म्यूचुअल फंड से लॉन्ग टर्म में पैसा बनाना है? आनंद राठी वेल्थ की श्वेता रजनी ने बताया सही एसेट अलोकेशन रणनीति
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए Equity Portfolio की रणनीति में Large Cap की भूमिका बढ़ सकती है। Anand Rathi Wealth की श्वेता रजनी ने रिटर्न लक्ष्य, निवेश अवधि और जोखिम क्षमता के आधार पर Asset Allocation की सलाह दी है। जानिए Equity में किस सेगमेंट को कितनी जगह दी जा सकती है

In Short
- 5 साल से ज्यादा अवधि वाले निवेशकों के लिए 70-80% Equity Allocation की सलाह
- Equity Portfolio में करीब 55-60% हिस्सा Large Cap में रखने का सुझाव
- Mid Cap और Small Cap में मजबूत कमाई के बावजूद Valuation पर नजर जरूरी
लंबी अवधि के लिए निवेश करने वालों को अब अपने इक्विटी पोर्टफोलियो में Large Cap शेयरों और फंड्स को ज्यादा जगह देने पर विचार करना चाहिए। बिजनेस टुडे के शो में सीनियर एंकर शैलेंद्र भटनागर के सवालों का Anand Rathi Wealth की म्यूचुअल फंड हेड श्वेता रजनी ने जवाब देते हुए कहा कि, Mid Cap और Small Cap कंपनियों की कमाई मजबूत बनी हुई है, लेकिन मौजूदा वैल्यूएशन को देखते हुए Large Cap सेगमेंट नई रकम लगाने के लिए ज्यादा आकर्षक नजर आ रहा है।
रिटर्न के लक्ष्य से तय हो Asset Allocation
श्वेता रजनी के मुताबिक, निवेशक को सबसे पहले यह तय करना चाहिए कि उसका रिटर्न का लक्ष्य क्या है, वह कितना जोखिम उठा सकता है और निवेश कितने समय के लिए करना चाहता है। केवल उस कैटेगरी के पीछे भागना सही रणनीति नहीं है जो हाल में सबसे ज्यादा रिटर्न दे रही हो।
अगर किसी निवेशक का लक्ष्य करीब 14-15% रिटर्न का है और निवेश की अवधि पांच साल से ज्यादा है, तो उसके पोर्टफोलियो में इक्विटी की हिस्सेदारी ज्यादा रह सकती है। ऐसे निवेशकों के लिए करीब 70-80% रकम इक्विटी में रखने वाला पोर्टफोलियो उपयुक्त हो सकता है।
कम रिटर्न लक्ष्य हो तो Debt की हिस्सेदारी बढ़ाएं
जिन निवेशकों का लक्ष्य करीब 10-11% रिटर्न का है या जिनकी निवेश अवधि तीन से पांच साल की है, उनके लिए Debt और Commodity की हिस्सेदारी बढ़ाने की सलाह दी गई है।
रजनी के मुताबिक, Debt करीब 6-7% तक रिटर्न दे सकता है, जबकि Equity में Debt के मुकाबले लगभग दोगुना रिटर्न देने की क्षमता हो सकती है। हालांकि, इक्विटी में निवेश करने वाले निवेशकों को बाजार की उतार-चढ़ाव वाली स्थिति से गुजरने के लिए धैर्य रखना जरूरी है।
Equity में 55-60% तक Large Cap रखने की सलाह
इक्विटी पोर्टफोलियो के अंदर श्वेता रजनी की मौजूदा पसंद साफ तौर पर Large Cap की तरफ है। उनके मुताबिक, कुल Equity Allocation का करीब 55-60% हिस्सा Large Cap में रखा जा सकता है।
इसके बाद बची हुई रकम को आने वाले महीनों में Mid Cap और Small Cap के बीच बराबर बांटा जा सकता है। इस रणनीति का मकसद पोर्टफोलियो को केवल किसी एक मार्केट कैप कैटेगरी पर निर्भर होने से बचाना है।
Large Cap क्यों लग रहे ज्यादा आकर्षक?
इस सलाह के पीछे Valuation, Earnings Visibility और Liquidity जैसे फैक्टर अहम हैं। रजनी के मुताबिक, Large Cap फिलहाल Fair Value के मुकाबले Discount पर ट्रेड कर रहे हैं, जबकि Mid Cap और Small Cap कंपनियां Fair Value के आसपास पहुंच चुकी हैं।
यही वजह है कि नए निवेश के लिए Large Cap की स्थिति बेहतर दिखाई दे रही है। हालांकि, Mid और Small Cap कंपनियों में Profit Growth अब भी मजबूत बनी हुई है।
पोर्टफोलियो कैसे तैयार करें निवेशक?
Large Cap हिस्से के लिए निवेशक एक Large Cap Fund, एक Flexi Cap Fund और एक या दो Large and Mid Cap Funds को पोर्टफोलियो का Core बना सकते हैं।
इसके अलावा बाकी Equity Allocation में Mid Cap और Small Cap Funds के साथ एक या दो Multi Cap Funds शामिल किए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य अलग-अलग मार्केट कैप में निवेश बनाए रखते हुए किसी एक सेगमेंट पर जरूरत से ज्यादा दांव लगाने से बचना है।
कुल मिलाकर, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए संदेश यही है कि अगर समय और जोखिम लेने की क्षमता पर्याप्त है तो Equity Allocation ऊंचा रखा जा सकता है, लेकिन मौजूदा हालात में Large Cap को पोर्टफोलियो का मुख्य आधार बनाना बेहतर रणनीति हो सकती है।