डेट फंड में निवेश से पहले इन 3 बातों को जरूर देखें एक्सपर्ट ने बताया सही तरीका

डेट फंड में निवेश करते समय सिर्फ रिटर्न देखकर फैसला करना सही नहीं है। ब्याज दरों का असर बॉन्ड कीमतों और फंड के प्रदर्शन पर पड़ सकता है। Anand Rathi Wealth की म्यूचुअल फंड हेड श्वेता रजनी ने बताया कि सही डेट फंड चुनने के लिए Duration Net Yield और Credit Quality को समझना जरूरी है।

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डेट फंड में निवेश से पहले रखें इन 3 बातों का ध्यान
डेट फंड में निवेश से पहले रखें इन 3 बातों का ध्यान

In Short

  • डेट फंड चुनते समय निवेश अवधि के हिसाब से फंड की Duration का मिलान करना जरूरी है ताकि Interest Rate Risk का असर कम हो सके।
  • एक्सपर्ट के मुताबिक पुराने रिटर्न की जगह Net Yield और Yield to Maturity यानी YTM को देखकर निवेश का फैसला करना चाहिए।
  • फंड की Credit Quality जांचना जरूरी है क्योंकि डेट फंड में Interest Rate Risk Credit Risk और Duration Risk जैसे पहलू जुड़े होते हैं।

By Gaurav Kumar:

डेट फंड में निवेश करने वाले लोगों के लिए सिर्फ रिटर्न देखना काफी नहीं है। ब्याज दरों का चक्र यानी Interest Rate Cycle, बॉन्ड की कीमतों में बदलाव और फंड की Duration जैसी चीजें निवेश के नतीजों पर सीधा असर डाल सकती हैं। ऐसे में सही डेट फंड चुनने के लिए निवेशकों को कुछ अहम बातों को समझना जरूरी है।

बिजनेस टुडे के एक शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Anand Rathi Wealth Limited की म्यूचुअल फंड हेड श्वेता रजनी ने बताया कि डेट फंड चुनते समय निवेशकों को तीन से चार जरूरी फैक्टर जरूर देखने चाहिए। उन्होंने कहा कि निवेश की अवधि, फंड की Duration, Net Yield और Credit Quality को समझना बेहद जरूरी है।

निवेश की अवधि और फंड की Duration का रखें तालमेल

श्वेता रजनी ने बताया कि सबसे पहले निवेशकों को अपनी Investment Horizon यानी कितने समय के लिए पैसा लगाना है यह तय करना चाहिए और उसी हिसाब से डेट फंड की Duration देखनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि हर डेट फंड की फैक्टशीट में Average Maturity और Modified Duration की जानकारी दी जाती है। अगर किसी निवेशक के पास करीब दो साल का समय है तो उसे ऐसे फंड को चुनना चाहिए जिसकी Duration भी लगभग दो साल के आसपास हो। इससे ब्याज दरों में बदलाव का असर पोर्टफोलियो पर कम करने में मदद मिल सकती है।

ब्याज दर बढ़ने पर बॉन्ड कीमतों पर पड़ता है असर

एक्सपर्ट ने आसान उदाहरण से समझाया कि अगर किसी निवेशक ने 100 रुपये का बॉन्ड खरीदा है जिस पर 7 फीसदी ब्याज मिल रहा है और बाद में बाजार में उसी अवधि का नया बॉन्ड 7.5 फीसदी ब्याज पर उपलब्ध हो जाता है तो पुराना बॉन्ड कम आकर्षक हो जाएगा।

ऐसी स्थिति में पुराने बॉन्ड की बाजार कीमत गिर सकती है। यानी ब्याज दरों और बॉन्ड कीमतों के बीच उल्टा संबंध होता है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो पुराने बॉन्ड की कीमतों पर दबाव आ सकता है।

Past Return नहीं Net Yield और YTM पर दें ध्यान

श्वेता रजनी ने कहा कि डेट फंड में निवेश करते समय सिर्फ पिछले रिटर्न को देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। निवेशकों को फंड की फैक्टशीट में दिए गए Net Yield या Yield to Maturity यानी YTM को देखना चाहिए।

यह बताता है कि फंड ने जिन बॉन्ड और सिक्योरिटीज में निवेश किया है उनसे कितनी Yield या ब्याज आय मिल रही है। इससे निवेशकों को अंदाजा मिलता है कि मौजूदा स्थिति में फंड से किस तरह के रिटर्न की उम्मीद की जा सकती है।

Credit Quality भी है बड़ा फैक्टर

उन्होंने कहा कि निवेशकों को फंड के Credit Breakup पर भी नजर रखनी चाहिए। बेहतर Credit Quality वाले बॉन्ड में निवेश करने वाले फंड आमतौर पर कम जोखिम वाले माने जाते हैं।

डेट फंड को पूरी तरह जोखिम मुक्त निवेश नहीं समझना चाहिए क्योंकि इसमें Interest Rate Risk Credit Risk और Duration Risk जैसे पहलू जुड़े होते हैं। इसलिए निवेश से पहले फंड की Duration Net Yield और Credit Quality को समझकर फैसला लेना जरूरी है। सही जानकारी के साथ चुना गया डेट फंड निवेशकों को अपने वित्तीय लक्ष्यों के करीब पहुंचने में मदद कर सकता है।

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