म्यूचुअल फंड में पुराने रिटर्न के भरोसे न चुनें फंड, इन जरूरी बातों को भी करें चेक

म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय सिर्फ पुराने रिटर्न को देखकर फैसला लेना जोखिम भरा हो सकता है। निवेश से पहले फंड की कैटेगरी, जोखिम, फंड मैनेजर की रणनीति, खर्च और अपने वित्तीय लक्ष्यों को समझना जरूरी है। सही जानकारी के साथ लिया गया फैसला लंबे समय में बेहतर निवेश अनुभव दे सकता है।

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In Short

  • सिर्फ पुराने रिटर्न देखकर म्यूचुअल फंड चुनना गलत फैसला हो सकता है, भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं होती।
  • निवेश से पहले फंड की कैटेगरी, जोखिम, फंड मैनेजर और निवेश रणनीति को समझना जरूरी।
  • Expense Ratio, पोर्टफोलियो और अपने वित्तीय लक्ष्य के हिसाब से फंड चुनने से बेहतर निवेश फैसला लिया जा सकता है।

By Sonam:

म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय कई लोग सिर्फ पुराने रिटर्न यानी Past Return को देखकर फंड चुन लेते हैं। अगर किसी फंड ने पिछले कुछ सालों में अच्छा प्रदर्शन किया है तो निवेशक उसे बेहतर मान लेते हैं। लेकिन सिर्फ पुराना रिटर्न किसी फंड के भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं होता। बाजार की स्थिति, फंड मैनेजर की रणनीति और निवेश का तरीका समय के साथ बदल सकता है।

फंड का उद्देश्य समझना जरूरी

किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश से पहले यह समझना जरूरी है कि फंड किस कैटेगरी का है और उसका उद्देश्य क्या है। इक्विटी फंड, डेट फंड और हाइब्रिड फंड सभी का जोखिम और रिटर्न अलग-अलग होता है। निवेशक को अपनी जरूरत, लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता के हिसाब से फंड चुनना चाहिए।

फंड मैनेजर और निवेश रणनीति पर दें ध्यान

फंड मैनेजर की भूमिका म्यूचुअल फंड में काफी महत्वपूर्ण होती है। निवेश से पहले यह देखना चाहिए कि फंड को कौन मैनेज कर रहा है और उसकी निवेश रणनीति कैसी है। लंबे समय में स्थिर प्रदर्शन करने वाले फंड की रणनीति को समझना ज्यादा जरूरी होता है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

Expense Ratio और अन्य चार्ज भी देखें

म्यूचुअल फंड में खर्च का असर निवेश के रिटर्न पर पड़ता है। इसलिए निवेश से पहले Expense Ratio, एग्जिट लोड और अन्य शुल्क की जानकारी जरूर लें। कम खर्च वाला फंड लंबे समय में निवेशक के लिए फायदेमंद हो सकता है।

सिर्फ रिटर्न नहीं रिस्क भी समझें

कई बार ज्यादा रिटर्न देने वाले फंड में जोखिम भी ज्यादा हो सकता है। इसलिए निवेशकों को फंड के उतार-चढ़ाव, पोर्टफोलियो में शामिल कंपनियों और पिछले प्रदर्शन के साथ-साथ जोखिम स्तर को भी समझना चाहिए।

म्यूचुअल फंड चुनते समय सिर्फ Past Return देखकर फैसला लेना सही तरीका नहीं है। निवेश का लक्ष्य, जोखिम क्षमता, फंड की रणनीति और लागत जैसे सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर ही निवेश का फैसला करना चाहिए।


 

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