Gen Z के लिए म्यूचुअल फंड क्यों है जरूरी? छोटी SIP से ऐसे बनाएं बड़ा फंड

कम उम्र में छोटी रकम से निवेश शुरू करना Gen Z के लिए आगे चलकर बड़ा फायदा बन सकता है, लेकिन म्यूचुअल फंड में सिर्फ रिटर्न नहीं, रिस्क भी जुड़ा होता है। SIP कैसे शुरू करें, किन गलतियों से बचें और पैसा लगाने से पहले क्या समझना जरूरी है? पूरी जानकारी यहां पढ़ें।

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In Short

  • कम उम्र में SIP शुरू करने से Gen Z को कंपाउंडिंग का ज्यादा समय मिलता है और छोटी रकम से भी लंबे समय में बड़ा फंड बनाया जा सकता है।
  • म्यूचुअल फंड का रिटर्न फिक्स नहीं होता, इसलिए स्कीम चुनने से पहले अपना फाइनेंशियल गोल, निवेश की अवधि और रिस्क क्षमता जरूर समझें।
  • सोशल मीडिया की सलाह पर निवेश न करें और इमरजेंसी फंड अलग रखें। बाजार गिरने पर घबराकर SIP बंद करने या पैसा निकालने से बचें।

By Gaurav Kumar:

आज की Gen Z कम उम्र से ही कमाई, खर्च और पैसे संभालने को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक है। पहली सैलरी या पॉकेट मनी आते ही खर्चों की लिस्ट लंबी हो जाती है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी जरूरी हो जाता है कि कुछ पैसा आगे के लिए कैसे बचाया जाए। सिर्फ सेविंग अकाउंट में पैसा रख देना हमेशा काफी नहीं होता,

इसलिए कई युवा अब ऐसे ऑप्शन खोज रहे हैं जहां छोटी शुरुआत के साथ पैसे को बढ़ने का मौका मिल सके। ऐसे में सवाल है कि Gen Z के लिए म्यूचुअल फंड आखिर कितना फायदेमंद हो सकता है?

Gen Z को म्यूचुअल फंड से क्या फायदे मिल सकते हैं?

  • कम उम्र में निवेश की शुरुआत: Gen Z के पास पैसे को बढ़ने के लिए ज्यादा समय होता है। जल्दी निवेश शुरू करने से लंबे समय में कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है।
  • छोटी रकम से शुरुआत: SIP के जरिए हर महीने अपने बजट के हिसाब से छोटी रकम लगाई जा सकती है। इसके लिए एक साथ बड़ी रकम जमा करने की जरूरत नहीं होती।
  • अलग-अलग गोल पूरे करने में मदद: म्यूचुअल फंड का इस्तेमाल हायर एजुकेशन, इंटरनेशनल ट्रिप, कार खरीदने, घर की डाउन पेमेंट या रिटायरमेंट जैसे गोल के लिए किया जा सकता है।
  • पैसे लगाने की आदत: हर महीने नियमित SIP करने से सेविंग और इन्वेस्टमेंट की आदत बनती है। इससे गैर-जरूरी खर्चों को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
  • एक्सपर्ट संभालते हैं पैसा: म्यूचुअल फंड का पैसा फंड मैनेजर संभालते हैं। इसलिए शुरुआत करने के लिए शेयर मार्केट की पूरी जानकारी होना जरूरी नहीं है।
  • पैसा अलग-अलग जगह लगता है: निवेश की रकम कई कंपनियों और अलग-अलग एसेट्स में लगाई जाती है। इससे पूरा पैसा किसी एक कंपनी में फंसने का खतरा कम हो सकता है।

लेकिन इन फायदों को समझने के बाद यह जानना भी जरूरी है कि म्यूचुअल फंड में आपका पैसा आखिर काम कैसे करता है?

म्यूचुअल फंड कैसे काम करता है?

म्यूचुअल फंड में कई लोगों का पैसा एक साथ जमा किया जाता है। इस रकम को फंड मैनेजर शेयर, बॉन्ड, सरकारी स्कीम और दूसरी जगहों पर निवेश करते हैं। फंड से मिलने वाला रिटर्न बाजार की चाल और चुनी गई स्कीम के प्रदर्शन पर निर्भर करता है।

इसका फायदा यह है कि निवेशक को खुद हर कंपनी और शेयर पर रोज नजर रखने की जरूरत नहीं पड़ती। निवेश से जुड़े फैसले फंड मैनेजर लेते हैं। हालांकि, एक्सपर्ट के पैसा संभालने के बाद भी नुकसान का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता।

अब सवाल है कि Gen Z बिना एक साथ बड़ी रकम लगाए SIP के जरिए निवेश की शुरुआत कैसे कर सकती है?

 

SIP से कैसे शुरू कर सकती है Gen Z?

 

SIP यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के जरिए हर महीने एक तय रकम म्यूचुअल फंड में लगाई जाती है। इससे निवेश शुरू करने के लिए एक साथ बड़ी रकम जुटाने की जरूरत नहीं पड़ती। Gen Z अपनी सैलरी, पॉकेट मनी और हर महीने के खर्च को देखकर SIP की रकम तय कर सकती है।

हर महीने तय तारीख पर पैसा निवेश होने से नियमित तौर पर पैसे लगाने की आदत बनती है। लंबे समय तक SIP जारी रखने पर कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है, यानी निवेश से मिले रिटर्न पर भी आगे रिटर्न मिलने का मौका रहता है। हालांकि, म्यूचुअल फंड से मिलने वाला रिटर्न फिक्स नहीं होता और यह बाजार की चाल पर निर्भर करता है।

लेकिन SIP शुरू करने से पहले Gen Z को किन जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए?

इन बातों का रखें ध्यान

  • जल्दी अमीर बनने का तरीका नहीं: म्यूचुअल फंड से कम समय में पैसा दोगुना होने की गारंटी नहीं मिलती। इसमें फायदा होने के साथ नुकसान भी हो सकता है।
  • रिटर्न तय नहीं होता: म्यूचुअल फंड में मिलने वाला रिटर्न फिक्स नहीं होता। बाजार गिरने पर लगाए गए पैसे की वैल्यू भी कम हो सकती है।
  • सोशल मीडिया पर भरोसा न करें: किसी वायरल वीडियो, रील या इन्फ्लुएंसर की बात सुनकर फंड नहीं चुनना चाहिए। निवेश से पहले स्कीम की सही जानकारी लेना जरूरी है।
  • घबराकर पैसा न निकालें: बाजार में गिरावट आते ही SIP रोकना या पूरा पैसा निकाल लेना नुकसान करा सकता है। फैसला अपने गोल और जरूरत के हिसाब से लेना चाहिए।
  • अपना गोल पहले तय करें: निवेश शुरू करने से पहले यह समझें कि पैसा किस काम के लिए और कितने समय तक लगाना है। साथ ही यह भी देखें कि आप कितना रिस्क उठा सकते हैं।
  • इमरजेंसी फंड अलग रखें: अचानक बीमारी, नौकरी जाने या किसी बड़े खर्च के लिए अलग पैसा रखना जरूरी है। जरूरत का पूरा पैसा म्यूचुअल फंड में नहीं लगाना चाहिए।
  • छोटी शुरुआत बनाएगी अच्छी आदत: Gen Z के लिए म्यूचुअल फंड का फायदा सिर्फ रिटर्न कमाना नहीं है। कम उम्र से छोटी रकम लगाना, नियमित SIP करना और लंबे समय तक निवेश बनाए रखना पैसे संभालने की अच्छी आदत बना सकता है।

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