भारत में ETF और BEES क्यों हैं इतने पॉपुलर? जानें इनके फायदे, जोखिम और निवेश से जुड़ी जरूरी बातें

शेयर बाजार में निवेश के लिए अब सिर्फ स्टॉक और म्यूचुअल फंड ही विकल्प नहीं हैं। ETF और BEES भी निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। लेकिन क्या इनमें पैसा लगाना ज्यादा फायदेमंद है? KCC Group के चेयरमैन शरद कोहली ने इनकी खूबियों और जोखिम को लेकर अहम बातें बताई हैं, जिन्हें निवेश से पहले जानना जरूरी है।

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In Short

  • ETF के जरिए डिफेंस, FMCG और IT जैसे सेक्टरों में एक साथ कई कंपनियों में निवेश का मौका मिलता है।
  • म्यूचुअल फंड के मुकाबले ETF में जोखिम और कम समय में रिटर्न की संभावना ज्यादा हो सकती है।
  • - ETF में बाजार के कारोबारी समय के दौरान शेयरों की तरह खरीद-बिक्री की सुविधा मिलती है।

By Gaurav Kumar:

शेयर बाजार में पैसा लगाने के लिए जरूरी नहीं कि निवेशक हर कंपनी के शेयर अलग-अलग खरीदें। आज निवेश के कई ऐसे विकल्प मौजूद हैं, जिनके जरिए एक साथ कई कंपनियों में पैसा लगाया जा सकता है। इनमें ETF और BEES भी शामिल हैं। खास बात यह है कि इनसे निवेशक अपनी पसंद के सेक्टर में निवेश कर सकते हैं। लेकिन ये म्यूचुअल फंड से कितने अलग हैं और इनमें कितना जोखिम है? आइए समझते हैं।

बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर साक्षी बत्रा के सवालों का जवाब देते हुए KCC Group के फाउंडर और चेयरमैन शरद कोहली ने कहा कि Exchange-Traded Funds (ETFs) और BEES निवेशकों के लिए स्टॉक और म्यूचुअल फंड के बीच का एक विकल्प हैं। इनमें निवेशकों को बाजार में सीधे हिस्सा लेने के साथ कई कंपनियों में पैसा लगाने की सुविधा मिलती है। उन्होंने बताया कि इनकी लोकप्रियता क्यों बढ़ रही है और निवेशकों के लिए इनमें क्या फायदे और जोखिम हैं।

ETF कैसे काम करता है?

शरद कोहली के मुताबिक, ETF में स्टॉक और म्यूचुअल फंड दोनों की कुछ खासियतें मिलती हैं। इसमें निवेशक को हर कंपनी का शेयर अलग से खरीदने की जरूरत नहीं होती। ETF के जरिए एक साथ कई कंपनियों में निवेश किया जा सकता है। इससे उन लोगों को फायदा हो सकता है, जिनके पास अलग-अलग कंपनियों की रिसर्च करने का समय या अनुभव नहीं है।

प्रतीकात्मक तस्वीर

एक शेयर नहीं, पूरे सेक्टर में लगा सकते हैं पैसा

कोहली ने बताया कि ETF की मदद से निवेशक किसी खास सेक्टर में पैसा लगा सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी को डिफेंस, FMCG या IT सेक्टर में तेजी आने की उम्मीद है, तो वह उस सेक्टर से जुड़े ETF में निवेश कर सकता है। इससे उसका पैसा किसी एक कंपनी के बजाय कई कंपनियों में लगता है। अगर एक कंपनी का प्रदर्शन खराब होता है, तो दूसरी कंपनियों के जरिए जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।

ETF में कितना जोखिम और रिटर्न?

कोहली के मुताबिक, ETF में ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना हो सकती है, लेकिन इसके साथ जोखिम भी जुड़ा है। उन्होंने कहा कि कुछ ETFs म्यूचुअल फंड के मुकाबले ज्यादा जोखिम वाले हो सकते हैं और इनमें जल्दी रिटर्न मिलने की संभावना भी रहती है। अगर चुने गए सेक्टर में तेजी आती है, तो ETF की कीमत बढ़ सकती है। वहीं, सेक्टर में गिरावट आने पर निवेशकों को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

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म्यूचुअल फंड से कितना अलग है ETF?

कोहली के अनुसार, लंबे समय तक निवेश बनाए रखने वाले लोगों के लिए म्यूचुअल फंड बेहतर विकल्प हो सकते हैं। वहीं, ETF उन निवेशकों को पसंद आ सकते हैं, जो बाजार के बदलावों के हिसाब से निवेश करना चाहते हैं। ETF को शेयरों की तरह बाजार के कारोबारी समय में खरीदा और बेचा जा सकता है। हालांकि, हर ETF म्यूचुअल फंड से ज्यादा जोखिम वाला नहीं होता। जोखिम उसके सेक्टर और निवेश के तरीके पर निर्भर करता है।

निवेशकों के बीच क्यों बढ़ रही लोकप्रियता?

ETF और BEES की लोकप्रियता बढ़ने के पीछे निवेशकों की बदलती सोच भी है। अब लोग निवेश की लागत, आसानी से खरीदने-बेचने की सुविधा और अलग-अलग सेक्टरों में पैसा लगाने के विकल्प तलाश रहे हैं। ETFs इन जरूरतों को पूरा करने का एक तरीका हैं। इनके जरिए निवेशक बिना हर कंपनी का शेयर चुने बाजार में हिस्सा ले सकते हैं।

निवेश करने से पहले क्या समझना जरूरी?

शरद कोहली का कहना है कि ETF निवेश का एक लचीला विकल्प जरूर है, लेकिन इसमें अनुशासन बनाए रखना भी जरूरी है। निवेशकों को पैसा लगाने से पहले अपने लक्ष्य, निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता समझनी चाहिए। केवल जल्दी मुनाफा कमाने की उम्मीद में ETF चुनना सही नहीं है।

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