SIP से करोड़पति बनने का फॉर्मूला: ₹5,000 महीना लगाकर कैसे बन सकता है ₹1 करोड़ का फंड
हर महीने ₹5,000 की SIP करके ₹1 करोड़ का फंड बनाने में कितना समय लग सकता है? इसका जवाब मिलने वाले रिटर्न पर निर्भर करता है। 10%, 12% और 15% सालाना अनुमानित रिटर्न पर लक्ष्य तक पहुंचने का समय काफी बदल जाता है। जानिए इसके पीछे का पूरा कैलकुलेशन।

In Short
- ₹5,000 की मासिक SIP से ₹1 करोड़ का फंड बनाने का कैलकुलेशन
- 10% रिटर्न पर लक्ष्य तक पहुंचने में लग सकते हैं करीब 30 साल
- रिटर्न बढ़ने पर ₹1 करोड़ तक पहुंचने का समय हो सकता है काफी कम
अगर आप हर महीने सिर्फ ₹5,000 की SIP करते हैं, तो क्या इससे ₹1 करोड़ का फंड बनाया जा सकता है? जवाब है हां, लेकिन इसमें सबसे बड़ी भूमिका समय और मिलने वाले रिटर्न की होगी। रिटर्न जितना ज्यादा होगा, ₹1 करोड़ तक पहुंचने में उतना ही कम समय लग सकता है। आइए 10%, 12% और 15% सालाना अनुमानित रिटर्न के हिसाब से इसका कैलकुलेशन समझते हैं।
10% रिटर्न पर कब बनेगा ₹1 करोड़?
अगर आप हर महीने ₹5,000 की SIP करते हैं और निवेश पर औसतन 10% सालाना रिटर्न मिलता है, तो ₹1 करोड़ का फंड बनाने में करीब 30 साल लग सकते हैं।
इस अवधि में आपका कुल निवेश करीब ₹18 लाख होगा। बाकी रकम निवेश पर मिलने वाले अनुमानित रिटर्न से बनेगी। यानी यहां लंबे समय तक निवेश जारी रखने का असर साफ दिखाई देता है।
12% रिटर्न पर कितना लगेगा समय?
अगर इसी ₹5,000 की मासिक SIP पर सालाना औसतन 12% रिटर्न मिलता है, तो ₹1 करोड़ तक पहुंचने में करीब 27 साल लग सकते हैं।
इस दौरान आपकी जेब से कुल निवेश करीब ₹16 लाख होगा। यानी 10% के मुकाबले 12% का अनुमानित रिटर्न ₹1 करोड़ के लक्ष्य तक पहुंचने का समय करीब तीन साल कम कर सकता है।
15% रिटर्न पर कितने साल में ₹1 करोड़?
अगर ₹5,000 की SIP पर औसतन 15% सालाना रिटर्न मिलता है, तो ₹1 करोड़ का लक्ष्य करीब 23 साल में पूरा हो सकता है।
इस अवधि में कुल निवेश करीब ₹13 लाख होगा। बाकी रकम अनुमानित रिटर्न से तैयार होगी। हालांकि 15% रिटर्न केवल कैलकुलेशन के लिए एक अनुमान है और इसे तय रिटर्न नहीं माना जा सकता।
रिटर्न में अंतर से बदल जाता है पूरा हिसाब
₹5,000 की SIP के उदाहरण में 10% रिटर्न पर ₹1 करोड़ तक पहुंचने में करीब 30 साल लगते हैं। वहीं 12% पर यह समय घटकर करीब 27 साल और 15% पर करीब 23 साल रह जाता है।
यह कैलकुलेशन दिखाता है कि लंबे समय के निवेश में रिटर्न और समय दोनों का बड़ा असर होता है। म्यूचुअल फंड का रिटर्न बाजार से जुड़ा होता है, इसलिए वास्तविक रिटर्न और ₹1 करोड़ तक पहुंचने का समय अलग हो सकता है।