लॉन्ग टर्म में मोटी कमाई का मौका! बैंक ऑफ इंडिया म्यूचुअल फंड के Value Fund में 11 सितंबर तक कर सकेंगे निवेश
Bank of India Value Fund का बेंचमार्क Nifty 500 TRI है और इसे फंड मैनेजर नव भारद्वाज मैनेज करेंगे। इसमें न्यूनतम निवेश ₹5,000 है।

Bank of India Mutual Fund ने नया Bank of India Value Fund लॉन्च किया है। यह एक ओपन-एंडेड इक्विटी स्कीम है, जो वैल्यू इन्वेस्टिंग रणनीति के तहत निवेश करेगी। फंड का न्यू फंड ऑफर (NFO) 28 अगस्त 2026 को खुल चुका है और 11 सितंबर 2026 को बंद होगा।
Bank of India Value Fund का बेंचमार्क Nifty 500 TRI है और इसे फंड मैनेजर नव भारद्वाज मैनेज करेंगे। इसमें न्यूनतम निवेश ₹5,000 है।
किन निवेशकों के लिए अच्छा है ये फंड?
फंड को उन निवेशकों के लिए बनाया गया है जो कम से कम पांच साल की अवधि के लिए इक्विटी और इक्विटी से जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश के जरिए लंबी अवधि में पूंजी बढ़ाना चाहते हैं।
सस्ते शेयर नहीं, बदलते फंडामेंटल पर फोकस
फंड का लक्ष्य लंबी अवधि में पूंजी बढ़ाना है। इसके लिए कुल एसेट्स का 80% से 100% हिस्सा वैल्यू इन्वेस्टमेंट रणनीति अपनाने वाली कंपनियों के इक्विटी और इक्विटी से जुड़े इंस्ट्रूमेंट्स में लगाया जाएगा। फंड किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा और अलग-अलग मार्केट कैप वाली कंपनियों में निवेश करेगा।
Bank of India Investment Managers Private Limited (BOIIM) के CEO मोहित भाटिया ने कहा कि फंड केवल सस्ते दिखने वाले शेयरों की तलाश नहीं करेगा। उनका कहना है कि रणनीति का फोकस उन कंपनियों पर होगा जहां फंडामेंटल में मापने योग्य बदलाव आगे चलकर वैल्यू क्रिएशन और बेहतर रिटर्न में बदल सकता है।
Rate of Change बनेगा निवेश का आधार
फंड की निवेश रणनीति Rate of Change (ROCh) पर आधारित है। इसमें मांग, ऑर्डर, उत्पादन या कीमतों में तेज बदलाव की पहचान की जाएगी और देखा जाएगा कि इसका असर कंपनी के रेवेन्यू, मार्जिन और रिटर्न पर कैसे पड़ता है।
रणनीति चार चरणों में काम करेगी- Stimulus, Rate of Change, P&L Transmission और ROCE Inflexion। फंड के CIO आलोक सिंह के मुताबिक, सिर्फ शेयर का सस्ता होना वैल्यू नहीं है। फंड उन कंपनियों में निवेश के मौके तलाशेगा जहां बिजनेस फंडामेंटल में बदलाव से ROCE में सुधार की शुरुआत दिखाई दे।
50-80 कंपनियों का पोर्टफोलियो
फंड में करीब 50 से 80 कंपनियां शामिल हो सकती हैं। पोर्टफोलियो बनाने के लिए पांच-फिल्टर प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसमें अवसरों की पहचान, तय ट्रिगर्स के आधार पर निवेश थीसिस की जांच, पुष्टि के बाद पोजिशन का आकार तय करना, Rate of Change कमजोर होने पर निवेश घटाना और अगली संभावना में पूंजी लगाना शामिल है।