FII की भारी बिकवाली के बीच किसने संभाला शेयर बाजार? ₹38,300 करोड़ के निवेश ने खींचा सबका ध्यान
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी और घरेलू निवेशकों के बीच दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। सितंबर में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने अरबों डॉलर के शेयर बेच दिए, जबकि घरेलू म्यूचुअल फंड ने अपनी खरीदारी और बढ़ा दी। SIP के जरिए भी लगातार पैसा आ रहा है। लेकिन क्या घरेलू निवेशकों की यह ताकत विदेशी बिकवाली का दबाव लंबे समय तक झेल पाएगी? जानिए।

In Short
- सितंबर 2026 में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 3.8 अरब डॉलर की शुद्ध निकासी की।
- घरेलू म्यूचुअल फंड ने सितंबर में ₹38,300 करोड़ का शुद्ध इक्विटी निवेश किया, जो अगस्त के मुकाबले ज्यादा है।
- सितंबर में SIP योगदान ₹31,000 करोड़ रहा, लेकिन घरेलू निवेश से बाजार की गिरावट रुकने की गारंटी नहीं है।
सितंबर 2026 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 3.8 अरब डॉलर की निकासी की। वहीं, घरेलू म्यूचुअल फंड ने ₹38,300 करोड़ का निवेश किया। विदेशी बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया। लेकिन क्या यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा? जानिए।
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी और घरेलू निवेशकों का रुख अलग-अलग नजर आ रहा है। सितंबर 2026 में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय शेयरों से 3.8 अरब डॉलर निकाले। इसके उलट घरेलू म्यूचुअल फंड ने बाजार में ₹38,300 करोड़ लगाए।
DSP Mutual Fund की अक्टूबर की Tathya Economic Dashboard रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।
विदेशी निवेशकों ने अचानक क्यों बदला रुख?
रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 2.1 अरब डॉलर और अगस्त में 3.1 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश किया था।
लेकिन सितंबर में उन्होंने 3.8 अरब डॉलर की शुद्ध निकासी कर ली।
विदेशी निवेशकों के फैसलों पर वैश्विक ब्याज दरों, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, शेयरों की कीमत और कंपनियों की कमाई का असर पड़ता है।
जब विदेशी निवेशक बड़ी मात्रा में शेयर बेचते हैं, तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।
घरेलू म्यूचुअल फंड ने कितना पैसा लगाया?
विदेशी बिकवाली के बावजूद घरेलू म्यूचुअल फंड की खरीदारी बढ़ी है।
| महीना | घरेलू म्यूचुअल फंड का शुद्ध इक्विटी निवेश |
|---|---|
| जुलाई 2026 | ₹24,700 करोड़ |
| अगस्त 2026 | ₹29,300 करोड़ |
| सितंबर 2026 | ₹38,300 करोड़ |
इससे पता चलता है कि विदेशी निवेशकों की निकासी के बीच घरेलू फंड लगातार बाजार में पैसा लगा रहे हैं।
SIP के जरिए भी आ रहा पैसा
घरेलू निवेशकों की नियमित SIP का भी इसमें अहम योगदान है।
सितंबर में SIP के जरिए ₹31,000 करोड़ आए। अगस्त में यह आंकड़ा ₹31,100 करोड़ और जुलाई में ₹32,100 करोड़ था।
SIP से म्यूचुअल फंड को नियमित निवेश मिलता है। हालांकि, पूरी SIP रकम सीधे शेयर बाजार में नहीं लगती। फंड की खरीदारी निवेशकों की निकासी और फंड मैनेजर के फैसलों पर भी निर्भर करती है।
क्या घरेलू निवेशक बाजार को गिरने से बचा सकते हैं?
घरेलू म्यूचुअल फंड की खरीदारी विदेशी बिकवाली का असर कम करने में मदद कर सकती है। लेकिन यह शेयर बाजार में गिरावट रोकने की गारंटी नहीं है।
अगर विदेशी निवेशक लगातार पैसा निकालते रहे या घरेलू निवेश कमजोर पड़ा, तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।
निवेशकों को FII की खरीद-बिक्री, SIP निवेश और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर नजर रखनी चाहिए।
ध्यान रखें: घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन निवेश का फैसला सिर्फ विदेशी और घरेलू निवेश के आंकड़ों को देखकर नहीं करना चाहिए।