सही फंड चुनने से पहले इन 6 बातों का रखें ध्यान, वरना निवेश में हो सकता है नुकसान
म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय ज्यादातर लोगों की नजर संभावित रिटर्न पर रहती है, लेकिन सिर्फ रिटर्न देखकर पैसा लगाना सही फैसला नहीं हो सकता। फंड चुनते समय कुछ ऐसी जरूरी बातें हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना आपके निवेश पर भारी पड़ सकता है। जानिए निवेश से पहले किन बातों का ध्यान रखें।

In Short
- म्यूचुअल फंड चुनने से पहले निवेश की अवधि और जोखिम समझें।
- ज्यादा YTM का मतलब निश्चित रिटर्न की गारंटी नहीं है।
- एक्सपेंस रेश्यो और क्रेडिट क्वालिटी की जांच करना जरूरी है।
म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले सही फंड का चुनाव करना बेहद जरूरी है। कई बार निवेशक बिना पूरी जानकारी के किसी फंड में पैसा लगा देते हैं। ऐसे में निवेश से पहले कुछ जरूरी बातों को समझना फायदेमंद हो सकता है। फंड का पिछला प्रदर्शन, एक्सपेंस रेश्यो और जोखिम जैसी चीजों पर ध्यान देना जरूरी है।
निवेश की अवधि पहले तय करें
म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने से पहले यह तय करना जरूरी है कि आप कितने समय के लिए निवेश करना चाहते हैं। निवेशकों को सबसे पहले अपनी निवेश अवधि पर ध्यान देना चाहिए। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि उन्हें किस तरह के फंड में निवेश करना है।
एक्सपेंस रेश्यो को नजरअंदाज न करें
किसी भी म्यूचुअल फंड को चुनते समय उसका एक्सपेंस रेश्यो जरूर देखना चाहिए। यह फंड के निवेश से जुड़ा एक अहम पहलू है। फंड का एक्सपेंस रेश्यो उसकी निवेश अवधि से बहुत ज्यादा नहीं होना चाहिए। इसलिए निवेशकों को पैसा लगाने से पहले इस पर ध्यान देना चाहिए।
क्रेडिट क्वालिटी की जांच जरूरी
अगर आप डेट म्यूचुअल फंड में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो उसकी क्रेडिट क्वालिटी जरूर जांचें। खासतौर पर कम रेटिंग वाले पेपर में निवेश करने वाले फंड को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। निवेशकों को ऐसे फंड से बचने की सलाह दी जाती है, जिनमें कम रेटिंग वाले पेपर में ज्यादा निवेश किया गया हो।
YTM को देखकर न करें निवेश का फैसला
डेट म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय YTM यानी यील्ड टू मैच्योरिटी को भी समझना जरूरी है। YTM मौजूदा पोर्टफोलियो की संभावित रनिंग यील्ड बताती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि निवेशक को निश्चित रूप से उतना ही रिटर्न मिलेगा।
इसलिए सिर्फ YTM देखकर किसी फंड को चुनना सही तरीका नहीं है। निवेशकों को यह समझना चाहिए कि संभावित यील्ड और निश्चित रिटर्न में अंतर होता है।
एक्सपेंस रेश्यो का रिटर्न पर असर
म्यूचुअल फंड का एक्सपेंस रेश्यो निवेशकों के रिटर्न को प्रभावित कर सकता है। फंड की लागत ज्यादा होने पर निवेशक के हाथ आने वाला संभावित रिटर्न कम हो सकता है।
यही वजह है कि किसी फंड में निवेश करने से पहले उसके एक्सपेंस रेश्यो को समझना जरूरी है। निवेशकों को यह देखना चाहिए कि फंड की लागत उनके निवेश पर किस तरह असर डाल सकती है।
एकमुश्त निवेश से पहले जोखिम समझें
म्यूचुअल फंड में एकमुश्त पैसा लगाने की योजना बना रहे निवेशकों को खास सावधानी बरतनी चाहिए। निवेश से पहले उस फंड में चरणबद्ध तरीके से पैसा लगाने पर विचार करना चाहिए।
इससे निवेशक एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय अलग-अलग चरणों में निवेश कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, म्यूचुअल फंड चुनते समय केवल संभावित रिटर्न पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। निवेश की अवधि, एक्सपेंस रेश्यो, क्रेडिट क्वालिटी, YTM और निवेश के तरीके जैसे पहलुओं को समझना भी जरूरी है। इन बातों को ध्यान में रखकर निवेशक फंड चुनने का फैसला कर सकते हैं।