बाजार में गिरावट! क्या Dividend Yield फंड में एंट्री करने का ये है सही समय?

Dividend Yield Funds उन कंपनियों पर फोकस करते हैं जहां डिविडेंड यील्ड अपेक्षाकृत ज्यादा होती है। आनंद राठी वेल्थ की म्यूचुअल फंड हेड श्वेता रजानी ने बताया कि यह कैटेगरी पोर्टफोलियो में कैसे फिट हो सकती है। उन्होंने Growth और Dividend Option को लेकर निवेशकों का कन्फ्यूजन भी दूर किया और टैक्स एफिशिएंसी से जुड़ी अहम बात बताई।

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बाजार में गिरावट के बाद Dividend Yield Fund
बाजार में गिरावट के बाद Dividend Yield Fund

In Short

  • Dividend Yield Funds आमतौर पर ज्यादा डिविडेंड यील्ड वाली कंपनियों पर फोकस करते हैं
  • श्वेता रजानी ने एक Flexi Cap के साथ एक Dividend Yield Fund पर विचार करने की बात कही
  • - ज्यादा टैक्स ब्रैकेट वाले निवेशकों के लिए Growth Option अधिक टैक्स एफिशिएंट हो सकता है

By Shakshi:

डिविडेंड यील्ड फंड म्यूचुअल फंड की ऐसी कैटेगरी है, जो आमतौर पर उन कंपनियों में निवेश करती है जिनकी डिविडेंड यील्ड Nifty 50 की औसत डिविडेंड यील्ड से ज्यादा होती है।

अगर Nifty 50 कंपनियों की औसत डिविडेंड यील्ड करीब 1.1% से 1.2% है, तो डिविडेंड यील्ड फंड ऐसी कंपनियों पर फोकस कर सकते हैं, जहां यह यील्ड करीब 2% से 3% तक हो। इससे निवेशकों को शेयर की कीमत में तेजी के अलावा डिविडेंड से भी फायदा मिलने की संभावना रहती है।

बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर शैलेंद्र भटनागर के सवालों का जवाब देते हुए आनंद राठी वेल्थ की म्यूचुअल फंड हेड श्वेता रजानी ने कहा कि डिविडेंड यील्ड फंड पोर्टफोलियो में शामिल करने के लिए एक अच्छी कैटेगरी हो सकती है। ज्यादातर डिविडेंड यील्ड फंड का करीब 65% से 70% निवेश लार्जकैप में होता है और बाकी निवेश मिडकैप और स्मॉलकैप में रहता है। इस लिहाज से इसकी बनावट काफी हद तक फ्लेक्सीकैप फंड जैसी दिखाई देती है।

श्वेता रजानी के मुताबिक, इस कैटेगरी को AUM का भी फायदा मिलता है। पूरी इंडस्ट्री का AUM करीब ₹32,000 करोड़ होने के कारण इस सेगमेंट में निवेश को समाहित करने की पर्याप्त गुंजाइश है। पिछले एक साल में इस कैटेगरी में ज्यादा तेजी नहीं आई है, इसलिए मीन रिवर्जन की संभावना को देखते हुए यह एंट्री के लिए अच्छा मौका हो सकता है।

उन्होंने कहा कि निवेशक दो फ्लेक्सीकैप फंड रखने के बजाय पोर्टफोलियो में एक फ्लेक्सीकैप और एक डिविडेंड यील्ड फंड रखने पर विचार कर सकते हैं।

Growth या Dividend Option में क्या चुनें?

श्वेता रजानी ने कहा कि डिविडेंड यील्ड फंड का मतलब यह नहीं है कि निवेशक को Dividend Option ही चुनना चाहिए। निवेशक Growth Option चुन सकते हैं, जो खासकर ज्यादा टैक्स ब्रैकेट वाले निवेशकों के लिए अधिक टैक्स एफिशिएंट हो सकता है।

फंड को उसके पोर्टफोलियो में मौजूद कंपनियों से मिलने वाला डिविडेंड दोबारा निवेश होता रहता है, जिससे निवेश को आगे बढ़ने का मौका मिलता है। अगर निवेशक को नियमित पैसे की जरूरत है, तो Dividend Option के बजाय Systematic Withdrawal Plan यानी SWP का इस्तेमाल किया जा सकता है।

हालांकि कम टैक्स ब्रैकेट वाले निवेशक Dividend Option पर भी विचार कर सकते हैं। रजानी के मुताबिक, सामान्य तौर पर Growth Option में बने रहना और जरूरत पड़ने पर पैसा निकालना बेहतर विकल्प हो सकता है।

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