म्यूचुअल फंड में निवेश से पहले समझें Alpha और Beta, जानिए कैसे तय होता है फंड का जोखिम और रिटर्न

म्यूचुअल फंड में निवेश से पहले सिर्फ रिटर्न देखना पर्याप्त नहीं है। Alpha, Beta और अन्य जरूरी मेट्रिक्स से निवेशक फंड के प्रदर्शन, जोखिम और बाजार के मुकाबले उसकी स्थिति को समझ सकते हैं। जानिए कैसे Alpha, Beta, Sharpe Ratio, Sortino Ratio और Information Ratio निवेश के फैसले में मदद करते हैं।

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In Short

  • Alpha बताता है कि म्यूचुअल फंड ने बेंचमार्क के मुकाबले कितना अतिरिक्त रिटर्न दिया और फंड मैनेजर की परफॉर्मेंस कैसी रही।
  • Beta से पता चलता है कि कोई फंड बाजार के मुकाबले कितना ज्यादा या कम उतार-चढ़ाव वाला है और उसमें कितना जोखिम है।
  • Standard Deviation, Sharpe Ratio, Sortino Ratio, P/E, P/BV और Information Ratio जैसे मेट्रिक्स से निवेशक फंड के रिटर्न, जोखिम और प्रदर्शन का बेहतर आकलन कर सकते हैं।

By Sonam:

म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय ज्यादातर लोग सिर्फ यह देखते हैं कि फंड ने कितना रिटर्न दिया है। लेकिन बेहतर निवेश के लिए यह जानना भी जरूरी है कि उस रिटर्न को पाने में कितना जोखिम लिया गया। Alpha और Beta जैसे मेट्रिक्स की मदद से निवेशक समझ सकते हैं कि कोई फंड बाजार के मुकाबले कितना अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और उसमें कितना उतार-चढ़ाव है।

Alpha क्या बताता है? फंड ने बेंचमार्क को कितना पीछे छोड़ा

Alpha यह मापता है कि कोई म्यूचुअल फंड अपने बेंचमार्क इंडेक्स की तुलना में कितना अतिरिक्त रिटर्न देने में सफल रहा है। यह फंड मैनेजर की एक्टिव मैनेजमेंट क्षमता को दर्शाता है।

Alpha को एक संख्या के रूप में दिखाया जाता है, जो बताती है कि फंड का प्रदर्शन बेंचमार्क से कितना ऊपर या नीचे रहा।

अगर किसी फंड का Alpha पॉजिटिव है तो इसका मतलब है कि उसने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया है। जैसे +1% Alpha का मतलब है कि फंड ने बेंचमार्क से 1% ज्यादा रिटर्न दिया।

वहीं Zero Alpha बताता है कि फंड का रिटर्न बेंचमार्क के बराबर रहा। जबकि Negative Alpha का मतलब है कि फंड बेंचमार्क से पीछे रहा है।

Beta क्या है? फंड के जोखिम को समझने का तरीका

Beta किसी म्यूचुअल फंड की बाजार के मुकाबले वोलैटिलिटी यानी उतार-चढ़ाव को मापता है। यह बताता है कि बाजार में बदलाव आने पर फंड के रिटर्न में कितना बदलाव हो सकता है।

अगर किसी फंड का Beta 1 से ज्यादा है तो वह बाजार की तुलना में ज्यादा उतार-चढ़ाव वाला माना जाता है। उदाहरण के लिए Beta 1.2 का मतलब है कि फंड बाजार से 20% ज्यादा वोलैटाइल है।

Beta 1 होने पर फंड की चाल बाजार जैसी होती है। वहीं Beta 1 से कम होने पर फंड में कम उतार-चढ़ाव और कम जोखिम दिखाई देता है।

Beta की गणना कैसे की जाती है?

Beta को फंड और बाजार के पुराने रिटर्न के आधार पर निकाला जाता है। इसका फॉर्मूला होता है:

  • Beta = फंड रिटर्न और मार्केट रिटर्न का Covariance / मार्केट रिटर्न का Variance

Covariance यह बताता है कि फंड और बाजार के रिटर्न किस तरह एक साथ चलते हैं। वहीं Variance बाजार के रिटर्न में होने वाले उतार-चढ़ाव को मापता है।

निवेशकों के लिए Beta क्यों है जरूरी?

Beta की मदद से निवेशक फंड के जोखिम को समझ सकते हैं। अलग-अलग Beta वाले फंड चुनकर पोर्टफोलियो में जोखिम को संतुलित किया जा सकता है।

यह यह समझने में भी मदद करता है कि किसी फंड ने जितना जोखिम लिया है, उसके मुकाबले उसका प्रदर्शन कितना बेहतर रहा है।

Standard Deviation से समझें फंड में कितना उतार-चढ़ाव है

Standard Deviation म्यूचुअल फंड के रिटर्न में होने वाले बदलाव यानी जोखिम को मापता है। यह बताता है कि फंड के रिटर्न औसत रिटर्न से कितने अलग रहे हैं।

Image Credit : Business Today

ज्यादा Standard Deviation का मतलब ज्यादा उतार-चढ़ाव और ज्यादा जोखिम होता है, जबकि कम Standard Deviation ज्यादा स्थिर रिटर्न को दर्शाता है।

Sharpe Ratio बताता है जोखिम के बदले कितना मिला रिटर्न

Sharpe Ratio यह दिखाता है कि निवेशक को लिए गए कुल जोखिम के बदले कितना अतिरिक्त रिटर्न मिला है।

अगर किसी फंड का Sharpe Ratio ज्यादा है तो इसका मतलब है कि फंड ने जोखिम के मुकाबले बेहतर रिटर्न दिया है।

Sortino Ratio सिर्फ नुकसान के जोखिम पर करता है फोकस

Sortino Ratio Sharpe Ratio जैसा ही है, लेकिन यह सिर्फ गिरावट यानी नेगेटिव रिटर्न के जोखिम को ध्यान में रखता है।

यह बताता है कि कोई फंड नुकसान वाले उतार-चढ़ाव को कितनी अच्छी तरह संभाल रहा है। ज्यादा Sortino Ratio बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है।

P/E और P/BV Ratio से समझें फंड की वैल्यूएशन

P/E Ratio किसी कंपनी की बाजार कीमत और उसकी कमाई की तुलना करता है। इक्विटी म्यूचुअल फंड में यह फंड में शामिल कंपनियों की वैल्यूएशन को समझने में मदद करता है।

वहीं P/BV Ratio कंपनी की बाजार कीमत और उसकी बुक वैल्यू की तुलना करता है। यह बताता है कि शेयर अपनी वास्तविक वैल्यू के मुकाबले महंगा है या सस्ता।

Information Ratio से पता चलती है फंड मैनेजर की क्षमता

Information Ratio यह मापता है कि फंड मैनेजर बेंचमार्क के मुकाबले लगातार कितना बेहतर रिटर्न दे पा रहा है।

ज्यादा Information Ratio यह दिखाता है कि फंड मैनेजर ने जोखिम को ध्यान में रखते हुए लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है।

Alpha, Beta और अन्य मेट्रिक्स क्यों हैं महत्वपूर्ण?

Alpha, Beta, Standard Deviation, Sharpe Ratio, Sortino Ratio, P/E Ratio, P/BV Ratio और Information Ratio जैसे मेट्रिक्स की मदद से निवेशक किसी म्यूचुअल फंड के रिटर्न, जोखिम और प्रदर्शन को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं। ये मेट्रिक्स निवेश का फैसला लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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