Electoral Bond पर Supreme Court का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम में गोपनीय का प्रावधान सूचना का अधिकार कानून का उल्लंघन करता है। अब पब्लिक को पता होगा कि किसने, किस पार्टी की फंडिंग की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम मौजूदा स्वरूप में सूचना के अधिकार कानून का उल्लंघन कर रहा है।

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चुनावी बॉन्ड योजना पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को बहुत बड़ा झटका दिया है
चुनावी बॉन्ड योजना पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को बहुत बड़ा झटका दिया है

By Harsh Verma:

Electoral Bond योजना पर Supreme Court ने सरकार को बहुत बड़ा झटका दिया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले पांच सालों के चंदे का हिसाब-किताब भी मांग लिया है। अब निर्वाचन को बताना होगा कि पिछले पांच साल में किस पार्टी को किसने कितना चंदा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह State Bank of India से पूरी जानकारी जुटाकर इसे अपनी वेबसाइट पर साझा करे। इस फैसले को उद्योग जगत के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है।

तो सबसे पहले Electoral Bond क्या होता है?

मोदी सरकार ने 2017 में इलेक्टोरल बॉन्ड लाने की घोषणा की थी। 2018 में इसे अधिसूचित कर दिया गया था। इसके तहत सरकार हर साल चार बार 10-10 दिनों के लिए बॉन्ड जारी करती है। बॉन्ड जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर महीने में जारी किए जाते हैं। मूल्य होता है- एक हजार, दस हजार, दस लाख या एक करोड़ रुपये।

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

अब सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा समझिए, सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम में गोपनीय का प्रावधान सूचना का अधिकार कानून का उल्लंघन करता है। अब पब्लिक को पता होगा कि किसने, किस पार्टी की फंडिंग की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम मौजूदा स्वरूप में सूचना के अधिकार कानून का उल्लंघन कर रहा है।

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