आपके पोर्टफोलियो में कितने म्यूचुअल फंड होने चाहिए? एक्सपर्ट ने बताया ओवरलैप से कैसे बचें
म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले कई लोग बेहतर रिटर्न की उम्मीद में लगातार नई स्कीम्स खरीदते रहते हैं। लेकिन क्या ज्यादा फंड रखने से आपका पैसा तेजी से बढ़ता है? Flexi Capital के मैनेजिंग डायरेक्टर नासिर सलीम ने निवेशकों की एक ऐसी गलती बताई है, जो लंबी अवधि में नुकसान पहुंचा सकती है।

In Short
- म्यूचुअल फंड में ज्यादा स्कीम्स रखना निवेशकों के लिए फायदे के बजाय नुकसान का सौदा बन सकता है।
- कई अलग-अलग म्यूचुअल फंड में एक ही कंपनियों के शेयर होने से पोर्टफोलियो में ओवरलैप बढ़ सकता है।
- मार्केट एक्सपर्ट नासिर सलीम ने निवेशकों को सही फंड चुनने और समय-समय पर पोर्टफोलियो की समीक्षा करने की सलाह दी है।
म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोग अक्सर बेहतर रिटर्न के चक्कर में कई अलग-अलग स्कीम्स में पैसा लगा देते हैं। खासकर जब कोई नया फंड लॉन्च होता है, तो निवेशक उसमें भी निवेश करने लगते हैं। लेकिन क्या पोर्टफोलियो में ज्यादा म्यूचुअल फंड रखने से वाकई फायदा होता है? बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए Flexi Capital के मैनेजिंग डायरेक्टर नासिर सलीम ने निवेशकों को सावधान किया है। उनका कहना है कि जरूरत से ज्यादा फंड रखने से बेहतर रिटर्न मिलने के बजाय निवेश का फायदा कम हो सकता है।
पोर्टफोलियो में कितने म्यूचुअल फंड होने चाहिए?
Flexi Capital के मैनेजिंग डायरेक्टर नासिर सलीम के मुताबिक, निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में 4 से 6 म्यूचुअल फंड से ज्यादा नहीं रखने चाहिए। कई निवेशकों के पास 10, 20 या यहां तक कि 25 अलग-अलग स्कीम्स होती हैं। उन्हें लगता है कि इससे उनका पैसा अलग-अलग जगह निवेश हो रहा है और जोखिम कम होगा। लेकिन असल में कई फंड एक ही तरह के शेयरों में निवेश करते हैं।
ज्यादा फंड रखने से क्या है नुकसान?
नासिर सलीम का कहना है कि जरूरत से ज्यादा डायवर्सिफिकेशन निवेश के लिए नुकसानदायक हो सकता है। कई म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो में एक ही कंपनियों के शेयर मौजूद होते हैं। ऐसे में अलग-अलग स्कीम्स खरीदने के बावजूद निवेशक का पैसा उन्हीं शेयरों में लगा रहता है।
इससे निवेशकों को लगता है कि उनका पोर्टफोलियो काफी डायवर्सिफाइड है, जबकि हकीकत में फंड्स की होल्डिंग्स आपस में ओवरलैप कर रही होती हैं। इसका असर रिटर्न पर पड़ सकता है।
कैसे बनाएं बेहतर म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो?
उनके मुताबिक, निवेशकों को ऐसा पोर्टफोलियो बनाना चाहिए जिसमें हर फंड का अलग मकसद हो। इसके लिए एक पैसिव फंड, एक या दो एक्टिव फंड और सीमित सेक्टोरल या थीमैटिक फंड रखे जा सकते हैं।
इस रणनीति में ब्रॉड मार्केट और फ्लेक्सी-कैप फंड पोर्टफोलियो का मुख्य हिस्सा हो सकते हैं, जबकि सेक्टोरल फंड में सीमित निवेश किया जा सकता है।
हर 6 महीने में करें पोर्टफोलियो की समीक्षा
नासिर सलीम ने निवेशकों को पोर्टफोलियो का एक्स-रे कराने की भी सलाह दी है। इसके जरिए पता लगाया जा सकता है कि अलग-अलग फंड किन शेयरों में निवेश कर रहे हैं।
उनके मुताबिक, निवेशकों को हर छह महीने में अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर सेक्टोरल फंड में बदलाव भी किया जा सकता है। लंबी अवधि में वेल्थ बनाने के लिए ज्यादा स्कीम्स खरीदने के बजाय सही फंड चुनना और निवेश में अनुशासन बनाए रखना ज्यादा जरूरी है।