Large Cap, Mid Cap या Small Cap म्यूचुअल फंड! नए निवेशकों के लिए कौन सा ऑप्शन बेहतर? जानें कहां होगी मोटी कमाई
शेयर बाजार में कदम रखने वाले नए निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है कि पैसा Large Cap, Mid Cap या Small Cap में कहां लगाया जाए। तीनों कैटेगरी में रिटर्न और जोखिम अलग-अलग होता है। सही जानकारी के बिना निवेश करना नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए इनके अंतर को समझना जरूरी है।

In Short
- Large Cap, Mid Cap और Small Cap कंपनियों में होता है जोखिम और रिटर्न का बड़ा अंतर
- नए निवेशकों के लिए शुरुआत में कम जोखिम वाले विकल्पों को समझना जरूरी
- SIP और सही फंड कैटेगरी के जरिए निवेश की शुरुआत करना हो सकता है बेहतर तरीका
mutual funds for new investors: जब कोई नया निवेशक शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश शुरू करता है, तो उसके सामने सबसे बड़ा सवाल होता है कि पैसा लार्ज कैप, मिड कैप या स्मॉल कैप में लगाया जाए। सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसी कंपनियों के बारे में बताया जाता है जो कम समय में बड़ा रिटर्न देने का दावा करती हैं, लेकिन इनमें जोखिम भी काफी ज्यादा हो सकता है।
इसलिए निवेश करने से पहले यह समझना जरूरी है कि इन तीनों कैटेगरी में अंतर क्या है और नए निवेशक के लिए कौन सा विकल्प बेहतर हो सकता है।
मार्केट कैप के आधार पर तय होती है कैटेगरी
किसी कंपनी की कुल बाजार कीमत को मार्केट कैपिटलाइजेशन यानी मार्केट कैप कहा जाता है। इसका मतलब है कंपनी के कुल शेयरों की संख्या को शेयर की मौजूदा कीमत से गुणा करने पर जो वैल्यू आती है।
भारतीय बाजार में सेबी ने कंपनियों को उनके आकार के हिसाब से तीन हिस्सों में बांटा है।
लार्ज कैप में देश की टॉप 100 कंपनियां आती हैं। ये कंपनियां बड़ी, पुरानी और बाजार में अपनी मजबूत पहचान रखने वाली होती हैं। इनकी आर्थिक स्थिति आमतौर पर मजबूत होती है। रिलायंस, टीसीएस और एचडीएफसी बैंक जैसी कंपनियां इसके उदाहरण हैं।
मिड कैप में 101 से 250 रैंक वाली कंपनियां शामिल होती हैं। ये कंपनियां आकार में लार्ज कैप से छोटी होती हैं, लेकिन इनमें आगे बढ़ने की संभावना ज्यादा होती है।
वहीं स्मॉल कैप में 251वीं रैंक के बाद आने वाली कंपनियां शामिल होती हैं। इन कंपनियों में तेजी से बढ़ने की क्षमता हो सकती है, लेकिन इनके साथ जोखिम भी ज्यादा जुड़ा होता है।
लार्ज कैप में स्थिरता, स्मॉल कैप में ज्यादा जोखिम
तीनों कैटेगरी में सबसे बड़ा अंतर इनके जोखिम और बढ़ने की क्षमता का होता है। लार्ज कैप कंपनियों में उतार-चढ़ाव आमतौर पर कम होता है और ये निवेश को ज्यादा स्थिरता देती हैं।
मिड कैप कंपनियों में विकास की संभावना ज्यादा होती है, लेकिन इनके भाव में बदलाव भी ज्यादा देखने को मिल सकता है। वहीं स्मॉल कैप कंपनियों में सबसे ज्यादा तेजी की संभावना होती है, लेकिन बाजार गिरने पर इनमें गिरावट भी ज्यादा हो सकती है।
नए निवेशक कैसे करें शुरुआत?
अगर कोई व्यक्ति शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में नया है, तो उसे शुरुआत में पूरा पैसा स्मॉल कैप में लगाने से बचना चाहिए। नए निवेशकों के लिए लार्ज कैप एक मजबूत आधार बनाने में मदद कर सकता है।
जब निवेशक को बाजार की समझ आने लगे, तब वह मिड कैप को अपने निवेश में शामिल कर सकता है। वहीं स्मॉल कैप में निवेश करने से पहले अपनी जोखिम लेने की क्षमता को समझना जरूरी है।
फ्लेक्सी कैप और एसआईपी से कर सकते हैं शुरुआत
जो नए निवेशक लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप को लेकर असमंजस में हैं, वे फ्लेक्सी कैप या लार्ज एंड मिड कैप फंड्स से शुरुआत कर सकते हैं। इनमें फंड मैनेजर बाजार की स्थिति के अनुसार अलग-अलग कैटेगरी में निवेश को बांटते हैं।
इसके अलावा एक साथ पूरा पैसा लगाने के बजाय एसआईपी यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान के जरिए हर महीने थोड़ा-थोड़ा निवेश करना बेहतर तरीका हो सकता है। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम करने में मदद मिल सकती है।
शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है। इसलिए निवेश से पहले अपनी जरूरत और जोखिम क्षमता को समझना जरूरी है।