अपने Financial Goals के लिए Best SIP Funds कैसे चुनें? जानें सही एसआईपी चुनने का आसान तरीका
SIP में निवेश सिर्फ हर महीने पैसा लगाने तक सीमित नहीं है। सही Mutual Fund चुनने में आपका Financial Goal, निवेश की अवधि और Risk सहने की क्षमता अहम भूमिका निभाती है। Finfix की फाउंडर Prabhlin Bajpai ने बताया कि अलग-अलग समय के Goals के लिए SIP की Strategy कैसे बदल सकती है।

In Short
- Finfix की फाउंडर Prabhlin Bajpai के मुताबिक SIP का चुनाव Financial Goal और Investment Period के हिसाब से होना चाहिए।
- 15 साल जैसे Long-Term Goal के लिए Equity Mutual Funds को ज्यादा प्राथमिकता दी जा सकती है।
- पांच साल के Goal में Hybrid Funds या Large Cap Funds के जरिए Risk कम रखने पर ध्यान दिया जा सकता है।
SIP यानी Systematic Investment Plan को अक्सर Mutual Fund में निवेश का आसान तरीका माना जाता है। लेकिन हर निवेशक के लिए एक ही तरह की SIP रणनीति सही नहीं हो सकती। बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Finfix की फाउंडर Prabhlin Bajpai ने कहा कि, SIP में पैसा लगाने से पहले निवेशक को अपना Financial Goal, उस लक्ष्य तक पहुंचने का समय और बाजार के उतार-चढ़ाव को सहने की अपनी क्षमता समझनी चाहिए।
उनका कहना है कि SIP का फैसला इस आधार पर होना चाहिए कि आपका Target क्या है, निवेश किस Goal के लिए किया जा रहा है और आपके पास उस Goal को पूरा करने के लिए कितना समय है।
लंबा समय है तो Equity पर ज्यादा फोकस
अगर कोई निवेशक Retirement के लिए पैसा जुटा रहा है और उसके पास करीब 15 साल का समय है, तो SIP का बड़ा हिस्सा Equity Mutual Funds में रखा जा सकता है।
Prabhlin Bajpai के मुताबिक, ऐसे Long-Term Goal में Equity Mutual Funds को प्राथमिकता दी जा सकती है। इसके साथ कुछ Allocation Commodities में और अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा Debt में रखा जा सकता है।
यानी लंबी अवधि वाले निवेशक ज्यादा Market Volatility को सहने की स्थिति में हो सकते हैं, इसलिए उनके Portfolio में Equity की हिस्सेदारी ज्यादा हो सकती है।
पांच साल का Goal है तो Strategy बदल सकती है
अगर निवेश का लक्ष्य सिर्फ पांच साल दूर है, तो वही Equity-heavy Strategy सही नहीं मानी जाएगी। ऐसे मामलों में निवेशक Hybrid Funds की तरफ जा सकते हैं।
Equity में ही बने रहना हो तो Mid Cap और Small Cap के मुकाबले Large Cap Funds को ज्यादा प्राथमिकता दी जा सकती है। इसका मकसद Portfolio में जोखिम को कुछ हद तक कम करना है।
SIP सिर्फ Equity के लिए नहीं
अक्सर निवेशक SIP को केवल Equity Mutual Funds और Rupee Cost Averaging से जोड़कर देखते हैं। लेकिन Bajpai के मुताबिक, SIP का इस्तेमाल कई तरह के Asset Classes में किया जा सकता है।
निवेशक Debt Funds, Liquid Funds और Gold-linked Products में भी SIP कर सकते हैं। यानी SIP केवल शेयर बाजार में धीरे-धीरे पैसा लगाने का तरीका नहीं, बल्कि Portfolio बनाने का एक व्यापक तरीका भी हो सकता है।
Volatility सह पाएंगे या नहीं, पहले तय करें
Bajpai ने निवेशकों की Risk Tolerance को भी अहम बताया। कई निवेशक अच्छे Returns देखकर मान लेते हैं कि वे बाजार का उतार-चढ़ाव आसानी से सह लेंगे, लेकिन असली परीक्षा गिरावट या लंबे समय तक बाजार में सुस्ती के दौरान होती है।
उन्होंने भारतीय बाजार के पिछले करीब 23 महीनों के Range-bound Movement और बीच-बीच में आए Corrections का उदाहरण दिया। ऐसे दौर में निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।
इसलिए SIP शुरू करने से पहले यह तय करना जरूरी है कि आप कितनी Volatility सह सकते हैं। सबसे पहले अपना Goal तय करें, फिर Time Horizon और Risk के हिसाब से सही Asset Class चुनें।