Small Cap से Sectoral Funds तक: High Risk Mutual Funds में क्यों बढ़ रही निवेशकों की दिलचस्पी
Mutual Fund में निवेश करते समय Riskometer सबसे अहम संकेतकों में से एक होता है। कुछ फंड "High" या "Very High" रिस्क कैटेगरी में आते हैं, क्योंकि इनमें इक्विटी, छोटे शेयरों या किसी खास सेक्टर में ज्यादा निवेश होता है। ऐसे फंड ज्यादा रिटर्न का मौका दे सकते हैं, लेकिन इनमें बाजार के उतार-चढ़ाव का असर भी ज्यादा होता है।

In Short
- High Risk Funds में उतार-चढ़ाव ज्यादा हो सकता है।
- Small Cap, Mid Cap और Sectoral Funds इस कैटेगरी में आते हैं।
- निवेश से पहले Riskometer और निवेश अवधि समझना जरूरी है।
Mutual Fund में निवेश करने वाले कई लोगों ने स्कीम की जानकारी देखते समय Riskometer पर "High" या "Very High" लिखा देखा होगा। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि क्या ये फंड बहुत ज्यादा जोखिम वाले हैं या इनमें निवेश करना सही नहीं है।
दरअसल, High Risk Mutual Funds वे स्कीम होती हैं, जिनमें निवेश की वैल्यू बाजार की हलचल के कारण तेजी से ऊपर-नीचे हो सकती है। आमतौर पर ऐसे फंड में इक्विटी एक्सपोजर ज्यादा होता है, छोटे और तेजी से बढ़ने वाली कंपनियों में निवेश होता है या किसी खास सेक्टर पर फोकस किया जाता है।
High Risk Mutual Funds में जोखिम क्यों ज्यादा होता है
Mutual Fund का जोखिम कई कारणों से बढ़ सकता है। सबसे बड़ा कारण होता है इक्विटी में ज्यादा निवेश। शेयर बाजार में कंपनियों की कीमतें बाजार की स्थिति, आर्थिक बदलाव और अन्य कारणों से बदलती रहती हैं।
इसके अलावा, अगर कोई फंड Small Cap कंपनियों में निवेश करता है, तो उसमें उतार-चढ़ाव ज्यादा हो सकता है। छोटी कंपनियों में ग्रोथ की संभावना ज्यादा होती है, लेकिन बाजार खराब होने पर इनके शेयरों में तेज गिरावट भी आ सकती है।
Sectoral और Thematic Funds में भी जोखिम ज्यादा होता है, क्योंकि इनमें निवेश किसी एक सेक्टर या थीम तक सीमित रहता है। अगर वह सेक्टर अच्छा प्रदर्शन करता है तो फायदा हो सकता है, लेकिन विपरीत परिस्थितियों में नुकसान का असर भी ज्यादा हो सकता है।
Riskometer कैसे करता है मदद
निवेशकों को फंड का जोखिम समझाने के लिए SEBI ने Mutual Fund Riskometer की व्यवस्था की है। इसमें Low से लेकर Very High तक जोखिम स्तर दिखाया जाता है।
Riskometer फंड के पोर्टफोलियो, एसेट अलोकेशन और निवेश की प्रकृति के आधार पर तैयार किया जाता है। हालांकि, सिर्फ Riskometer देखकर निवेश का फैसला नहीं लेना चाहिए। निवेश का लक्ष्य, समय अवधि और अपनी जोखिम क्षमता को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
कौन से Mutual Funds High Risk कैटेगरी में आते हैं
Small Cap Funds:
Small Cap Funds छोटी कंपनियों में निवेश करते हैं। इनमें लंबी अवधि में ग्रोथ की संभावना हो सकती है, लेकिन कम समय में इनमें ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
Mid Cap Funds:
Mid Cap Funds मध्यम आकार की कंपनियों में निवेश करते हैं। ये कंपनियां ग्रोथ के दौर में होती हैं, लेकिन बाजार में बदलाव के दौरान इनमें भी ज्यादा उतार-चढ़ाव आ सकता है।
Sectoral और Thematic Funds:
ये फंड किसी एक सेक्टर या थीम पर केंद्रित होते हैं। जैसे हेल्थकेयर, टेक्नोलॉजी या PSU सेक्टर। इनका प्रदर्शन सीधे उस सेक्टर की स्थिति पर निर्भर करता है।
क्या ज्यादा जोखिम का मतलब ज्यादा रिटर्न है?
कई निवेशकों को लगता है कि High Risk Mutual Funds हमेशा ज्यादा रिटर्न देंगे, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। ज्यादा जोखिम का मतलब सिर्फ इतना है कि निवेश की वैल्यू में ज्यादा उतार-चढ़ाव हो सकता है।
किसी फंड का प्रदर्शन बाजार की स्थिति, पोर्टफोलियो और निवेश की अवधि पर निर्भर करता है। इसलिए सिर्फ ज्यादा रिटर्न की उम्मीद में निवेश करने के बजाय यह समझना जरूरी है कि आप कितना जोखिम उठा सकते हैं और आपका निवेश लक्ष्य क्या है।
High Risk Funds लंबी अवधि के निवेशकों के लिए पोर्टफोलियो का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन निवेश से पहले रिस्क, समय सीमा और वित्तीय लक्ष्य को समझना जरूरी है।