लखनऊ: Digital Arrest से बचके रहना, फोन पर ही खाली कर लेते हैं बैंक अकाउंट
इंदिरा नगर सेक्टर-16 की निवासी इंदिरा राय को 12 सितंबर को एक अनजान नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस का इंस्पेक्टर नेहरा बताया और कहा कि उनके आधार कार्ड से एचडीएफसी में एक बैंक अकाउंट खोला गया है, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग हो रही है। जालसाज ने उन्हें बताया कि इस अकाउंट से ड्रग्स सप्लाई की जा रही है और इस मामले में दिल्ली में एफआईआर भी दर्ज की गई है।

लखनऊ में साइबर अपराधियों ने एक रिटायर्ड प्रोफेसर को डिजिटल अरेस्ट कर 54 लाख रुपये से अधिक की ठगी की है। यह घटना SGPGI की एक एसोसिएट प्रोफेसर से करोड़ों की ठगी के बाद सामने आई है। रिटायर्ड महिला प्रोफेसर की शिकायत पर लखनऊ साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है, और अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।
इंदिरा नगर सेक्टर-16 की निवासी इंदिरा राय को 12 सितंबर को एक अनजान नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस का इंस्पेक्टर नेहरा बताया और कहा कि उनके आधार कार्ड से एचडीएफसी में एक बैंक अकाउंट खोला गया है, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग हो रही है। जालसाज ने उन्हें बताया कि इस अकाउंट से ड्रग्स सप्लाई की जा रही है और इस मामले में दिल्ली में एफआईआर भी दर्ज की गई है।
जब इंदिरा राय ने दिल्ली आने में असमर्थता जताई, तो कॉल करने वाले ने कहा कि वह अपने सीनियर अधिकारी से बात करवा रहा है। इसके बाद उन्हें एक वीडियो कॉल आई, जिसमें एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी में था और उन्होंने कहा कि यदि वे किसी से फोन पर बात करती हैं, तो उन्हें जेल भेज दिया जाएगा।
ठगी की प्रक्रिया
वीडियो कॉल में महिला से पूछताछ के नाम पर उनके बैंक खातों की पूरी जानकारी ली गई। ठगों ने महिला की एफडी तुड़वाकर बचत खातों में ट्रांसफर करवा दी। इसके बाद, उन्हें एसबीआई का एक अकाउंट देकर कहा गया कि उसमें पैसे ट्रांसफर कर दें, जिसे वे जांच करके वापस करेंगे। महिला ने अपने अकाउंट से कुल 54,61,000 रुपये उस अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए। उन्हें इस धोखाधड़ी की जानकारी तब हुई जब अगले दिन बैंक से कॉल आई और कहा गया कि उन्हें एफआईआर दर्ज करानी चाहिए।
डिजिटल अरेस्ट क्या है?
कानूनी दृष्टिकोण से "डिजिटल अरेस्ट" की कोई मान्यता नहीं है, लेकिन ठगों के लिए यह एक महत्वपूर्ण टूल बन चुका है। इस प्रक्रिया में स्कैमर्स एक वर्चुअल लॉकअप बना देते हैं और फेक अरेस्ट मेमो पर दस्तखत करवाते हैं। डिजिटल अरेस्ट के तहत, ये ठग बड़े अधिकारियों और एजेंसियों का डर दिखाते हैं, जिससे पीड़ित व्यक्ति घर से बाहर नहीं निकलता। स्कैमर्स का उद्देश्य पीड़ित को इतना डरा देना है कि वे किसी भी प्रकार की सहायता नहीं मांगें।