवेश बनाए रखना पड़ता है।

ओपन एंडेड और क्लोज एंडेड फंड में अंतर

ओपन एंडेड फंड में NFO खत्म होने के बाद भी SIP या लंपसम के जरिए निवेश किया जा सकता है, जबकि क्लोज एंडेड फंड में केवल NFO के दौरान ही निवेश किया जा सकता है।

ओपन एंडेड फंड में लिक्विडिटी ज्यादा होती है क्योंकि निवेशक कभी भी यूनिट रिडीम कर सकते हैं। वहीं क्लोज एंडेड फंड में पैसा मैच्योरिटी के समय ही निकाला जा सकता है।ओपन एंडेड फंड का एसेट बेस बदलता रहता है, जबकि क्लोज एंडेड फंड में फंड का साइज फिक्स रहता है।

ओपन एंडेड फंड में कोई लॉक इन पीरियड नहीं होता, लेकिन क्लोज एंडेड फंड में एक तय लॉक इन पीरियड होता है।ओपन एंडेड फंड की यूनिट स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट नहीं होती और ट्रेड नहीं की जा सकती। वहीं क्लोज एंडेड फंड की यूनिट एक्सचेंज पर लिस्ट होकर ट्रेड हो सकती है।

Read more!
Advertisement