FD या Debt Mutual Fund: कहां मिलेगा बेहतर रिटर्न और किसमें है कम जोखिम?

FD में तय रिटर्न मिलता है, जबकि डेट म्यूचुअल फंड बाजार के साथ बदल सकता है। दोनों में टैक्स, जोखिम और पैसा निकालने के नियम भी अलग हैं। ऐसे में आपकी बचत के लिए कौन-सा विकल्प बेहतर रहेगा? निवेश से पहले दोनों का पूरा अंतर और सही चुनाव यहां समझिए।

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In Short

  • FD में ब्याज और मैच्योरिटी रकम पहले से तय होती है, जबकि डेट म्यूचुअल फंड का रिटर्न बाजार की स्थिति पर निर्भर करता है।
  • समय से पहले FD तोड़ने पर पेनल्टी लग सकती है, जबकि कुछ डेट फंड में रकम निकालने पर एग्जिट लोड देना पड़ता है।
  • तय रिटर्न और कम जोखिम चाहने वालों के लिए FD, जबकि थोड़ा जोखिम लेकर बेहतर रिटर्न चाहने वालों के लिए डेट फंड विकल्प हो सकता है।

By Gaurav Kumar:

FD vs Debt Mutual Fund: अपनी बचत को सुरक्षित रखने के साथ अच्छा रिटर्न पाने के लिए लोग अक्सर फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD और Debt Mutual Fund में से किसी एक को चुनते हैं। दोनों को निवेश के अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प माना जाता है, लेकिन रिटर्न, जोखिम, टैक्स और जरूरत के समय पैसा निकालने के नियम अलग-अलग हैं। इसलिए निवेश से पहले दोनों विकल्पों का अंतर समझना जरूरी है।

FD में पहले से तय रहता है रिटर्न

फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा जमा करते समय ही बैंक ब्याज दर तय कर देता है। इससे निवेशक को पहले से पता होता है कि तय अवधि पूरी होने के बाद उसे मैच्योरिटी पर कितनी रकम मिलेगी।

यही कारण है कि FD उन लोगों के बीच ज्यादा लोकप्रिय है, जो अपने निवेश पर बाजार का जोखिम नहीं लेना चाहते और तय रिटर्न पसंद करते हैं। इसमें रिटर्न बाजार की चाल के आधार पर नहीं बदलता।

Debt Mutual Fund में रिटर्न तय नहीं

Debt Mutual Fund सरकारी बॉन्ड, कॉरपोरेट बॉन्ड और दूसरी डेट सिक्योरिटीज में पैसा लगाते हैं। इनमें मिलने वाला रिटर्न पहले से तय नहीं होता। ब्याज दरों और बाजार की स्थिति में बदलाव होने पर फंड का प्रदर्शन भी बदल सकता है।

हालांकि सही परिस्थितियों में डेट म्यूचुअल फंड से FD के मुकाबले ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना हो सकती है। इसके साथ ही निवेशक को बाजार से जुड़ा कुछ जोखिम भी स्वीकार करना पड़ता है।

जरूरत पर पैसा निकालने के नियम भी अलग

FD से मैच्योरिटी से पहले पैसा निकाला जा सकता है, लेकिन समय से पहले FD तोड़ने पर बैंक पेनल्टी लगा सकता है। इसके अलावा तय ब्याज के मुकाबले कम ब्याज भी मिल सकता है।

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Debt Mutual Fund से आमतौर पर पैसा आसानी से निकाला जा सकता है। हालांकि कुछ स्कीम में निवेश के शुरुआती समय के दौरान रकम निकालने पर एग्जिट लोड देना पड़ सकता है।

टैक्स में नहीं रहा पहले जैसा बड़ा अंतर

FD से मिलने वाला ब्याज आपकी सालाना कमाई में जोड़ दिया जाता है। फिर आपकी इनकम जिस टैक्स स्लैब में आती है, उसी हिसाब से इस ब्याज पर टैक्स देना होता है।

इसी तरह 1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदे गए डेट म्यूचुअल फंड से हुई कमाई पर भी आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। इसलिए टैक्स के मामले में अब FD और डेट फंड के बीच ज्यादा फर्क नहीं रह गया है।

आपके लिए कौन-सा ऑप्शन सही?

अगर आपकी पहली जरूरत निवेश की सुरक्षा और तय रिटर्न है, तो FD बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं, अगर आप थोड़ा बाजार जोखिम लेने को तैयार हैं और बेहतर रिटर्न की संभावना चाहते हैं, तो निवेश अवधि के हिसाब से डेट म्यूचुअल फंड चुना जा सकता है।

अंतिम फैसला अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

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